काठमांडू। नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। नेपाल और चीन की सीमा के पास भूस्खलन के कारण दो नई झीलें बन गई हैं। इनमें से एक झील से लगातार पानी का रिसाव हो रहा है, जबकि दूसरी झील का आकार लगातार बढ़ रहा है। इससे निचले इलाकों में दोबारा अचानक बाढ़ आने और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है।

बाढ़ और भूस्खलन ने नेपाल के साथ तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में भी भारी तबाही मचाई है। तेज बहाव अपने साथ कीचड़, रेत, बजरी और बड़ी चट्टानें लेकर नीचे के इलाकों में पहुंचा, जिससे सड़कें, पुल, मकान और अन्य ढांचे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
दो झीलों ने बढ़ाई नई बाढ़ की आशंका
नेपाल चीन सीमा के पास भूस्खलन के बाद बनी दोनों झीलों पर नेपाली और चीनी अधिकारी लगातार नजर रख रहे हैं। उपलब्ध हवाई और सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि एक झील से पानी बाहर निकल रहा है, जबकि दूसरी में पानी लगातार बढ़ रहा है।
वैज्ञानिक जेफ्री कार्गेल ने सीएनएन से बातचीत में आशंका जताई कि दूसरी झील का पानी अस्थिर स्थिति में है। यदि उसका प्राकृतिक बांध टूटता है तो भारी मात्रा में पानी निचले इलाकों की ओर तेजी से पहुंच सकता है। उनका कहना है कि यदि दूसरी झील भी टूटती है तो उसका पानी पहली झील में पहुंचकर एक साथ बड़ी बाढ़ का कारण बन सकता है।
पहली झील का बांध शुक्रवार को टूट चुका है। खतरे को देखते हुए बचाव दलों को ऊंचे स्थानों पर तैयार रहने की सलाह दी गई है।

नदी के निचले इलाकों में कैमरे और सेंसर लगाने की तैयारी
अधिकारी झीलों और पानी के बहाव पर नजर रखने के लिए सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। अब नदी के निचले हिस्सों में कैमरे और सेंसर लगाने की तैयारी की जा रही है, ताकि पानी के स्तर में अचानक होने वाले बदलाव का तुरंत पता लगाया जा सके।
चीन की ओर भी पानी का स्तर बढ़ने के कारण शुक्रवार को राहत अभियान रोकना पड़ा था। अधिकारियों को आशंका थी कि झील का जलस्तर बढ़ने पर फिर से बाढ़ या भूस्खलन हो सकता है। नेपाल में भी इसी खतरे के चलते राहत और बचाव अभियान प्रभावित हुआ।

नेपाल में मौतों और लापता लोगों के आंकड़े बढ़े
नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है। अलग अलग समय पर नेपाल पुलिस और राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण की ओर से अलग-अलग आंकड़े जारी किए गए हैं। एक ताजा आंकड़े के मुताबिक नेपाल में मृतकों की संख्या 626 तक पहुंच गई है, जबकि करीब 2 हजार लोग अब भी लापता हैं।
दूसरी ओर, नेपाल और तिब्बत को मिलाकर मृतकों की संख्या 633 बताई गई है और करीब 2500 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। राहत और बचाव अभियान जारी रहने के कारण आंकड़ों में लगातार बदलाव हो रहा है।
प्रशासन का कहना है कि अलग-अलग एजेंसियों की ओर से आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। शवों की बरामदगी और लापता लोगों की पहचान के साथ मृतकों और लापता लोगों की संख्या में बदलाव संभव है।

भारत में भी मिले नेपाल से बहकर आए शव
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में शनिवार को गंडक नदी से तीन शव बरामद किए गए। अधिकारियों को आशंका है कि ये शव नेपाल में आई बाढ़ के दौरान बहकर भारत पहुंचे होंगे।
इससे पहले पड़ोसी महराजगंज जिले में भी चार अज्ञात शव मिले थे। प्रशासन शवों की पहचान कराने के लिए नेपाल के अधिकारियों के संपर्क में है। इस घटनाक्रम ने नेपाल में आई बाढ़ की भयावहता को और सामने ला दिया है।

