नई दिल्ली। नीट-यूजी पेपर लीक विवाद और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा के बाद अब राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सिर्फ दोषियों को सजा देने से पेपर लीक की समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की जरूरत है।
आशुतोष रांका ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि पेपर लीक के बाद दोषियों को क्या सजा मिलेगी, बल्कि यह है कि आखिर बार-बार पेपर लीक की घटनाएं हो ही क्यों रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यवस्था में मौजूद खामियों और जिम्मेदारी तय नहीं होने के कारण ऐसी घटनाओं को बढ़ावा मिलता है।
‘मरहम लगाने से पहले चोट लगने की वजह खत्म करनी होगी’
सीजेपी प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फास्ट ट्रैक कोर्ट वाले ऐलान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार ने चोट लगने के बाद इलाज की बात की है, जबकि जरूरत इस बात की है कि चोट लगने की स्थिति ही पैदा न हो।
उन्होंने कहा कि पेपर लीक किसी एक व्यक्ति की गलती नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह की वजह से होने वाली समस्या है। इसमें कई स्तरों पर लोग शामिल होते हैं और आर्थिक लाभ के लिए पूरी व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया जाता है। ऐसे में केवल गिरफ्तारियां और कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उस सिस्टम को मजबूत करना होगा जहां पेपर लीक की संभावना ही खत्म हो जाए।
व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग
आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं की मुख्य वजह अक्षमता और भ्रष्टाचार है। उन्होंने कहा कि जब तक जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय नहीं होगी और दोषियों के मन में कानून का डर पैदा नहीं होगा, तब तक पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल है।
उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जब तक वह इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने भी उठाई आवाज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के बाद जंतर-मंतर पर धरना दे रहे छात्रों और प्रदर्शनकारियों ने भी प्रतिक्रिया दी। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार को सबसे पहले छात्रों की समस्याओं को सुनना चाहिए और उनके साथ बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि देश के लाखों युवा अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर हैं, लेकिन उनकी आवाज को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है। उन्होंने कहा कि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं और चाहते हैं कि बातचीत के माध्यम से समाधान निकले।
लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई पर भी उठे सवाल
प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्च के दौरान हुए लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि छात्रों के साथ हुए व्यवहार की जांच होनी चाहिए और सरकार को पूरे मामले का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
एक छात्र ने कहा कि केवल सोशल मीडिया पर बयान जारी करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। सरकार को जमीन पर ठोस कदम उठाने होंगे और छात्रों का विश्वास बहाल करना होगा।
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री को सबसे पहले जिम्मेदारी तय करनी चाहिए और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्र केवल आश्वासन नहीं, बल्कि वास्तविक बदलाव चाहते हैं।
‘बयान नहीं, कार्रवाई का इंतजार’
प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने कहा कि प्रधानमंत्री के बयान से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि सरकार आगे क्या कदम उठाती है। उन्होंने कहा कि छात्र केवल घोषणाएं सुनने के लिए आंदोलन नहीं कर रहे हैं, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही चाहते हैं।
एक युवक ने कहा कि वह पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थक रहा है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए वह छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल हुआ है। उसने कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारियों से सीधा संवाद कर भरोसा दिलाना चाहिए कि उनकी मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई होगी।
फिलहाल पेपर लीक का मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। सरकार जहां फास्ट ट्रैक कोर्ट और सख्त कार्रवाई को समाधान बता रही है, वहीं प्रदर्शनकारी और विपक्ष व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग कर रहे हैं।



