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क्या उत्तराखंड में समय से पहले होंगे विधानसभा चुनाव? देहरादून में भाजपा की बड़ी बैठक!

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देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की सियासत में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सरगर्मियां अचानक बेहद तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य में सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए अपने ‘मिशन 2027’ के तहत सांगठनिक ताने-बाने को बुनना शुरू कर दिया है। इसी सिलसिले में रविवार को राजधानी देहरादून में एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय संगठनात्मक बैठक का आयोजन किया जा रहा है। इस महामंथन में शिरकत करने पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद तरुण चुघ का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने शासकीय आवास पर गर्मजोशी से स्वागत किया। बैठक के औपचारिक आगाज से पहले नेताओं के बीच बंद कमरे में हुई इस आत्मीय मुलाकात ने राज्य के राजनीतिक पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

शासकीय आवास पर शीर्ष नेताओं का जमावड़ा, समसामयिक और सांगठनिक मुद्दों पर हुआ गहन मंथन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने आधिकारिक फेसबुक हैंडल के जरिए इस शिष्टाचार और रणनीतिक मुलाकात की कुछ तस्वीरें साझा करते हुए इस बात की पुष्टि की। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने देहरादून स्थित अपने शासकीय आवास पर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ से मुलाकात की है। इस बैठक में उनके साथ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट भी विशेष रूप से मौजूद रहे।

मुलाकात के दौरान दोनों शीर्ष नेताओं के बीच राज्य के विभिन्न समसामयिक मुद्दों, सरकार के कामकाज और संगठन को और अधिक गतिशील बनाने के विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीएम आवास पर हुई यह प्रारंभिक मंत्रणा रविवार को होने वाली मुख्य सांगठनिक बैठक की दिशा तय करने में बेहद अहम भूमिका निभाएगी।

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बूथ स्तर को अभेद्य किला बनाने की तैयारी, 2026 के अंत में भी हो सकते हैं चुनाव

सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, रविवार को आयोजित होने वाली इस मुख्य सांगठनिक बैठक का एजेंडा बेहद स्पष्ट और ठोस है। इसमें पार्टी के आगामी जनसंपर्क कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने के साथ-साथ जमीनी स्तर यानी बूथ स्तर पर संगठन को पूरी तरह अभेद्य बनाने की रणनीति पर काम होगा। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व राज्य में लगातार तीसरी बार प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है और इसके लिए संगठन के हर एक छोटे-बड़े कार्यकर्ता को अभी से चुनावी मोड में लाने की तैयारी है।

गौरतलब है कि उत्तराखंड की वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल फरवरी 2027 में पूरा होने जा रहा है, जिसके चलते नियमानुसार चुनाव इसी अवधि में होने चाहिए। लेकिन, उत्तराखंड के सियासी गलियारों और सत्ता के गलियारों में एक और नई चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली जनगणना जैसे कुछ बड़े प्रशासनिक कारणों के चलते सूबे के विधानसभा चुनाव तय समय से कुछ महीने पहले यानी साल 2026 के अंत (नवंबर या दिसंबर) में भी कराए जा सकते हैं। हालांकि, इन कयासों के बीच चुनाव की वास्तविक और आधिकारिक तारीखों का अंतिम फैसला भारत निर्वाचन आयोग ही चुनाव से ठीक कुछ महीने पहले करेगा।

70 सीटों के चक्रव्यूह को भेदने की रणनीति, आरक्षित सीटों पर विशेष फोकस

उत्तराखंड की कुल 70 विधानसभा सीटों वाले इस सियासी रणक्षेत्र का गणित बेहद दिलचस्प है। राज्य की इन 70 सीटों में से 13 सीटें अनुसूचित जाति (एससी) और 2 सीटें अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए पूरी तरह आरक्षित हैं। ऐसे में भाजपा आलाकमान इन आरक्षित सीटों के साथ-साथ उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहा है जहां पिछली बार मुकाबला बेहद कड़ा था।

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चुनाव चाहे अपने तय समय वर्ष 2027 में हों या फिर किसी प्रशासनिक बदलाव के चलते 2026 के अंत में समय से पहले करा दिए जाएं, भाजपा किसी भी स्तर पर कोई कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहती। यही वजह है कि सरकार और संगठन दोनों ही स्तरों पर अपनी चुनावी धार को तेज करने और विपक्ष को चारों खाने चित करने के लिए उत्तराखंड भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

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