लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस ने शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए अब तक 52 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार इस मामले में 12 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। जांच और कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से पिस्टल, कारतूस, चाकू, ज्वलनशील लिक्विड और आपत्तिजनक पोस्टर समेत अन्य सामग्री बरामद किए जाने का दावा किया गया है।
पुलिस का कहना है कि नेटवर्क की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और इससे जुड़े संदिग्धों के खिलाफ जांच एवं कानूनी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
संयुक्त अभियान में 175 संदिग्धों की जांच
उत्तर प्रदेश पुलिस के मुताबिक 26 मई को केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाया गया था। इस दौरान करीब 175 संदिग्धों की जांच और पूछताछ की गई थी।
पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े करीब 60 संदिग्धों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई भी की थी। अधिकारियों के मुताबिक अभियान का उद्देश्य नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान करने और उनकी गतिविधियों पर प्रभावी तरीके से अंकुश लगाना था।
12 अगस्त को भी चला प्रदेशव्यापी ऑपरेशन
पुलिस के अनुसार 12 अगस्त को प्रदेश स्तर पर संयुक्त अभियान चलाया गया। इस दौरान करीब 62 लोगों से पूछताछ की गई। पुलिस अब पूछताछ और जांच से सामने आए तथ्यों के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच की जा रही है, क्योंकि आरोप है कि इसी माध्यम के जरिए युवाओं को नेटवर्क से जोड़ने और कट्टरपंथ की ओर धकेलने का प्रयास किया जा रहा था।
हथियार और ज्वलनशील सामग्री बरामद होने का दावा
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पिस्टल, कारतूस और चाकू बरामद किए जाने की जानकारी दी है। इसके अलावा ज्वलनशील लिक्विड और आपत्तिजनक पोस्टर भी बरामद किए गए हैं।
पुलिस इन बरामद सामग्रियों के इस्तेमाल और नेटवर्क की गतिविधियों में उनकी भूमिका की जांच कर रही है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क के संपर्कों और गतिविधियों से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
जुलाई में आतंकी घोषित करने की सिफारिश
उत्तर प्रदेश पुलिस ने जुलाई 2026 में शहजाद भट्टी नेटवर्क को आतंकी संगठन घोषित कर चौथी अनुसूची में शामिल करने की केंद्र सरकार से सिफारिश की थी।
पुलिस का दावा है कि नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने और उसकी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। जांच एजेंसियां नेटवर्क से जुड़े लोगों के संपर्कों, गतिविधियों और सोशल मीडिया कनेक्शन की भी पड़ताल कर रही हैं।
14 राज्यों में कार्रवाई का भी किया गया था दावा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में दावा किया था कि 80वें स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने शहजाद भट्टी मॉड्यूल को पूरी तरह खत्म कर दिया है।
उन्होंने बताया था कि 14 राज्यों में चलाए गए समन्वित अभियानों के जरिए इस नेटवर्क से जुड़े 200 से ज्यादा सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। केंद्रीय स्तर पर हुई कार्रवाई के बाद राज्यों में भी नेटवर्क से जुड़े संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई जारी है।
युवाओं की भर्ती को लेकर जताई गई थी चिंता
जांच से जुड़े अधिकारियों के हवाले से बताया गया था कि भट्टी मॉड्यूल सुरक्षा एजेंसियों के सामने आए मुश्किल मॉड्यूलों में से एक था। अधिकारियों के मुताबिक जिस तरह से यह नेटवर्क कथित तौर पर भारतीय युवाओं को अपने साथ जोड़ रहा था, वह चिंता का विषय था।
जांच अधिकारियों के अनुसार शहजाद भट्टी कथित तौर पर युवाओं को प्रभावित करने में सफल रहा और कम पैसे देकर उन्हें नेटवर्क से जोड़ता था। अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि भट्टी को आईएसआई की ओर से भारत में बड़ा मॉड्यूल संचालित करने के लिए चुने जाने से पहले वह एक इन्फ्लुएंसर था।
नेटवर्क की गतिविधियों पर पुलिस की नजर
उत्तर प्रदेश पुलिस के मुताबिक शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई अभी खत्म नहीं हुई है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच की जा रही है।
पुलिस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नेटवर्क की गतिविधियों, युवाओं से संपर्क और कथित तौर पर उन्हें प्रभावित करने के तरीकों की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय से कार्रवाई जारी
इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के स्तर पर भी कार्रवाई की गई है। कई चरणों में चले अभियानों के दौरान संदिग्धों की पहचान, पूछताछ और निरोधात्मक कार्रवाई की गई।
फिलहाल यूपी पुलिस का कहना है कि नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी है और गिरफ्तारियों के साथ साथ पूरे नेटवर्क की गतिविधियों तथा संपर्कों को खंगाला जा रहा है। पुलिस का फोकस नेटवर्क को पूरी तरह निष्क्रिय करने और उससे जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान करने पर है।



