देहरादून। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार की सभी प्राथमिकताओं में बेटियां और महिलाएं सर्वोच्च स्थान पर हैं। बेटियों को सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समान अवसर और आत्मनिर्भर बनने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना सरकार का संकल्प है। उन्होंने कहा कि बेटियों का सशक्तीकरण केवल परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार है।
मुख्यमंत्री रविवार को देहरादून में आयोजित बालिका शिक्षा प्रोत्साहन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने बालिकाओं की शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बेटियों को आगे बढ़ने के अवसर मिलने पर वे हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता का प्रदर्शन कर सकती हैं।
भारतीय संस्कृति में बेटियों को शक्ति का प्रतीक माना गया
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस का अवसर इस बार नवरात्रि के पहले दिन के साथ आया है। नवरात्रि में मां शैलपुत्री की पूजा और अष्टमी-नवमी पर कन्या पूजन की परंपरा भारतीय संस्कृति में बालिकाओं के सम्मान और उनके महत्व को दर्शाती है। सदियों से हमारी संस्कृति में बेटियों को शक्ति का स्वरूप माना जाता रहा है।
उन्होंने कहा कि बेटियों के सम्मान की यह भावना केवल धार्मिक परंपराओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि समाज के व्यवहार और उनके विकास के प्रयासों में भी दिखाई देनी चाहिए। बालिकाओं के प्रति सम्मान का वास्तविक अर्थ उन्हें शिक्षा, सुरक्षा और जीवन में आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कन्या पूजन का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब प्रत्येक बालिका को शिक्षा प्राप्त करने, अपने भविष्य का निर्माण करने और सुरक्षित वातावरण में जीवन आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने समाज से बेटियों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार अपनाने और उनके अधिकारों की रक्षा करने की अपील की।
शिक्षा से रोजगार तक बेटियों को आगे बढ़ाने पर जोर
सीएम धामी ने कहा कि राज्य में बेटियों को नौकरी और स्वरोजगार के लिए तैयार करने के उद्देश्य से विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि अवसर मिलने पर बेटियां अपनी योग्यता साबित कर सकती हैं और हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि बालिकाओं को जन्म से लेकर शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार तक सहयोग उपलब्ध कराना जरूरी है। इसके लिए सरकार विभिन्न स्तरों पर कदम उठा रही है, ताकि बेटियां अपनी क्षमताओं को विकसित कर सकें और आत्मनिर्भर बनकर समाज में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
मुख्यमंत्री ने महिलाओं की सरकारी सेवाओं में भागीदारी बढ़ाने के लिए राज्य में लागू 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य सरकारी नौकरियों में महिलाओं को आगे बढ़ने और विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध कराना है।
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र कर महिला अधिकारियों की भूमिका बताई
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री धामी ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा निहत्थे लोगों की हत्या के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। मुख्यमंत्री ने इस अभियान के दौरान देश की ओर से जानकारी देने वाली महिला सैन्य अधिकारियों विंग कमांडर व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया कुरैशी की भूमिका का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि महिला अधिकारियों की भूमिका इस बात का उदाहरण है कि बेटियां जिम्मेदारी के हर क्षेत्र में अपनी क्षमता और दक्षता का परिचय दे सकती हैं। अवसर मिलने पर महिलाएं देश की सुरक्षा से लेकर प्रशासन, शिक्षा, विज्ञान और अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
सोशल मीडिया पर भी दी बालिका दिवस की शुभकामनाएं
इससे पहले मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रदेशवासियों को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने संदेश में बेटियों को देश का मान, स्वाभिमान और उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों का सशक्त होना केवल परिवार की प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज और राष्ट्र के विकास से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बेटियों को सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान अवसर उपलब्ध कराने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
धामी ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश की प्रत्येक बेटी को अपने सपनों को साकार करने, अपनी प्रतिभा निखारने और जीवन में आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें।
समान अधिकार और सम्मान वाला समाज बनाने की अपील
मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर सभी प्रदेशवासियों से ऐसे समाज के निर्माण का संकल्प लेने की अपील की, जहां बेटियों को समान अधिकार, सम्मान और अवसर मिलें। उन्होंने कहा कि बालिकाओं को शिक्षा और सुरक्षा के साथ आगे बढ़ने का विश्वास देना आवश्यक है, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को पूरा कर सकें और प्रदेश तथा देश के विकास में योगदान दे सकें।

