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रक्षा बंधन पर बन रहे शुभ संयोग, जानें राखी बांधने का मुहूर्त और राहुकाल

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी शुभ कार्य की शुरुआत, यात्रा, निवेश, पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान से पहले पंचांग देखकर शुभ और अशुभ समय का विचार किया जाता है। पंचांग हिंदू काल गणना की पारंपरिक पद्धति है, जिसमें सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर तिथि, नक्षत्र, योग और विभिन्न मुहूर्तों की जानकारी दी जाती है।

28 अगस्त 2026 शुक्रवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। इसके बाद प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन रक्षा बंधन का पावन पर्व मनाया जाएगा। भाई बहन के प्रेम और स्नेह के प्रतीक इस पर्व पर राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है।

सुबह 5:57 से 9:48 बजे तक राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

रक्षा बंधन के दिन राखी बांधने का मुख्य शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 57 मिनट से सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार राखी बांधते समय शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस दौरान बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी सुख समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करेंगी। भाई भी अपनी बहनों की रक्षा और सम्मान का संकल्प लेते हुए उन्हें उपहार देंगे।

28 अगस्त को सूर्योदय और चंद्रोदय का समय

पंचांग के अनुसार 28 अगस्त को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 11 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 44 मिनट पर होगा। चंद्रमा का उदय शाम 6 बजकर 56 मिनट पर होगा और अगले दिन तड़के 6 बजकर 57 मिनट पर चंद्रास्त होगा।

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शुक्रवार को सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा कुंभ राशि में रहेगा। इस दिन ग्रहों की स्थिति के आधार पर धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विभिन्न मुहूर्तों का विचार किया जाएगा।

मघा नक्षत्र में सूर्य, शतभिषा में चंद्रमा

28 अगस्त को सूर्य मघा नक्षत्र में स्थित रहेगा। वहीं चंद्रमा शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। शतभिषा नक्षत्र अगले दिन तड़के लगभग 3 बजकर 12 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र शुरू होगा।

पंचांग में नक्षत्रों की स्थिति का विशेष महत्व माना जाता है। शुभ कार्यों के लिए तिथि और नक्षत्र के साथ योग एवं अन्य कालों का भी विचार किया जाता है।

अतिगंड के बाद शुरू होगा सुकर्मा योग

इस दिन सुबह 7 बजकर 26 मिनट तक अतिगंड योग रहेगा। इसके बाद सुकर्मा योग शुरू होगा। पंचांग के अनुसार विभिन्न योगों का अलग अलग महत्व माना जाता है और शुभ कार्यों के लिए इनके समय का विचार किया जाता है।

28 अगस्त को हर्षण योग नहीं रहेगा। वहीं दिन का अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 3 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। इसे दिन के प्रमुख शुभ समयों में से एक माना जाता है।

रात 7:43 से 9:23 बजे तक अमृत काल

28 अगस्त को अमृत काल रात 7 बजकर 43 मिनट से रात 9 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमृत काल को शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण समय माना जाता है।

हालांकि किसी भी कार्य के लिए मुहूर्त निर्धारित करते समय स्थानीय पंचांग और संबंधित स्थान के समय का भी ध्यान रखना आवश्यक माना जाता है।

राहुकाल में शुभ कार्य करने से बचने की मान्यता

शुक्रवार को राहुकाल सुबह 10 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा गुलिक काल सुबह 7 बजकर 45 मिनट से 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगा।

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यमगंड काल दोपहर 3 बजकर 36 मिनट से शाम 5 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं में राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड को शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इसलिए इस दौरान नए कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।

पश्चिम दिशा में रहेगा दिशाशूल

28 अगस्त शुक्रवार को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।

यदि किसी कारण से पश्चिम दिशा की यात्रा करना आवश्यक हो तो प्रस्थान से पहले पारंपरिक ज्योतिषीय उपाय करने की मान्यता है। यात्रा से जुड़े निर्णय लेते समय सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देना भी जरूरी है।

रक्षा बंधन पर मुहूर्त का रखें विशेष ध्यान

रक्षा बंधन भाई बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व है। इस दिन राखी बांधने के लिए शुभ समय का विशेष महत्व माना जाता है। 28 अगस्त को सुबह 5 बजकर 57 मिनट से 9 बजकर 48 मिनट तक राखी बांधने का मुख्य शुभ मुहूर्त बताया गया है।

पंचांग के अनुसार तिथि, नक्षत्र, योग, करण और विभिन्न कालों का विचार करके शुभ समय निर्धारित किया जाता है। ऐसे में पर्व से जुड़े धार्मिक कार्यों के लिए स्थानीय पंचांग के समय को भी प्राथमिकता देना उचित माना जाता है।

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