Home » उत्तर प्रदेश » यूपी में ओवैसी की बड़ी तैयारी: 2027 चुनाव को लेकर AIMIM की रणनीति तेज, 250 सीटों पर दांव की तैयारी

यूपी में ओवैसी की बड़ी तैयारी: 2027 चुनाव को लेकर AIMIM की रणनीति तेज, 250 सीटों पर दांव की तैयारी

Facebook
Twitter
WhatsApp

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर प्रदेश की सियासत में गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी समेत तमाम राजनीतिक दल अपनी चुनावी तैयारियों को धार देने में जुटे हैं। इसी बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी एआईएमआईएम ने भी उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी रणनीति पर काम तेज कर दिया है।

पार्टी की कोशिश इस बार उत्तर प्रदेश विधानसभा में अपना सियासी खाता खोलने की है। एआईएमआईएम की पहली प्राथमिकता विपक्षी दलों के साथ गठबंधन बनाना बताई जा रही है, लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बनी तो पार्टी अकेले चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। पार्टी नेताओं के मुताबिक ऐसी स्थिति में एआईएमआईएम करीब 200 से 250 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतार सकती है।

पश्चिमी यूपी से तराई तक ओवैसी की नजर

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी उत्तर प्रदेश के चुनावी महत्व को समझते हुए प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा कर चुके हैं। पार्टी की नजर खास तौर पर उन विधानसभा क्षेत्रों पर है, जहां मुस्लिम मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में माने जाते हैं।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर तराई क्षेत्र में आने वाले बहराइच तक पार्टी की गतिविधियां बढ़ाई गई हैं। प्रयागराज, बहराइच, सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर और अमरोहा की कई विधानसभा सीटों पर संगठनात्मक गतिविधियों को तेज किया गया है।

पार्टी इन क्षेत्रों में केवल बड़े नेताओं के स्तर पर ही नहीं, बल्कि बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। स्थानीय कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और संभावित उम्मीदवारों की पहचान करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

गठबंधन पहली पसंद, लेकिन विकल्प खुले

एआईएमआईएम की रणनीति में गठबंधन को प्राथमिकता दी जा रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि भाजपा को रोकने के लिए वह विपक्षी दलों के साथ सम्मानजनक हिस्सेदारी वाले गठबंधन के पक्ष में है।

हालांकि गठबंधन की शर्तों और सीटों के बंटवारे को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। यही वजह है कि पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने का विकल्प भी खुला रखा है।

ALSO READ THIS :  ग्रेटर नोएडा में एसी ब्लास्ट से मकान में लगी भीषण आग, दो कमरे जलकर राख, टला बड़ा हादसा

पार्टी के नेताओं के अनुसार सितंबर तक गठबंधन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई तो संगठन अपने दम पर विधानसभा चुनाव की तैयारियों को और तेज कर सकता है।

200 से 250 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी

एआईएमआईएम सेंट्रल जोन के अध्यक्ष शेख ताहिर सिद्दीकी के मुताबिक पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में अपना खाता खोलने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी की बूथ स्तर तक तैयारियां चल रही हैं और प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों के आवेदन लगातार मिल रहे हैं।

उनके मुताबिक यदि गठबंधन को लेकर सितंबर तक सहमति नहीं बनती है तो एआईएमआईएम उत्तर प्रदेश की 200 से 250 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी करेगी।

इस रणनीति के तहत पार्टी का लक्ष्य केवल चुनिंदा सीटों पर प्रभाव डालना नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में अपना संगठनात्मक आधार बढ़ाना है।

2023 के निकाय चुनाव से मिली उम्मीद

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक एआईएमआईएम को वर्ष 2023 के उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव में अपने प्रदर्शन से प्रदेश में संगठन विस्तार का अवसर मिला। पार्टी के कई प्रत्याशियों ने स्थानीय निकाय चुनाव में जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक मौजूदगी का अहसास कराया था।

अब पार्टी इसी स्थानीय स्तर की सफलता को विधानसभा चुनाव तक ले जाने की रणनीति पर काम कर रही है। संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की कवायद इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

हालांकि विधानसभा चुनावों में पार्टी का अब तक का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा है और एआईएमआईएम उत्तर प्रदेश विधानसभा में अभी तक अपना खाता नहीं खोल सकी है। ऐसे में 2027 में पार्टी के सामने स्थानीय प्रभाव को विधानसभा सीटों में बदलने की बड़ी चुनौती होगी।

मुस्लिम मतदाताओं वाले इलाकों पर खास फोकस

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर अवध और पूर्वांचल के कई हिस्सों में मुस्लिम मतदाता चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। एआईएमआईएम इसी राजनीतिक संभावना को ध्यान में रखते हुए इन क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां बढ़ा रही है।

ALSO READ THIS :  फिर बढ़ीं आजम खान की मुश्किलें: ED का बड़ा एक्शन, 10 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापे, खंगाले जा रहे जौहर ट्रस्ट के काले-सफेद बहीखाते!