चीन के ग्यिरोंग पोर्ट में भारी तबाही
तिब्बत के ग्यिरोंग पोर्ट में भी बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है। चीनी सरकारी मीडिया की ओर से जारी तस्वीरों में सीमा के पास का इलाका कीचड़ और चट्टानों से पटा दिखाई दे रहा है। बचावकर्मी मलबे के बीच लोगों की तलाश करते नजर आ रहे हैं।
ग्यिरोंग पोर्ट नेपाल और तिब्बत के बीच पर्यटकों तथा वाहनों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों में इस इलाके में भारी नुकसान दिखाई दे रहा है। यहां कम से कम 554 लोगों के लापता होने और सात लोगों की मौत की पुष्टि की गई है।
बचाव दल शुक्रवार दोपहर पहाड़ों को पार करते हुए, चट्टानों पर चढ़कर और तेज बहाव वाली नदियों को पार करते हुए ग्यिरोंग पोर्ट पहुंचा।

40 किलोमीटर से ज्यादा हाईवे मलबे में दबा
बाढ़ और भूस्खलन के कारण नेपाल चीन सीमा को जोड़ने वाले पासांग ल्हामु हाईवे का 40 किलोमीटर से अधिक हिस्सा मलबे में दब गया है। इसके चलते उत्तरी रसुवा जिला देश के दूसरे हिस्सों से लगभग कट गया है।
ग्यिरोंग पोर्ट जाने वाला महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग भी बंद है। चीन नेपाल का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और सीमा के रास्ते सामान की आवाजाही के लिए इन सड़कों और पुलों का महत्वपूर्ण योगदान है।
रसुवा और नुवाकोट के 18 से अधिक पहाड़ी गांवों में भी सड़क संपर्क टूट गया है। तिमुरे, स्याफ्रुबेसी और थुमन जैसे इलाकों तक पहुंचने के लिए फिलहाल पैदल मार्ग या हेलिकॉप्टर का सहारा लेना पड़ रहा है।

