नई दिल्ली। ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद साजिद रशीदी ने भगवान श्रीकृष्ण को लेकर मौलाना जरजिस अंसारी की ओर से दिए गए बयान को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म से जुड़ी आस्था और भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले बयान नहीं दिए जाने चाहिए।
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को दूसरे धर्मों की मान्यताओं और आस्थाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी विशेष धार्मिक व्यक्ति को किसी अन्य धर्म से जोड़कर इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है, जिससे लोगों की भावनाएं आहत हों।
धार्मिक बयानों पर संयम बरतने की अपील
साजिद रशीदी ने कहा कि वर्तमान समय में जब समाज में आपसी तनाव और नफरत की स्थिति देखने को मिल रही है, ऐसे में सभी लोगों को सोच-समझकर बयान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दुनिया में पैगंबरों और ईश्वर के संदेशवाहकों को लेकर अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं हैं, लेकिन किसी विशेष व्यक्ति के बारे में ऐसी टिप्पणी करना जिससे किसी समुदाय की आस्था प्रभावित हो, उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि मौलाना जरजिस अंसारी के बयान को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है, जबकि इससे पहले भी कई लोगों की ओर से अलग-अलग धर्मों को लेकर विवादित टिप्पणियां की गई हैं।
वंदे मातरम मुद्दे पर सरकार पर साधा निशाना
राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को लेकर प्रस्तावित कानून पर भी साजिद रशीदी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकारों को धर्म और आस्था से जुड़े मुद्दों के बजाय महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा जैसे वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि वंदे मातरम जैसे मुद्दों के जरिए मुसलमानों को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि देश के विकास से जुड़े मुद्दों पर ज्यादा चर्चा होनी चाहिए।
जौहर यूनिवर्सिटी कार्रवाई का किया विरोध
रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई को लेकर भी साजिद रशीदी ने विरोध जताया। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी किसी एक व्यक्ति की संपत्ति नहीं है, बल्कि यह सभी वर्गों और धर्मों के छात्रों के लिए शिक्षा का केंद्र है।
उन्होंने कहा कि किसी शिक्षण संस्थान पर बुलडोजर कार्रवाई करना बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने प्रशासन से इस मामले पर दोबारा विचार करने की मांग की।
साजिद रशीदी ने कहा कि यदि यूनिवर्सिटी को लेकर कोई कानूनी विवाद है तो उसका समाधान कानून के अनुसार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा के संस्थानों को नुकसान पहुंचाने के बजाय उन्हें बेहतर तरीके से संचालित करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश में अल्पसंख्यक समुदाय के लिए गिनी-चुनी बड़ी यूनिवर्सिटी हैं, इसलिए ऐसे संस्थानों को बचाने की जरूरत है। उन्होंने जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई के फैसले को वापस लेने की मांग की।


