बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में सरयू यानी घाघरा नदी के जलस्तर में लगातार उतार चढ़ाव के बीच अब नदी का कटान ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। रामनगर तहसील के तराई क्षेत्र में नदी की तेज धारा लगातार खेतों और जमीन को अपने साथ बहा रही है। सूरतगंज ब्लॉक क्षेत्र में हेतमापुर से केदारीपुर तक कटान का दायरा बढ़ता जा रहा है। खेतों और फसलों के बाद अब नदी की जद में पक्के मकान भी आने लगे हैं।
हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि ग्रामीण वर्षों की मेहनत से बनाए अपने घरों को खुद तोड़कर ईंट, लकड़ी और घरेलू सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं। दूसरी ओर खेतों में खड़ी फसल को भी समय से पहले काटकर बचाने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर नदी की धारा इसी रफ्तार से जमीन काटती रही तो घर और फसल दोनों को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
सरयू की धार में समा रही उपजाऊ जमीन, सैकड़ों बीघा फसल बर्बाद
हेतमापुर और केदारीपुर के आसपास नदी का कटान लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक बड़ी मात्रा में उपजाऊ कृषि भूमि नदी में समा चुकी है। सैकड़ों बीघा खेतों में खड़ी फसल भी कटान की भेंट चढ़ गई है। जिन खेतों में कुछ समय बाद फसल तैयार होने की उम्मीद थी, वहां अब नदी की धारा बह रही है।
कटान की रफ्तार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि फसल पूरी तरह तैयार नहीं हुई है, लेकिन उसे समय से पहले काटना उनकी मजबूरी बन गई है। उनका कहना है कि यदि फसल नदी में बह गई तो पूरी मेहनत और लागत दोनों बर्बाद हो जाएंगे। ऐसे में अधपकी फसल को काटकर कम से कम पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है।
घर बचाना मुश्किल हुआ तो खुद तोड़ने लगे मकान
केदारीपुर में कटान अब आबादी की ओर बढ़ रहा है। कई ग्रामीण अपने पक्के मकानों को बचाने के लिए घर का सामान बाहर निकाल रहे हैं। कुछ लोगों ने मकानों की ईंटें निकालनी शुरू कर दी हैं, ताकि नदी की चपेट में आने से पहले उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा सके।
ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि घर छोड़ने के बाद वे अपने परिवार को लेकर कहां जाएं। बारिश के मौसम में खुले आसमान के नीचे रहने का खतरा अलग है। दूसरी ओर नदी लगातार जमीन काट रही है, जिससे सुरक्षित स्थान की तलाश भी मुश्किल होती जा रही है।
धान की फसल में लगाई पूरी पूंजी, अब चारे के लिए काटने की मजबूरी
केदारीपुर निवासी मोनू कुमार शुक्ला ने बताया कि उन्होंने धान की फसल में काफी पैसा लगाया था। फसल अभी पूरी तरह तैयार भी नहीं हुई है, लेकिन नदी का कटान तेजी से खेत की ओर बढ़ रहा है। परिवार में करीब 12 से 13 लोग हैं और अब उनके सामने फसल के साथ घर को बचाने की भी चिंता खड़ी हो गई है।
मोनू कुमार शुक्ला के मुताबिक अगर नदी इसी तरह खेत काटती रही तो फसल को बचा पाना संभव नहीं होगा। इसलिए ग्रामीण समय से पहले फसल काटने को मजबूर हैं, ताकि कम से कम उसे पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।
ग्रामीण बोले, नदी की धारा के सामने टिक नहीं पा रहे बचाव के इंतजाम
ग्रामीणों का कहना है कि कटान रोकने के लिए किए जा रहे उपाय नदी की तेज धारा के सामने प्रभावी साबित नहीं हो रहे हैं। एक बुजुर्ग ग्रामीण ने बताया कि नदी लगातार जमीन को काट रही है और हर दिन कटान का खतरा आबादी के और करीब पहुंच रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक पहले नदी खेतों को काट रही थी, लेकिन अब मकानों तक पहुंचने के कारण डर और बढ़ गया है। लोगों को आशंका है कि यदि कटान नहीं रुका तो आने वाले दिनों में कई और घर इसकी चपेट में आ सकते हैं।
पक्का घर तोड़कर सामान निकाल रहे ग्रामीण, सामने खड़ा है पुनर्वास का सवाल
मीरू शुक्ला ने बताया कि नदी के कटान के खतरे को देखते हुए पक्का घर तोड़कर उसमें रखा सामान निकाला जा रहा है। लेकिन घर छोड़ने के बाद परिवार को बसाने के लिए पर्याप्त सुरक्षित जगह नहीं है। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से जो जमीन दी गई है, वह नाले के किनारे है।
बारिश के मौसम में नाले के किनारे परिवार को बसाना ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता का विषय है। ऐसे में घर बचाने की कोशिश और सुरक्षित ठिकाने की तलाश के बीच ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं।
जलस्तर के उतार चढ़ाव से बढ़ा कटान का खतरा
अपर जिलाधिकारी निरंकार सिंह ने बताया कि नदी के जलस्तर में उतार चढ़ाव के कारण कुछ स्थानों पर कटान की स्थिति बनती है। रामनगर और रामसनेहीघाट तहसील के क्षेत्र बाढ़ प्रभावित हैं। वर्तमान में नदी का जलस्तर खतरे के निशान के आसपास है।
उन्होंने बताया कि हेतमापुर के आसपास आबादी के नजदीक कटान की स्थिति को देखते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
खतरे के निशान के आसपास पहुंची घाघरा, बैराजों से छोड़े गए पानी का भी असर
पिछले दिनों घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के आसपास पहुंच गया था। एक सितंबर की रिपोर्टों के मुताबिक एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था। बैराजों से छोड़े गए पानी का असर भी नदी के जलस्तर पर पड़ा।
जलस्तर में लगातार हो रहे उतार चढ़ाव के बीच नदी की धार कई स्थानों पर तेजी से जमीन काट रही है। हेतमापुर और केदारीपुर में खेतों से आबादी की ओर बढ़ता कटान ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।
नदी किनारे बसे परिवारों के सामने दोहरी चुनौती
बाराबंकी के तराई इलाके में सरयू का बढ़ता कटान केवल खेतों और फसलों के नुकसान तक सीमित नहीं रह गया है। अब जब नदी आबादी के करीब पहुंच रही है तो ग्रामीणों के सामने घर, रोजी रोजगार और सुरक्षित पुनर्वास का सवाल खड़ा हो गया है।
वर्षों की मेहनत से बनाए मकानों को खुद तोड़कर उनकी ईंटें और सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाना ग्रामीणों की मजबूरी बन गया है। बारिश के बीच नदी का कटान यदि इसी तरह जारी रहा तो आने वाले दिनों में प्रभावित परिवारों की संख्या और बढ़ने की आशंका है। ग्रामीण अब प्रशासन से प्रभावी कटानरोधी इंतजाम और सुरक्षित पुनर्वास की उम्मीद लगाए बैठे हैं।



