अयोध्या। तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की 22 जुलाई को प्रस्तावित बैठक से पहले राम मंदिर चढ़ावा मामले, कृष्ण जन्मभूमि विवाद, ज्ञानवापी, धार भोजशाला और केजीएमयू हॉस्टलों में नॉन-वेज पर रोक सहित कई मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अयोध्या न्याय, मर्यादा और मानवता की भूमि है तथा किसी भी निर्दोष व्यक्ति पर बिना साक्ष्य आरोप लगाना उचित नहीं है।
राम मंदिर चढ़ावा मामले में साक्ष्यों पर दिया जोर
परमहंस आचार्य ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन न्याय, त्याग और मर्यादा का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा कि श्रीराम ने पिता के वचन का पालन करने के लिए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया और राजधर्म निभाने के लिए कठिन निर्णय भी लिए। इसलिए अयोध्या की परंपरा किसी के साथ अन्याय करने की नहीं रही है।
राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे की मांग से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने कोई गलत कार्य किया है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन बिना प्रमाण किसी निर्दोष व्यक्ति को दोषी ठहराना भी गलत है।
उन्होंने कहा कि किसी भी आरोप को साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य आवश्यक हैं। बिना सबूत बयानबाजी करना उचित नहीं है और संत समाज इसका विरोध करता है।
निर्दोष को फंसाने का प्रयास हुआ तो होगा विरोध
परमहंस आचार्य ने कहा कि यदि किसी निर्दोष व्यक्ति को जबरन दोषी साबित करने का प्रयास किया गया तो साधु-संत समाज इसका विरोध करेगा। आवश्यकता पड़ने पर व्यापक स्तर पर आंदोलन भी किया जा सकता है।
कृष्ण जन्मभूमि मामले में जल्द फैसले की उम्मीद
कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद पर उन्होंने कहा कि जैसे राम जन्मभूमि मामले में लंबे इंतजार के बाद न्याय मिला, उसी प्रकार कृष्ण जन्मभूमि मामले में भी देशभर के श्रद्धालुओं की निगाहें सर्वोच्च न्यायालय पर टिकी हैं।
उन्होंने कहा कि “सत्य को परेशान किया जा सकता है, लेकिन पराजित नहीं किया जा सकता।” उनके अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर शीघ्र निर्णय देना चाहिए।
उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के उस कथन का भी उल्लेख किया कि “देर से मिला न्याय कई बार अन्याय जैसा महसूस होता है।” परमहंस आचार्य ने कहा कि लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए विवाद का समाधान जल्द होना चाहिए।
ज्ञानवापी और भोजशाला पर भी रखी राय
धार भोजशाला विवाद पर उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय का निर्णय आ चुका है तो उसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक बनाए रखना उचित नहीं है।
ज्ञानवापी विवाद पर उन्होंने कहा कि इस मामले का भी जल्द समाधान होना चाहिए। उनके अनुसार, जांच के दौरान कई पुरातात्विक साक्ष्य सामने आए हैं और न्यायपालिका को उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश के सभी ऐतिहासिक और धार्मिक विवादों का समाधान संविधान और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए।
केजीएमयू हॉस्टलों में नॉन-वेज पर रोक का किया स्वागत
लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के सभी 18 हॉस्टलों में नॉन-वेज भोजन पर रोक लगाने के फैसले का परमहंस आचार्य ने स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि खान-पान का सीधा प्रभाव युवाओं के स्वास्थ्य और भविष्य पर पड़ता है। उनके अनुसार, यह निर्णय विद्यार्थियों के हित में है और इससे उन्हें लाभ मिलेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ निजी मुद्दों पर उनके और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के बीच मतभेद रहे हैं, लेकिन अच्छे निर्णयों की सराहना की जानी चाहिए। उनके मुताबिक, छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया यह निर्णय प्रशंसनीय है।



