रोहतक। हरियाणा के रोहतक की सुनारिया जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर पैरोल मिल गई है। इस बार उसे 21 दिन की पैरोल मंजूर की गई है। पैरोल अवधि में राम रहीम जेल से बाहर निकलकर सिरसा पहुंचने की बात सामने आई है।
राम रहीम को बार बार पैरोल मिलने का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहे डेरा प्रमुख को इससे पहले भी कई बार जेल से बाहर आने की अनुमति मिल चुकी है। उसके लगातार पैरोल पर बाहर आने को लेकर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से पहले भी सवाल उठाए जाते रहे हैं।
21 दिन की पैरोल, सिरसा जाने की तैयारी
गुरमीत राम रहीम को इस बार 21 दिन की पैरोल दी गई है। पैरोल की अवधि में उसके सिरसा जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि राम रहीम की पिछली कई पैरोल के दौरान वह उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित डेरा सच्चा सौदा के आश्रम में रहा था।
डेरा सच्चा सौदा का मुख्यालय हरियाणा के सिरसा में स्थित है। संगठन के हरियाणा के अलावा पंजाब, राजस्थान और कई अन्य उत्तरी राज्यों में बड़ी संख्या में अनुयायी हैं। राम रहीम के जेल से बाहर आने के दौरान उसके अनुयायियों के बीच भी गतिविधियां बढ़ जाती हैं।
पहले भी कई बार मिल चुकी है पैरोल
राम रहीम इससे पहले 16 बार जेल से बाहर आ चुका है। इसी साल 26 मई को उसे 30 दिन की पैरोल मिली थी। इससे पहले जनवरी में भी उसे 40 दिन की पैरोल दी गई थी। उस पैरोल की अवधि पूरी होने के बाद वह 15 फरवरी को सुनारिया जेल वापस लौटा था।
इसके अलावा 15 सितंबर 2025 को भी गुरमीत राम रहीम को 40 दिनों की पैरोल मिली थी। लगातार पैरोल मिलने के कारण यह मामला लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बना हुआ है।
विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों की ओर से पहले भी सवाल उठाए गए हैं कि गंभीर आपराधिक मामले में सजा काट रहे राम रहीम को बार बार पैरोल क्यों मिल रही है। दूसरी ओर प्रशासन की ओर से कहा जाता रहा है कि पैरोल नियमों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत दी जाती है।
दो साध्वियों से दुष्कर्म मामले में मिली 20 साल की सजा
गुरमीत राम रहीम सिंह को दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने दोषी करार दिया था। अदालत ने दोनों मामलों में उसे 10 10 साल की सजा सुनाई थी। इस तरह उसे कुल 20 साल की सजा मिली थी।
राम रहीम को सजा सुनाए जाने के बाद से ही वह रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है। समय समय पर उसे पैरोल और फरलो मिलने को लेकर यह मामला सुर्खियों में आता रहा है।
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड मामले में भी सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
इसी बीच पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड से जुड़े मामले में भी गुरमीत राम रहीम को लेकर कानूनी गतिविधियां जारी हैं। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से राम रहीम को इस मामले में बरी किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राम रहीम और केंद्रीय जांच ब्यूरो से जवाब मांगा है। अदालत ने नोटिस जारी करते हुए मामले की सुनवाई 16 नवंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में करने की बात कही है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दाखिल नहीं की गई है। हाईकोर्ट के बरी करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर अब शीर्ष अदालत में आगे सुनवाई होगी। यह नोटिस 10 अगस्त को जारी किया गया था।
पैरोल के साथ फिर गरमाया सियासी और सामाजिक सवाल
राम रहीम की नई पैरोल ऐसे समय में सामने आई है, जब उसके बार बार जेल से बाहर आने को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। एक तरफ प्रशासन पैरोल को नियमों के तहत होने वाली प्रक्रिया बताता है, वहीं दूसरी तरफ विरोधी दल और सामाजिक संगठन इस व्यवस्था पर सवाल खड़े करते रहे हैं।
राम रहीम की पैरोल के दौरान उसके अनुयायियों की गतिविधियां और डेरा सच्चा सौदा से जुड़ी हलचल भी चर्चा में रहती है। अब 21 दिन की नई पैरोल के बाद एक बार फिर यह मामला राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।



