Home » उत्तर प्रदेश » चार दिन का यूपी विधानसभा सत्र औपचारिकता न बने, जनहित के मुद्दों पर हो गंभीर चर्चा: मायावती

चार दिन का यूपी विधानसभा सत्र औपचारिकता न बने, जनहित के मुद्दों पर हो गंभीर चर्चा: मायावती

Facebook
Twitter
WhatsApp

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने चार दिवसीय सत्र को लेकर सरकार और विपक्ष दोनों से गंभीर संसदीय भूमिका निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इतने कम समय के सत्र को केवल राजनीतिक बयानबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रदेश की जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए।

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि उत्तर प्रदेश विधानमंडल का मानसून सत्र 3 अगस्त से शुरू हुआ है। यह सत्र कुल चार कार्य दिवस का है। उन्होंने बताया कि 4 अगस्त को राज्य सरकार विधानसभा में सरकारी खर्चों से संबंधित अनुपूरक बजट भी पेश करेगी।

जनसमस्याओं पर चर्चा को मिले प्राथमिकता

बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि भले ही यह सत्र अल्प अवधि का है, लेकिन जनता की उम्मीदें इससे जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि सदन में प्रदेश की ज्वलंत समस्याओं, जनकल्याण और विकास से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

उन्होंने चिंता जताई कि छोटा सत्र होने के कारण कहीं यह केवल औपचारिक प्रक्रिया बनकर न रह जाए। मायावती ने कहा कि लोकतंत्र में विधानसभा केवल राजनीतिक बहस का मंच नहीं है, बल्कि जनता की आवाज उठाने और समस्याओं के समाधान का महत्वपूर्ण माध्यम है।

उन्होंने कहा कि सत्र को संकीर्ण राजनीतिक हितों, आपसी खींचतान और हंगामे की भेंट चढ़ने से बचाना चाहिए। सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि वे सदन की गरिमा बनाए रखते हुए जनता के मुद्दों को प्राथमिकता दें।

ALSO READ THIS :  खाकी का डबल एनकाउंटर: बुलंदशहर में मवेशी चोर तो मऊ में चेन स्नेचर के पैर में लगी गोली, दबोचे गए शातिर अपराधी,चोरी की भैंस और चेन बरामद

विधायिका की मजबूती जरूरी: मायावती

मायावती ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधायिका की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि अफसरशाही को संविधान के प्रति जवाबदेह और जनता के हितों के प्रति जिम्मेदार बनाए रखने के लिए विधायिका का मजबूत होना आवश्यक है।

उन्होंने सवाल उठाया कि लगातार कम होते विधानसभा सत्र और सीमित कार्यदिवसों के कारण क्या सदन अपने वास्तविक उद्देश्यों को पूरी तरह हासिल कर पाएगा या फिर यह केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा।

बसपा प्रमुख ने कहा कि देश के संविधान और लोकतंत्र की मजबूती के लिए सरकार और विपक्ष दोनों को गंभीर संसदीय आचरण का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सदन में स्वस्थ बहस और जनहित के मुद्दों पर चर्चा ही लोकतंत्र को मजबूत बनाती है।

सरकार और विपक्ष की जिम्मेदारी पर जोर

मायावती ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर जनता की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि यूपी विधानसभा का यह मानसून सत्र प्रदेश के लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरेगा और इसमें जनहित से जुड़े विषयों पर प्रभावी चर्चा होगी।

टॉप स्टोरी

ज़रूर पढ़ें