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गाजियाबाद में दर्दनाक हादसा: 3 मंजिला इमारत भरभराकर गिरी, एक की मौत, दो घायल!

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गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के लोनी बॉर्डर थाना क्षेत्र में सोमवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने इलाके में हड़कंप मचा दिया। गुलाब वाटिका कॉलोनी में दिल्ली-सहारनपुर मार्ग स्थित हार्डवेयर की तीन मंजिला दुकान की छत अचानक भरभराकर गिर गई। देखते ही देखते पूरी इमारत की तीनों मंजिलें मलबे में तब्दील हो गईं। हादसे के दौरान एक राजमिस्त्री समेत तीन लोग मलबे में दब गए। आसपास के लोगों ने तत्काल राहत और बचाव का प्रयास करते हुए दो श्रमिकों को बाहर निकाल लिया, जबकि तीसरे व्यक्ति को करीब चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद एनडीआरएफ की टीम ने मलबे से बाहर निकाला। अस्पताल में उपचार के दौरान चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

शाम चार बजे अचानक गिरी छत, एक के बाद एक ध्वस्त हुईं तीनों मंजिलें

हादसा सोमवार शाम करीब चार बजे हुआ। पुलिस के मुताबिक दिल्ली के शाहदरा निवासी कुनाल जैन की गुलाब वाटिका कॉलोनी में हार्डवेयर की दुकान है। दुकान की दूसरी मंजिल पर गोदाम बनाया गया था, जबकि सबसे ऊपर वाली तीसरी मंजिल पर निर्माण कार्य चल रहा था।

बताया गया कि तीसरी मंजिल पर लोहे के गर्डर और पत्थर से छत बनाने का काम चल रहा था। इसी दौरान गुलाब वाटिका कॉलोनी निवासी राजमिस्त्री अजीत दीवारों पर प्लास्टर कर रहा था। अचानक सबसे ऊपर वाली मंजिल की छत भरभराकर नीचे गिर गई। इसके बाद एक के बाद एक तीनों मंजिलें ढह गईं और दुकान का बड़ा हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया।

मलबे में दबे तीन लोग, दो को लोगों ने बचाया

इमारत गिरने के दौरान राजमिस्त्री अजीत पहली मंजिल पर दब गया, जबकि दुकान में काम करने वाले मुकेश यादव और जतिन दूसरी मंजिल पर मलबे में फंस गए। अचानक हुए हादसे के बाद आसपास के लोगों में अफरातफरी मच गई।

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स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए राहत और बचाव का काम शुरू किया। लोगों ने काफी मशक्कत के बाद दो श्रमिकों को मलबे से बाहर निकाल लिया। वहीं तीसरे व्यक्ति के मलबे में फंसे होने के कारण राहत दलों को लंबे समय तक अभियान चलाना पड़ा।

चार घंटे तक चला रेस्क्यू, एनडीआरएफ ने निकाला बाहर

हादसे की सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग, पुलिस, जिला प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच गईं। घटनास्थल पर भारी मात्रा में मलबा होने के कारण बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण रहा।

एनडीआरएफ की टीम ने करीब चार घंटे तक लगातार अभियान चलाया और मलबे में फंसे व्यक्ति को बाहर निकाला। उसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद मुकेश यादव को मृत घोषित कर दिया।

हादसे में अन्य दोनों श्रमिकों को समय रहते बाहर निकाल लिया गया। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

भारी सामान और कमजोर निर्माण बना हादसे की वजह?

हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने दुकान में किए गए निर्माण और वहां रखे सामान को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। आसपास के लोगों का आरोप है कि हार्डवेयर की दुकान के तीनों तल भारी सामान से भरे हुए थे। दुकान की छतें लोहे के गर्डर और पत्थर से बनी थीं और इन पर क्षमता से अधिक वजन रखा गया था।

स्थानीय लोगों के मुताबिक दूसरी मंजिल की छत पर पानी की टंकी के अलावा बड़ी मात्रा में निर्माण सामग्री भी रखी हुई थी। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि अत्यधिक भार के कारण छत पर दबाव बढ़ा और इसी वजह से सबसे ऊपर की छत ढह गई। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा

हादसे की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव अभियान का जायजा लिया। लोनी एसडीएम दीपक कुमार, नायाब तहसीलदार रति गुप्ता, एसीपी अंकुर विहार अमरदीप मौर्या और लोनी एसीपी राम किशन समेत अन्य अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे।

पुलिस उपायुक्त ग्रामीण सुरेंद्रनाथ तिवारी ने बताया कि हादसे में तीन लोग मलबे में दबे थे। इनमें से दो को सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि मुकेश यादव को बचाव अभियान के बाद मलबे से निकाला गया। अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

हादसे के बाद निर्माण सुरक्षा पर उठे सवाल

तीन मंजिला हार्डवेयर की दुकान के अचानक ढहने की घटना ने निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों द्वारा क्षमता से अधिक सामान रखे जाने के आरोपों के बाद अब प्रशासन की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल रहा। राहत और बचाव अभियान पूरा होने के बाद प्रशासन की ओर से हादसे के कारणों और इमारत की संरचनात्मक स्थिति की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर यह सामने आने की उम्मीद है कि इमारत गिरने के पीछे निर्माण में लापरवाही, अधिक भार या कोई अन्य तकनीकी वजह जिम्मेदार थी।

 

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