Home » उत्तर प्रदेश » विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर सीएम योगी का कांग्रेस पर हमला, बोले सत्ता की लिप्सा में सनातन राष्ट्र के टुकड़े कर दिए गए

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर सीएम योगी का कांग्रेस पर हमला, बोले सत्ता की लिप्सा में सनातन राष्ट्र के टुकड़े कर दिए गए

Facebook
Twitter
WhatsApp

लखनऊ। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सत्ता हासिल करने की लिप्सा इस हद तक बढ़ गई थी कि एक सनातन राष्ट्र के टुकड़े कर दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन के कारण करोड़ों हिंदुओं को अपनी ही मातृभूमि और जन्मभूमि से विस्थापित होना पड़ा, जबकि लाखों हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन लोगों को हिंसा और कत्लेआम का सामना करना पड़ा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं है, बल्कि मानवता के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक है। उन्होंने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उद्देश्य केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि उस दौर की गलतियों से सीख लेकर उन्हें दोबारा होने से रोकना भी है।

‘सिर्फ स्मरण से समस्या का समाधान नहीं होगा’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस इतिहास के उन काले अध्यायों से सीखने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि केवल अतीत को याद करने भर से समस्या का समाधान नहीं होने वाला है।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर विभाजन की समस्या क्यों पैदा हुई, किन लोगों के कारण पैदा हुई, इसके कितने दोषियों को सजा मिली और आखिर कब तक हिंदुस्तान इसकी कीमत चुकाता रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सवाल आज भी समाज और देश के सामने मजबूती से खड़े हैं।

‘इतिहास केवल परीक्षा का पाठ्यक्रम नहीं’

योगी ने कहा कि इतिहास केवल परीक्षा के पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं होता। इतिहास हमें अपने गौरवशाली क्षणों पर गर्व करने के साथ ही अतीत की गलतियों का परिमार्जन करने का अवसर भी देता है।

ALSO READ THIS :  लखनऊ में गूंजा तिरंगा, हर बूथ तक अभियान पहुंचाने का संकल्प; सीएम योगी की अगुवाई में निकली तिरंगा यात्रा

उन्होंने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी यही भावना रही है कि देश के लोग विभाजन की त्रासदी को याद करें और उससे सबक लें।

आपसी अंतर्विरोध और बंटवारे को बताया गुलामी का कारण

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के गुलाम होने के पीछे दो बड़े कारण रहे। इनमें आपसी अंतर्विरोध और जाति तथा क्षेत्र के आधार पर समाज का विभाजन प्रमुख था।

उन्होंने कहा कि इन अंतर्विरोधों के साथ षड्यंत्र भी जुड़े और षड्यंत्रकारी अपने उद्देश्य में सफल हुए। इसका परिणाम देश की गुलामी के रूप में सामने आया।

योगी ने कहा कि समाज इस भावना से एकजुट होकर संघर्ष नहीं कर पाया कि हमला किसी दूसरे पर हो रहा है, इसलिए हम क्यों बोलें। इसी सोच का दुष्परिणाम देश की गुलामी और बाद में विभाजन के रूप में सामने आया।

महान स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष को किया याद

मुख्यमंत्री योगी ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश के लिए संघर्ष करने वाले महान सेनानियों को भी याद किया। उन्होंने महात्मा गांधी, सरदार पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद और रानी लक्ष्मीबाई जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि जिस देश में ‘स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है’ जैसे विचार गूंजे, उसे अंततः विभाजन की भारी कीमत चुकानी पड़ी।

‘1947 में मौन रहने वालों की नजर सत्ता पर थी’

योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि 1947 में जो लोग मौन थे, उनकी नजरें सत्ता पर थीं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग देश की कीमत पर सत्ता हासिल करना चाहते थे।

ALSO READ THIS :  संसद में विपक्ष का हंगामा बरकरार, खड़गे बोले ‘मांग वही है, सरकार को सदन में देना ही होगा जवाब’

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आज भी कुछ राजनीतिक दल अपने राजनीतिक हितों के लिए समाज को जाति और क्षेत्र के आधार पर बांटने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कभी समाज को हिंदू और सिख के नाम पर, तो कभी जाति और क्षेत्र के आधार पर विभाजित किया गया।

उन्होंने कहा कि समाज में पैदा किए गए ऐसे विभाजन का परिणाम कमजोर भारत के रूप में सामने आया और विभाजन की कीमत निर्दोष भारतीयों को चुकानी पड़ी।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार का भी उठाया मुद्दा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर होने वाले कथित अत्याचारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कुछ दल वोट बैंक खिसकने के डर से ऐसे मामलों पर मौन रहते हैं।

उन्होंने कहा कि जो लोग सत्ता को निजी संपत्ति और पारिवारिक विरासत मानते हैं, वे देश के साथ विश्वासघात करते हैं। ऐसे लोगों पर योगी ने अराजकता और अव्यवस्था को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

सरदार पटेल की प्रतिमा से लोकभवन तक निकाली मौन पदयात्रा

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के हजरतगंज चौराहे स्थित सरदार पटेल की प्रतिमा से लोकभवन तक करीब आधा किलोमीटर की मौन पदयात्रा निकाली।

पदयात्रा के दौरान विभाजन के समय जान गंवाने वाले लोगों और विस्थापन की पीड़ा झेलने वाले परिवारों को श्रद्धांजलि दी गई। मुख्यमंत्री के साथ बड़ी संख्या में लोग इस मौन पदयात्रा में शामिल हुए।

प्रदर्शनी और लघु फिल्म के जरिए दिखाई गई विभाजन की त्रासदी

लोकभवन पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभाजन की त्रासदी पर आधारित प्रदर्शनी और लघु फिल्म देखी। उन्होंने कलाकारों की ओर से तैयार की गई लाइव पेंटिंग का भी अवलोकन किया।

ALSO READ THIS :  शुभांशु शुक्ला से मुलाकात पर सीएम योगी, 'आप भारत के अंतरिक्ष स्वप्न और युवा प्रेरणा के प्रतीक'

इस दौरान मुख्यमंत्री ने विभाजन के दौरान भारत आए विस्थापित परिवारों के सदस्यों से मुलाकात की। प्रभावित परिवारों के लोगों ने मुख्यमंत्री के सामने विभाजन के दौरान झेली गई पीड़ा, संघर्ष और अपने अनुभव साझा किए।

विभाजन की पीड़ा से एकता का संदेश

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने देश की एकता और सामाजिक समरसता को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अतीत की त्रासदियों से सबक लेकर समाज को जाति, क्षेत्र और अन्य आधारों पर होने वाले विभाजन से बचना होगा।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, विभाजन की त्रासदी को याद करने का उद्देश्य केवल पीड़ा को दोहराना नहीं, बल्कि ऐसी परिस्थितियां दोबारा पैदा न हों, इसके लिए समाज को सजग और एकजुट करना भी है।

टॉप स्टोरी

ज़रूर पढ़ें