नोएडा। मानसून की बारिश के बीच गौतमबुद्ध नगर में डेंगू का खतरा बढ़ता जा रहा है। बारिश के बाद जगह जगह जमा पानी और मच्छरों के बढ़ते प्रजनन को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और जांच अभियान तेज कर दिया है। इस बार चिंता की बात यह है कि डेंगू का खतरा केवल ग्रामीण क्षेत्रों या घनी आबादी तक सीमित नहीं है, बल्कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा की हाईराइज सोसाइटियों में भी मच्छरों के प्रजनन स्थल मिलने लगे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जलभराव और मच्छरों के लार्वा मिलने के मामलों में अब तक 15 हाईराइज सोसाइटियों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। विभाग की टीमों ने सोसाइटियों में निरीक्षण बढ़ा दिया है और प्रबंधन को जलभराव खत्म करने तथा मच्छरों की रोकथाम के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
हाईराइज सोसाइटियों में मिला लार्वा, स्वास्थ्य विभाग सख्त
मानसून के दौरान हाईराइज सोसाइटियों में बेसमेंट, पार्किंग, निर्माणाधीन हिस्सों, छतों, गमलों और पानी की टंकियों के आसपास जलभराव की स्थिति बन रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें ऐसे स्थानों का निरीक्षण कर रही हैं, जहां बारिश का पानी लंबे समय तक जमा रह सकता है।
जहां पानी जमा मिला या मच्छरों के लार्वा पाए गए, वहां सोसायटी प्रबंधन और जिम्मेदार लोगों को नोटिस जारी किया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य मच्छरों के प्रजनन स्थल को शुरुआती स्तर पर ही खत्म करना है, ताकि डेंगू का संक्रमण फैलने से रोका जा सके।
वायरल बुखार के मरीज बढ़े, ओपीडी में बढ़ी भीड़
बारिश के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अस्पतालों की ओपीडी में भी मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ी है। वायरल बुखार, सर्दी जुकाम, शरीर में दर्द और कमजोरी जैसी शिकायतों के साथ बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं।
स्थानीय स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के अनुसार अस्पतालों में रोजाना आने वाले मरीजों में करीब 30 से 40 प्रतिशत मरीज वायरल बुखार से पीड़ित बताए जा रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सामने चुनौती यह भी है कि सामान्य वायरल बुखार और डेंगू के शुरुआती लक्षणों में अंतर करते हुए जरूरत पड़ने पर मरीज की समय पर जांच कराई जाए।
साफ पानी में भी पनपता है डेंगू का मच्छर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक डेंगू फैलाने वाला एडीज एजिप्टी मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में भी पनप सकता है। इसलिए यह धारणा गलत है कि डेंगू का मच्छर केवल गंदे नालों या गंदे पानी में ही पनपता है।
गमलों की ट्रे, कूलर, बाल्टी, पानी की टंकी, पुराने टायर, निर्माण सामग्री और छोटे छोटे कंटेनरों में जमा पानी भी मच्छरों के प्रजनन का कारण बन सकता है। हाईराइज सोसाइटियों में ऐसी जगहों की संख्या अधिक होने के कारण स्वास्थ्य विभाग विशेष निगरानी कर रहा है।
बेसमेंट से लेकर छत तक जांच अभियान
स्वास्थ्य विभाग की टीमें हाईराइज सोसाइटियों में बेसमेंट, पार्किंग, कॉमन एरिया, निर्माणाधीन हिस्सों, छतों, गमलों, कूलर और पानी की टंकियों की जांच कर रही हैं। टीमों की ओर से यह भी देखा जा रहा है कि कहीं लंबे समय से पानी जमा तो नहीं है।
जहां लार्वा मिलने की पुष्टि होती है, वहां एंटी लार्वा गतिविधियां कराई जा रही हैं। सोसायटी प्रबंधन और एओए को भी नियमित सफाई, जलभराव खत्म करने और मच्छररोधी उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
पहले भी सोसाइटियों को दिए जा चुके हैं नोटिस
नोएडा में हाईराइज सोसाइटियों में मच्छरों के प्रजनन स्थल मिलने पर पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है। अक्टूबर 2025 में चार सोसाइटियों में लार्वा और जलभराव मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से नोटिस जारी किए गए थे।
इस बार मानसून के दौरान विभाग ने निरीक्षण और निगरानी का दायरा बढ़ा दिया है। स्वास्थ्य अधिकारियों का फोकस उन स्थानों पर है जहां बारिश के बाद कई दिनों तक पानी जमा रहने की संभावना होती है।
बरौला, सूरजपुर और कासना समेत कई इलाकों पर नजर
गौतमबुद्ध नगर में डेंगू के लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले क्षेत्रों में पहले से निगरानी की जा रही है। जुलाई 2026 में स्वास्थ्य विभाग ने बरौला, सूरजपुर, कासना और सेक्टर 50 समेत कई इलाकों में डेंगू के मामलों और मच्छरों के प्रजनन स्थल मिलने के बाद अभियान तेज किया था।
मानसून के दौरान इन इलाकों के साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ाई जा रही है। विभाग की कोशिश है कि मच्छरों के प्रजनन स्थल को खत्म करने के साथ लोगों को भी जागरूक किया जाए।
एक सोसायटी में लापरवाही से बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा
हाईराइज सोसाइटियों में बड़ी संख्या में लोग एक साथ रहते हैं। ऐसे में यदि किसी सोसायटी में मच्छरों के प्रजनन स्थल लंबे समय तक बने रहते हैं तो संक्रमण का खतरा बड़ी आबादी तक पहुंच सकता है।
इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग सोसायटी प्रबंधन और एओए को साफ सफाई के साथ नियमित एंटी लार्वा दवा के छिड़काव और जलभराव खत्म करने के निर्देश दे रहा है। विभाग की नजर उन जगहों पर भी है जहां निर्माण कार्य चल रहा है और बारिश का पानी जमा होने की संभावना ज्यादा रहती है।
डेंगू और वायरल बुखार के लक्षणों में हो सकता है भ्रम
बरसात के मौसम में वायरल संक्रमण के साथ डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। डेंगू के शुरुआती लक्षण कई बार सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई दे सकते हैं।
तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी तथा उल्टी जैसी शिकायतें होने पर इसे सामान्य बुखार मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार बुखार रहने या लक्षण बढ़ने पर चिकित्सक से सलाह लेकर आवश्यक जांच कराना जरूरी है।
घर में भी बरतें सावधानी, छोटी सी लापरवाही पड़ सकती है भारी
स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि घर और आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें और गमलों तथा उनकी ट्रे की सफाई करते रहें।
छत, बालकनी, पार्किंग और आसपास रखे पुराने टायर, डिब्बे या अन्य सामान में बारिश का पानी जमा न होने दें। सोसाइटी प्रबंधन को भी बेसमेंट और कॉमन एरिया की नियमित सफाई कराने के साथ मच्छररोधी गतिविधियों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
मानसून के दौरान डेंगू की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। घरों, सोसाइटियों और सार्वजनिक स्थानों पर जलभराव रोकने में आम लोगों की सतर्कता भी अहम भूमिका निभाती है। समय रहते छोटे छोटे जलभराव वाले स्थानों को खत्म कर मच्छरों के प्रजनन को काफी हद तक रोका जा सकता है।