पुलों को दोबारा जोड़ने की कोशिश
बाढ़ में रसुवा, नुवाकोट और धादिंग के कई पुल बह गए या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। रसुवागढ़ी फ्रेंडशिप ब्रिज सबसे महत्वपूर्ण पुलों में शामिल है, जो नेपाल और चीन की सीमा को जोड़ता है। इसे दोबारा जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
इसके अलावा भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों पर बने छोटे सस्पेंशन ब्रिजों को अस्थायी रूप से चालू करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि प्रभावित इलाकों में लोगों की आवाजाही बहाल हो सके।
नेपाल सरकार ने सड़क और यातायात व्यवस्था बहाल करने के लिए भारत और चीन से 42 बेली ब्रिज तैयार करने में मदद मांगी है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, पुलों की संख्या राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के आकलन के आधार पर तय की गई है।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल भी कह चुके हैं कि नेपाल को जरूरत पड़ने पर बेली ब्रिज समेत हर जरूरी मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
राहत कोष में जमा हुए अरबों नेपाली रुपये
बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए नेपाल सरकार की ओर से बनाए गए प्रधानमंत्री राहत कोष में अब तक 4.38 अरब नेपाली रुपये जमा होने की जानकारी सामने आई है। यह राशि करीब 274 करोड़ भारतीय रुपये के बराबर है।
इसके अलावा हिमालयन बैंक और लक्ष्मी बैंक में करीब 6.8 लाख अमेरिकी डॉलर भी जमा हुए हैं। यह रकम करीब 10.38 करोड़ नेपाली रुपये के बराबर बताई गई है।
नेपाल सरकार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत, पुनर्वास और सड़क तथा पुलों की मरम्मत के लिए संसाधन जुटाने में लगी है।
नेपाल में 13 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी राहत अभियान में जुटे
नेपाल सरकार के मुताबिक राहत और बचाव अभियान में 13,295 सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है। इनमें नेपाल पुलिस के 7,250, नेपाली सेना के 4,200 और आर्म्ड पुलिस फोर्स के 1,845 जवान शामिल हैं।
सरकार के अनुसार अब तक 3,253 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। प्रभावित और दुर्गम इलाकों में हेलिकॉप्टरों के जरिए लोगों को निकालने के साथ ही जरूरी खाद्य सामग्री और अन्य राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
भारत ने भेजी 57.5 टन राहत सामग्री
भारत ने नेपाल में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए अब तक 57.5 टन आपातकालीन राहत सामग्री भेजी है। शुक्रवार रात 10 टन राहत सामग्री की एक और खेप काठमांडू पहुंची।
भारत की ओर से 11 सदस्यीय डॉक्टरों और पैरामेडिक्स की टीम भी नेपाल भेजी गई है। इसके साथ सुरंग बचाव अभियान में सहायता के लिए विशेष बचाव दल भी पहुंचा है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि भारतीय टीमें नेपाल पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में जुट गई हैं। उन्होंने 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में मदद करने के लिए नेपाल की सेना का आभार जताया।
84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया
विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल में बाढ़ के बाद अब तक 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं, जो शुक्रवार को भारत लौटे।
त्रिशूली एक जलविद्युत परियोजना में काम करने वाले 63 मजदूरों को भी सुरक्षित निकाल लिया गया है। भारतीय वायुसेना का तीसरा विमान शुक्रवार को 11 सदस्यीय मेडिकल और सुरंग बचाव टीम के साथ नेपाल पहुंचा।
राहत सामग्री नेपाल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्री महाबीर पुन को सौंपी गई है।
तिब्बत में फंसे भारतीयों को भी निकाला जा रहा
चीन की ओर भारत नेपाल सीमा क्षेत्र में फंसे 53 भारतीय नागरिक शुक्रवार को काठमांडू पहुंचे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इनमें महाराष्ट्र के 37 लोग शामिल हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटते समय तिब्बत में फंस गए थे।
महाराष्ट्र सरकार के अनुसार, 395 नागरिक अभी भी फंसे हुए हैं। इनमें 325 लोगों से संपर्क हो चुका है और उन्हें सुरक्षित बताया गया है। इनमें नागपुर के 105 लोग भी शामिल हैं।
करीब 60 लोग तिब्बत के रियू इलाके में हैं, लेकिन उनसे अभी संपर्क नहीं हो पाया है। अन्य 10 लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
चार फ्रांसीसी नागरिक भी लापता
नेपाल में आई बाढ़ के बाद चार फ्रांसीसी नागरिकों के लापता होने की जानकारी भी सामने आई है। फ्रांस की विदेश मामलों की मंत्री प्रतिनिधि एलेनोर कैरोआ के अनुसार, बाढ़ के समय नेपाल तिब्बत सीमा पर 80 फ्रांसीसी नागरिक मौजूद थे। इनमें से 76 के बारे में जानकारी मिल चुकी है, जबकि चार लोगों की तलाश जारी है।
अमेरिका के करीब 90 नागरिकों का पता नहीं
अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया कि नेपाल और चीन में आई बाढ़ के बाद करीब 90 अमेरिकी नागरिकों का अब तक पता नहीं चल पाया है। पांच अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और किसी अमेरिकी नागरिक की मौत की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
अमेरिका ने नेपाल को राहत के लिए पांच लाख डॉलर की सहायता देने का ऐलान किया है। राहत सामग्री लेकर पहला ट्रक भी नेपाल के लिए रवाना किया जा चुका है।
परिवारों की तलाश में जुटे लोग
बाढ़ ने कई परिवारों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। तिमुरे गांव में रहने वाले 45 वर्षीय दावा लामा ने बताया कि बुधवार सुबह करीब नौ बजे उन्हें तेज आवाज सुनाई दी और कुछ ही देर में कीचड़ और पानी की विशाल लहर उनके घर से टकरा गई।
लामा के मुताबिक, बाढ़ उनके घर, सामान और पत्नी को बहा ले गई। उनकी सात और आठ साल की दोनों बेटियां भी लापता हैं। उन्होंने बताया कि कुछ ही मिनटों में उनका पूरा परिवार बिखर गया।
स्याफ्रुबेसी में तैनात 41 वर्षीय पुलिस अधिकारी राजन खत्री ने बताया कि सुबह करीब 9 बजकर 10 मिनट पर उन्हें बाढ़ की चेतावनी मिली थी। लेकिन फोन रखने के तुरंत बाद पानी की तेज लहर पुलिस स्टेशन में घुस गई।
खत्री के मुताबिक, पानी के साथ बड़े पत्थर, रेत और गाढ़ा कीचड़ बह रहा था। उन्होंने बताया कि कुछ ही सेकंड में कई मीटर ऊंची इमारतें मलबे में समा गईं। पुलिस स्टेशन के सात कर्मचारियों में से केवल तीन के जीवित बचने की जानकारी है।
कुछ सेकंड में बह गया सब कुछ
17 वर्षीय स्मृति ओझा ने बताया कि वह स्कूल जाने की तैयारी कर रही थीं, तभी उन्हें तेज झटके महसूस हुए। घर से बाहर निकलने पर सामने बाढ़ की विशाल लहरें दिखाई दीं।
उन्होंने बताया कि उनका परिवार समय रहते बाहर निकल गया, लेकिन वे अपने साथ कुछ भी नहीं बचा सके। परिवार सुरक्षित है, लेकिन उनके चार रिश्तेदार अब भी लापता हैं।
नेपाल ने भारत के समर्थन के लिए जताया आभार
नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने भारत की मदद और समर्थन के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आभार जताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि भारत सरकार की चिंता, सहयोग और एकजुटता के लिए नेपाल सरकार और जनता की ओर से वह धन्यवाद देते हैं।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, नेपाल में हजारों परिवारों को भोजन और साफ पीने के पानी की तत्काल जरूरत है। यूरोपीय संघ, कनाडा और अमेरिका समेत कई देशों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने राहत सामग्री तथा आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की घोषणा की है।
चीन के राष्ट्रपति ने भी जताई संवेदना
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को शोक संदेश भेजकर बाढ़ और भूस्खलन में हुए जानमाल के नुकसान पर संवेदना जताई है। उन्होंने कहा कि चीन लापता लोगों की तलाश और घायलों के इलाज के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है।
चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग ने भी नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह को शोक संदेश भेजा है। चीन की ओर से कहा गया है कि दोनों देश पहाड़ों और नदियों से जुड़े पड़ोसी हैं और मिलकर प्रभावित क्षेत्रों में राहत तथा पुनर्निर्माण का काम आगे बढ़ाएंगे।
चीन में बाढ़ की तस्वीरों पर भी उठे सवाल
नेपाल और तिब्बत सीमा पर बाढ़ की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैले। ग्यिरोंग पोर्ट के वीडियो में तेज बहाव के बीच लोगों को जान बचाने के लिए भागते हुए देखा गया। ये वीडियो सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुए थे।
हालांकि, चीन के इंटरनेट पर इन वीडियो और बाढ़ से हुई तबाही की जानकारी सीमित रूप में उपलब्ध होने की बात कही जा रही है। चीन में इंटरनेट पर सरकार के नियंत्रण और सेंसरशिप के कारण बाढ़ से जुड़ी कई जानकारियां आसानी से उपलब्ध नहीं होने का दावा किया गया है।
आर्थिक संकट भी बढ़ा
भीषण बाढ़ ने नेपाल की अर्थव्यवस्था के सामने भी नई चुनौती खड़ी कर दी है। विदेशी सहायता, विदेशों में काम कर रहे नेपाली नागरिकों की ओर से भेजी जाने वाली रकम और भारत तथा चीन के साथ व्यापार नेपाल की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण आधार हैं।
राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण के अनुसार बाढ़ में करीब 80 पुल और लगभग 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। चीन सीमा के पास स्थित ये सड़कें और पुल दोनों देशों के बीच व्यापार और परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
फिलहाल राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। लापता लोगों की तलाश, शवों की बरामदगी और प्रभावित क्षेत्रों तक जरूरी सामग्री पहुंचाने का काम चल रहा है। लेकिन दो नई झीलों के कारण खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। प्रशासन और बचाव एजेंसियों की सबसे बड़ी चुनौती अब संभावित दूसरी बाढ़ को रोकना और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित रखना है।



