तेहरान/वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिका ने लगातार 11वीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सैन्य कमान सेंटकॉम (CENTCOM) के अनुसार, इन अभियानों का उद्देश्य ईरान की उस सैन्य क्षमता को कमजोर करना है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को खतरा बताया जा रहा है।
ताजा हमलों के बाद ईरान ने राजधानी तेहरान समेत कई संवेदनशील इलाकों में अपना एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिया। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान के पश्चिम, पूर्व और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं।
सेंटकॉम का दावा- व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए कार्रवाई
अमेरिकी सेंटकॉम ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में कहा कि स्थानीय समयानुसार शाम सात बजे ईरान के सैन्य ठिकानों पर नया हमला शुरू किया गया। सेंटकॉम का दावा है कि पिछले तीन महीनों में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले 30 से अधिक व्यापारिक जहाजों पर हमले किए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और नौवहन की स्वतंत्रता प्रभावित हुई है।
अमेरिका का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना है।
तेहरान में हाई अलर्ट, एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने राजधानी तेहरान के कई हिस्सों में वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय कर दी। ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी के अनुसार, शहर के कई क्षेत्रों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं।
हालांकि, ईरानी अधिकारियों की ओर से हमलों में हुए नुकसान या हताहतों की आधिकारिक जानकारी तत्काल जारी नहीं की गई।
तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी
इस बीच क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर भी प्रयास तेज हो गए हैं। कतर के प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जासिम अल थानी ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान से टेलीफोन पर बातचीत की।
कतर के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा, तनाव कम करने, आपसी समन्वय बढ़ाने और अमेरिका-ईरान के बीच हुए समझौतों को लागू कराने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज करने पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने सभी संबंधित देशों से बातचीत के रास्ते को प्राथमिकता देने की अपील की।
अमेरिकी सीनेट में भी उठा सैन्य अभियान का मुद्दा
ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान की गूंज अमेरिका की राजनीति में भी सुनाई दे रही है। अमेरिकी सीनेट में हुई सुनवाई के दौरान रक्षा सचिव पीट हेगसेथ से सैन्य कार्रवाई, उसके उद्देश्यों और बढ़ते रक्षा खर्च को लेकर विपक्षी सांसदों ने तीखे सवाल किए।
अमेरिकी सैनिकों की मौत और बढ़ा विवाद
अमेरिकी रक्षा विभाग ने जॉर्डन स्थित मुवाफक साल्टी एयर बेस पर 17 जुलाई को हुए हमले में मारे गए तीसरे सैनिक की पहचान सार्जेंट एंजेल एस. रामप्रसाद के रूप में की है। इससे पहले उन्हें लापता घोषित किया गया था।
रक्षा विभाग के अनुसार, इस हमले में इसाबेला गोंजालेस और फर्स्ट लेफ्टिनेंट टायलर फीहन की भी मौत हुई थी। इसके अलावा इराक में एक अन्य अमेरिकी सैनिक के मारे जाने की भी पुष्टि की गई है। विभाग के मुताबिक, संघर्ष शुरू होने के बाद अब तक 18 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है, जबकि इस महीने ईरानी हमलों में लगभग 100 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं।
कुवैत में भी ड्रोन हमलों का दावा
दूसरी ओर ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई जारी रहने के दावे किए जा रहे हैं। कुवैत ने कहा है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरानी ड्रोन हमलों को रोकने की कोशिश की। वहीं ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने दावा किया कि कुवैत स्थित अली अल सलेम एयर बेस को निशाना बनाया गया, जहां अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना संघर्ष का केंद्र
विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान संघर्ष का सबसे संवेदनशील केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर भी असर डाल सकता है।



