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कितने बजे से शुरू होगी पुत्रदा एकादशी, संतान की प्राप्ति के लिए महिलाएं रखती हैं व्रत

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी शुभ कार्य की शुरुआत, यात्रा, पूजा पाठ, निवेश या धार्मिक अनुष्ठान से पहले पंचांग देखकर तिथि, नक्षत्र, योग और शुभ अशुभ समय की जानकारी ली जाती है। पंचांग हिंदू काल गणना की पारंपरिक व्यवस्था है, जिसमें सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर दिन की महत्वपूर्ण गणनाएं की जाती हैं।

23 अगस्त 2026 को रविवार है और इस दिन श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि रहेगी। इसे पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति और संतान की सुख समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है।

23 अगस्त को रखा जाएगा पुत्रदा एकादशी का व्रत

पंचांग के अनुसार 23 अगस्त 2026 को श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि भोर में 2 बजे से शुरू होकर अगले दिन तड़के 4 बजे तक रहेगी। इसके बाद द्वादशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। उदया तिथि के आधार पर पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त को ही रखा जाएगा।

धार्मिक मान्यता के अनुसार पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करने और व्रत रखने से संतान प्राप्ति की कामना पूरी होने तथा संतान के सुखी और समृद्ध जीवन का आशीर्वाद मिलने की मान्यता है। विशेष रूप से संतान की इच्छा रखने वाले दंपति इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं।

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

23 अगस्त को रविवार के दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 9 मिनट पर होगा। सूर्यास्त शाम 6 बजकर 49 मिनट पर होगा। दिन की धार्मिक और ज्योतिषीय गणनाओं के लिए सूर्योदय और सूर्यास्त का विशेष महत्व माना जाता है।

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चंद्रमा का उदय दोपहर 3 बजकर 41 मिनट पर होगा, जबकि चंद्रास्त रात 2 बजकर 21 मिनट पर होगा।

नक्षत्र में होगा बदलाव

पंचांग के अनुसार 23 अगस्त को सूर्य मघा नक्षत्र में स्थित रहेगा। वहीं चंद्रमा शाम 5 बजकर 44 मिनट तक मूल नक्षत्र में रहेगा। इसके बाद चंद्रमा पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में प्रवेश करेगा।

ज्योतिषीय गणना में नक्षत्रों को विशेष महत्व दिया जाता है। किसी दिन के शुभ समय और विभिन्न धार्मिक कार्यों के लिए तिथि के साथ नक्षत्र की स्थिति को भी देखा जाता है।

विष्कम्भ योग के बाद बनेगा प्रीति योग

रविवार को हर्षण योग नहीं रहेगा। दिन की शुरुआत विष्कम्भ योग से होगी, जो सुबह 6 बजकर 14 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद प्रीति योग प्रारंभ हो जाएगा।

पंचांग में योग का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक कार्यों और शुभ अवसरों के लिए तिथि, नक्षत्र, योग और करण समेत पंचांग के विभिन्न अंगों को देखा जाता है।

अभिजीत मुहूर्त में कर सकते हैं शुभ कार्य

23 अगस्त को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 4 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं में अभिजीत मुहूर्त को दिन के प्रमुख शुभ समयों में माना जाता है।

इसके अलावा अमृत काल सुबह 10 बजकर 38 मिनट से दोपहर 12 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त का चयन करते समय व्यक्ति और कार्य की प्रकृति के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह भी ली जा सकती है।

राहुकाल में शुभ कार्य करने से बचने की मान्यता

रविवार को राहुकाल सुबह 5 बजकर 14 मिनट से दोपहर 6 बजकर 49 मिनट तक बताया गया है। वहीं गुलिक काल दोपहर 3 बजकर 39 मिनट से शाम 5 बजकर 14 मिनट तक रहेगा।

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यमगंड काल दोपहर 12 बजकर 29 मिनट से 2 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड काल में नए शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है।

हालांकि पूजा पाठ और नियमित धार्मिक गतिविधियों के लिए स्थानीय परंपरा और व्यक्तिगत मान्यताओं के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।

सूर्य सिंह और चंद्रमा धनु राशि में रहेंगे

23 अगस्त को सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा धनु राशि में रहेगा। सूर्य और चंद्रमा की राशि स्थिति पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

इस दिन पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि किसी कारण से पश्चिम दिशा की यात्रा करना जरूरी हो तो मान्यतानुसार संबंधित ज्योतिषीय उपाय करके यात्रा शुरू की जा सकती है।

23 अगस्त 2026 पंचांग एक नजर में

तिथि श्रावण शुक्ल पक्ष एकादशी

व्रत पुत्रदा एकादशी

दिन रविवार

सूर्योदय सुबह 6 बजकर 9 मिनट

सूर्यास्त शाम 6 बजकर 49 मिनट

चंद्रोदय दोपहर 3 बजकर 41 मिनट

चंद्रास्त रात 2 बजकर 21 मिनट

सूर्य नक्षत्र मघा

चंद्र नक्षत्र शाम 5 बजकर 44 मिनट तक मूल, इसके बाद पूर्वाषाढ़ा

योग सुबह 6 बजकर 14 मिनट तक विष्कम्भ, इसके बाद प्रीति

अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 4 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट

अमृत काल सुबह 10 बजकर 38 मिनट से दोपहर 12 बजकर 25 मिनट

राहुकाल सुबह 5 बजकर 14 मिनट से 6 बजकर 49 मिनट

गुलिक काल दोपहर 3 बजकर 39 मिनट से शाम 5 बजकर 14 मिनट

यमगंड काल दोपहर 12 बजकर 29 मिनट से 2 बजकर 4 मिनट

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दिशाशूल पश्चिम दिशा

सूर्य राशि सिंह

चंद्र राशि धनु

संतान की सुख समृद्धि के लिए रखा जाता है व्रत

पुत्रदा एकादशी को लेकर धार्मिक मान्यताओं में भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। संतान की इच्छा रखने वाले दंपति इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि विधान से पूजा करने से संतान प्राप्ति तथा संतान की सुख समृद्धि की कामना पूरी हो सकती है।

हालांकि ऐसी धार्मिक मान्यताएं आस्था पर आधारित हैं। संतान संबंधी स्वास्थ्य समस्या होने पर धार्मिक अनुष्ठान के साथ चिकित्सकीय परामर्श लेना भी आवश्यक है।

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