यदि पार्टी इन इलाकों में अपना जनाधार बढ़ाने में सफल रहती है तो उसका असर केवल उसके वोट प्रतिशत तक सीमित नहीं रहेगा। चुनावी मुकाबले में करीबी सीटों पर उसके उम्मीदवारों की मौजूदगी विपक्षी दलों के वोट समीकरण को प्रभावित कर सकती है।

खास तौर पर समाजवादी पार्टी के परंपरागत मुस्लिम वोट बैंक को लेकर एआईएमआईएम की सक्रियता को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एआईएमआईएम के मैदान में उतरने से बदल सकता है विपक्षी समीकरण

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक हुज्जत रजा के मुताबिक यदि एआईएमआईएम विपक्षी गठबंधन से अलग रहकर विधानसभा चुनाव लड़ती है तो इसका असर विपक्षी मतों के बंटवारे के रूप में सामने आ सकता है।

उनका मानना है कि जिन सीटों पर मुकाबला करीबी होगा, वहां एआईएमआईएम के उम्मीदवारों को मिलने वाला वोट चुनावी नतीजे पर असर डाल सकता है। ऐसी स्थिति में विपक्षी वोटों के विभाजन का संभावित लाभ भाजपा को मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

वहीं यदि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन एआईएमआईएम को साथ लेने में सफल रहता है तो चुनावी समीकरण अलग हो सकते हैं और विपक्ष को इससे लाभ मिलने की संभावना बन सकती है।

भीम-मीम समीकरण की भी चर्चा

उत्तर प्रदेश की आगामी सियासत में एआईएमआईएम के संभावित गठजोड़ को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। चंद्रशेखर आजाद और पल्लवी पटेल जैसे नेताओं और उनके राजनीतिक विकल्पों के साथ संभावित तालमेल को भी कुछ राजनीतिक विश्लेषक भीम-मीम समीकरण के नजरिए से देख रहे हैं।

हालांकि इन संभावित गठबंधनों को लेकर अभी कोई अंतिम तस्वीर सामने नहीं आई है। इसी तरह अतीक अहमद के परिवार से जुड़े किसी चेहरे को चुनाव मैदान में उतारे जाने की संभावनाओं को लेकर भी चर्चाएं हैं, लेकिन इस संबंध में फिलहाल किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

भाजपा को रोकने के लिए विपक्षी एकजुटता पर जोर

एआईएमआईएम सेंट्रल जोन के अध्यक्ष शेख ताहिर सिद्दीकी ने कहा कि पार्टी का मुख्य उद्देश्य भाजपा को रोकना है। उन्होंने कहा कि पार्टी सभी विपक्षी दलों के साथ सम्मानजनक हिस्सेदारी वाले गठबंधन के पक्ष में है।

ALSO READ THIS :  लखनऊ में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की बड़ी बैठकें, सहयोगी दलों को संदेश- केवल जिताऊ उम्मीदवार ही लड़ेंगे चुनाव

उन्होंने बसपा के साथ संभावित गठबंधन के साथ ही चंद्रशेखर आजाद और अन्य दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के विकल्प का भी उल्लेख किया। पार्टी का कहना है कि गठबंधन में सीटों की हिस्सेदारी सम्मानजनक होनी चाहिए।

बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने की कवायद

एआईएमआईएम की ओर से प्रदेश में बूथ स्तर पर संगठन तैयार करने का दावा किया जा रहा है। पार्टी के मुताबिक अलग-अलग जिलों से चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से लगातार आवेदन मिल रहे हैं।

पार्टी की कोशिश ऐसे क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर मजबूत चेहरे तैयार करने की है, जहां उसका सामाजिक और राजनीतिक आधार बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही संगठन को चुनाव से काफी पहले सक्रिय करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

2027 में एआईएमआईएम के सामने बड़ी चुनौती

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में विधानसभा चुनाव लड़ना किसी भी राजनीतिक दल के लिए बड़ी चुनौती है। एआईएमआईएम के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने सीमित राजनीतिक प्रभाव को व्यापक चुनावी आधार में बदलने की होगी।

एक ओर पार्टी गठबंधन के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है, वहीं दूसरी ओर गठबंधन नहीं होने की स्थिति में बड़ी संख्या में सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। ऐसे में 2027 का विधानसभा चुनाव एआईएमआईएम के लिए उत्तर प्रदेश में अपने राजनीतिक विस्तार की दिशा तय करने वाला चुनाव साबित हो सकता है।

फिलहाल पार्टी की नजर गठबंधन की संभावनाओं पर है। सितंबर तक तस्वीर साफ होने के बाद यह तय होगा कि एआईएमआईएम विपक्षी खेमे के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी या फिर 200 से 250 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारकर उत्तर प्रदेश की सियासत में स्वतंत्र रूप से अपनी जगह बनाने की कोशिश करेगी।

टॉप स्टोरी

ज़रूर पढ़ें