हरिद्वार। योग गुरु बाबा रामदेव ने रविवार को हरिद्वार में मीडिया से बातचीत के दौरान भाजपा सांसद कंगना रनौत से जुड़े विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कंगना रनौत का नाम लेते हुए कहा कि वह ऐसे लोगों पर टिप्पणी कर विवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहते। रामदेव ने कहा कि देश के लोग उनके बारे में और उनके योगदान के बारे में अच्छी तरह जानते हैं।
रामदेव ने कहा, “इस देश के लोग जानते हैं कि स्वामी रामदेव कौन हैं और उनका क्या योगदान रहा है। इसलिए, मैं ऐसे ओछे लोगों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। मैं विवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहता।”
उनकी यह टिप्पणी कंगना रनौत के साथ जुड़े हालिया विवाद के संदर्भ में सामने आई है। हालांकि रामदेव ने विवाद के कारणों और उससे जुड़े अन्य पहलुओं पर विस्तार से बात करने से इनकार किया और अपनी बात को यहीं तक सीमित रखा।
‘एक देश, एक चुनाव’ से विकास को मिलेगी रफ्तार
मीडिया से बातचीत के दौरान बाबा रामदेव ने ‘एक देश, एक चुनाव’ के प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश में बार बार चुनाव होने से विकास की प्रक्रिया प्रभावित होती है और इसका असर शिक्षा सहित कई क्षेत्रों पर पड़ता है।
रामदेव ने कहा कि देश में चुनाव पूरे साल चलते रहते हैं। हर कुछ महीनों में किसी न किसी राज्य में चुनाव होने के कारण राजनीतिक गतिविधियां लगातार बनी रहती हैं। उनके मुताबिक, यदि एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था लागू होती है तो शिक्षा और विकास के कामों को ज्यादा समय और गति मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को किसी भी तरह की बाधा का बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए। सड़कों और संसद में हंगामा या व्यवधान पैदा करके लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
‘राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर होना चाहिए देशहित’
रामदेव ने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए देशहित से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि वह चाहते हैं कि भारत इससे पहले ही विकसित राष्ट्र बन जाए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखा है, लेकिन उनका सपना है कि भारत वर्ष 2040 तक ही विकसित राष्ट्र बन जाए। इसके लिए देश के सभी क्षेत्रों में तेजी से सुधार और विकास की जरूरत है।
रामदेव ने शिक्षा, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और कृषि के साथ लोकतंत्र से जुड़े विभिन्न पहलुओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार इन क्षेत्रों में काम कर रही है और भविष्य में भी सुधार की प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए।
विरोध प्रदर्शनों में बच्चों को शामिल करने पर जताई आपत्ति
योग गुरु ने आंदोलनों में नाबालिग बच्चों की भागीदारी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ लोग पांच, सात और दस साल तक के बच्चों को भी विरोध प्रदर्शनों में शामिल कर रहे हैं।
रामदेव ने कहा कि बच्चों को पुलिस थानों का घेराव करने, एसपी और जिलाधिकारियों के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन करने या सड़कों पर उतरने के लिए आगे नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ अन्याय हो रहा है तो 18 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिक लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा सकते हैं। लेकिन नाबालिग बच्चों को आंदोलनों में आगे करना उचित नहीं है।
‘लोकतंत्र को सड़क और संसद में हंगामे का बंधक न बनाएं’
रामदेव ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध का तरीका ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे आम जनजीवन और लोकतांत्रिक संस्थाओं का काम प्रभावित हो।
उन्होंने कहा कि सड़क और संसद में हंगामा या व्यवधान पैदा करके लोकतंत्र को बंधक बनाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद और संवैधानिक तरीकों से अपनी बात रखी जानी चाहिए।
वंदे मातरम को लेकर भी रामदेव ने रखी राय
‘वंदे मातरम’ को लेकर पूछे गए सवाल पर बाबा रामदेव ने कहा कि उनके लिए भारत माता सर्वोच्च आस्था का केंद्र हैं। उन्होंने भारत माता को दुर्गा और लक्ष्मी के स्वरूप में देखने की बात कही।
रामदेव ने कहा कि भारत माता उनके लिए ज्ञान, आस्था, शक्ति, पूजा, कर्तव्य और उद्देश्य का केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग ‘वंदे मातरम’ में देवी देवताओं, मठों या मंदिरों का संदर्भ देखते हैं, उन्हें संस्कृत और भारतीय संस्कृति का अधिक अध्ययन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत माता उनके लिए ज्ञान, आस्था, मंदिर, पूजा, कर्तव्य, उद्देश्य, मंजिल और धर्म का स्वरूप हैं।
शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि में सुधार पर जोर
बाबा रामदेव ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा, अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र में लगातार सुधार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार इन क्षेत्रों में काम कर रही है, लेकिन देश के विकास की गति को और तेज किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश के सामने कई चुनौतियां हैं और इनका समाधान सामूहिक प्रयास से ही संभव है। राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देशहित को प्राथमिकता देने की जरूरत है।
रामदेव ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य केवल सरकार का नहीं, बल्कि पूरे देश का संकल्प होना चाहिए। इसके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और कृषि सहित प्रत्येक क्षेत्र को मजबूत करना आवश्यक है।



