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बंगाल की खाड़ी में 4.5 तीव्रता का आया तेज भूकंप, विशाखापत्तनम समेत कई जिलों में हिली धरती,घरों से बाहर भागे लोग!

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विशाखापत्तनम। आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में रविवार की सुबह की शुरुआत दहशत के साथ हुई। तड़के बंगाल की खाड़ी में आए मध्यम तीव्रता के भूकंप के जोरदार झटकों से विशाखापत्तनम सहित आसपास के कई जिले अचानक हिल उठे। सुबह करीब 5 बजकर 5 मिनट पर जब अधिकांश लोग गहरी नींद में थे, तभी अचानक खिड़की-दरवाजे और बेड हिलने के कारण लोगों में अफरा-तफरी मच गई। राहत की बात यह रही कि समुद्र के भीतर आए इस भूकंप से किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान या सुनामी जैसी स्थिति की कोई सूचना सामने नहीं आई है।

नींद में थे लोग और अचानक हिलने लगी धरती, इन इलाकों में सर्वाधिक रहा असर

भूकंपीय झटकों का सबसे ज्यादा असर विशाखापत्तनम शहर के गाजुवाका, मंगलापालेम, सागर नगर, पेड्डा वाल्टेयर, अरिलोवा, एमवीपी कॉलोनी और अप्पुघर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में देखा गया। अचानक हुए इस कंपन से घबराए कई लोग तुरंत अपने घरों से बाहर निकलकर खुली सड़कों पर आ गए। विशाखापत्तनम के अलावा इस प्राकृतिक हलचल की गूंज पड़ोसी जिलों अनकापल्ली, विजयनगरम, काकीनाडा और कोनसीमा के भी कई तटीय हिस्सों में महसूस की गई, जहां सुबह-सुबह लोगों के बीच कुछ देर के लिए चिंता और परेशानी का माहौल बन गया।

काकीनाडा तट से 225 किलोमीटर दूर था केंद्र, 10 किलोमीटर गहराई पर दर्ज हलचल

भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) ने प्रारंभिक डेटा जारी करते हुए बताया कि रविवार सुबह बंगाल की खाड़ी में रिक्टर पैमाने पर 4.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया है। वहीं, देश में भूकंपीय गतिविधियों पर नजर रखने वाली मुख्य एजेंसी राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने सटीक भौगोलिक स्थिति साझा करते हुए बताया कि यह भूकंप सुबह ठीक 5 बजकर 5 मिनट और 46 सेकंड पर आया।

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भूकंप का मुख्य केंद्र (एपिसेंटर) बंगाल की खाड़ी के भीतर काकीनाडा तट से लगभग 225 किलोमीटर दूर समुद्र में स्थित था। भू-गर्भ के भीतर इसकी गहराई 10 किलोमीटर दर्ज की गई है, जिसका केंद्र 16.805 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 84.381 डिग्री पूर्वी देशांतर पर मौजूद था। भू-वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरा समुद्री क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से अपेक्षाकृत काफी स्थिर माना जाता है। ऐसे में धरती की प्लेट्स के भीतर हुई आंतरिक संरचनात्मक हलचल के कारण यह हल्का कंपन हुआ है, जिससे स्थानीय जनता को बिल्कुल भी घबराने या पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है।

सालों पुराना इतिहास: पहले भी कांप चुकी है तटीय आंध्र की जमीन

विशाखापत्तनम और इसके आसपास के क्षेत्रों के लिए भूकंप का यह अहसास नया नहीं है। इससे पहले पिछले वर्ष नवंबर के महीने में भी विशाखापत्तनम और पड़ोसी अल्लूरी सीताराम राजू जिले में हल्के भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। अगर इतिहास के पन्नों को पलटें तो 4 नवंबर 2015 को भी अल्लूरी जिले में 3.7 तीव्रता का एक भूकंप दर्ज किया गया था। उस समय जमीन के नीचे से आई एक बहुत तेज रहस्यमयी आवाज को सुनकर लोग बुरी तरह डर गए थे और कड़ाके की ठंड के बावजूद घरों से बाहर भाग आए थे। उस पुराने भूकंप का केंद्र विशाखापत्तनम से लगभग 110 किलोमीटर दूर जी. मडुगुला क्षेत्र में 10 किलोमीटर की गहराई पर था। गनीमत रही कि इतिहास की तरह इस बार भी समंदर की इस हलचल ने केवल डराया, कोई बड़ी तबाही नहीं मचाई।

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