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‘सेवा करते समय धर्म नहीं पूछते’, न्यूयॉर्क में मोहन भागवत बोले- बातचीत के साथ सेवा भी जरूरी

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न्यूयॉर्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि समाज में आपसी संवाद जितना जरूरी है, उतनी ही महत्वपूर्ण निस्वार्थ सेवा भी है। उन्होंने कहा कि समुदायों के बीच बातचीत और सेवा को अलग-अलग चरणों में नहीं, बल्कि एक साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। भागवत ने कहा कि आरएसएस बिना किसी धार्मिक भेदभाव के जरूरतमंद लोगों की सेवा करता है और सेवा के दौरान स्वयंसेवक व्यक्ति का धर्म या पहचान नहीं पूछते।

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न्यूयॉर्क में धार्मिक नेताओं की ओर से आयोजित ‘एक दुनिया, एक मानवता’ सभा को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने सेवा और संवाद को सामाजिक सौहार्द का महत्वपूर्ण आधार बताया।

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‘बातचीत पहला कदम, सेवा दूसरा कदम’

मोहन भागवत ने कहा कि अलग-अलग समुदायों के बीच बेहतर संबंधों के लिए बातचीत पहला कदम है, लेकिन इसके साथ सेवा भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि दोनों कामों को एक-दूसरे के बाद करने के बजाय एक साथ शुरू किया जाना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि समाज में जब लोग एक-दूसरे के साथ संवाद करते हैं और जरूरत के समय एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आते हैं, तो आपसी विश्वास मजबूत होता है।

‘जरूरतमंद की सेवा करते समय धर्म नहीं पूछते’

भागवत ने कहा कि आरएसएस की स्थापना के समय से ही सेवा उसके कार्यों का प्रमुख हिस्सा रही है। स्वयंसेवक जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करते समय उसकी धार्मिक पहचान के बारे में नहीं पूछते।

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उन्होंने कहा कि जिसे भी सहायता की जरूरत होती है, स्वयंसेवक उसकी सेवा करते हैं। उनके मुताबिक सेवा का उद्देश्य किसी से कुछ प्राप्त करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद तक सहायता पहुंचाना है।

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चरखी दादरी विमान हादसे का दिया उदाहरण

अपनी बात को समझाने के लिए मोहन भागवत ने हरियाणा के चरखी दादरी में हुए विमान हादसे का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद आरएसएस के स्वयंसेवक घटनास्थल पर पहुंचे और राहत कार्यों में जुट गए।

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भागवत के अनुसार, दोनों विमान अरब देशों से जुड़े थे और उनमें ज्यादातर यात्री मुस्लिम थे। इसके बावजूद स्वयंसेवकों ने राहत और सहायता के दौरान यात्रियों के धर्म के बारे में नहीं सोचा।

उन्होंने बताया कि स्वयंसेवकों ने हादसे में बचे लोगों के उपचार में मदद की, शवों को बाहर निकालने में सहयोग किया, अंतिम संस्कार की व्यवस्था में सहायता की और बाद में मृतकों की पहचान करने में उनके परिजनों की मदद की।

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‘हमने नहीं सोचा कि ये मुसलमान हैं’

भागवत ने कहा कि उस समय स्वयंसेवकों के मन में यह विचार नहीं आया कि हादसे में प्रभावित लोग किस धर्म से संबंधित हैं। उन्होंने कहा कि सेवा का भाव किसी धार्मिक पहचान से ऊपर होता है।

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उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस राजनीति में नहीं है और सेवा कार्यों के बदले किसी तरह की अपेक्षा नहीं रखता। उनके मुताबिक संगठन का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचाना है।

देशभर में चल रहे 1.30 लाख सेवा कार्य

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि समाज के सहयोग से स्वयंसेवक अलग-अलग क्षेत्रों और स्तरों पर करीब 1.30 लाख सेवा कार्य चला रहे हैं। इन कार्यों के जरिए जरूरतमंद लोगों तक विभिन्न प्रकार की सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।

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भागवत ने कहा कि सेवा केवल तत्काल मदद तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इससे मदद पाने वाले व्यक्ति के भीतर भी दूसरों की सहायता करने की भावना पैदा हो सकती है।

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मदद पाने वाले बाद में खुद बन जाते हैं मददगार

मोहन भागवत ने बताया कि कई लोग कठिन परिस्थितियों से निकलने के बाद स्वयं दूसरों की सहायता करने के लिए आगे आते हैं। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को इसके लिए निर्देश देने की आवश्यकता नहीं पड़ती, बल्कि सेवा का अनुभव उसके भीतर दूसरों के लिए कुछ करने की भावना पैदा करता है।

उन्होंने कुछ लाभार्थियों की प्रतिक्रिया का जिक्र करते हुए बताया कि लोगों ने कहा कि सेवा परियोजनाओं ने उन्हें बहुत कुछ दिया और अब वे समाज को कुछ वापस देना चाहते हैं।

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आरएसएस को लेकर बनी धारणाओं पर भी बोले भागवत

भागवत ने आरएसएस को लेकर समाज में बनी कुछ धारणाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संगठन ने अपने अधिकांश सेवा कार्यों का प्रचार-प्रसार नहीं किया, जिसकी वजह से लोगों के बीच उसके काम को लेकर कई तरह की गलतफहमियां पैदा हुईं।

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उन्होंने लोगों से अपील की कि संगठन के बारे में राय बनाने से पहले उसके काम को करीब से देखें और समझें। उनके मुताबिक जब लोग संगठन के काम को अंदर से देखेंगे तो कई गलत धारणाएं दूर हो सकती हैं।

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धार्मिक नेताओं से निस्वार्थ सेवा का आग्रह

आरएसएस प्रमुख ने धार्मिक नेताओं से आग्रह किया कि वे भी अपने-अपने देशों में निस्वार्थ सेवा के उदाहरण पेश करें। उन्होंने कहा कि समाज को बेहतर बनाने के लिए लगातार संवाद और सेवा दोनों जरूरी हैं।

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उन्होंने धार्मिक समुदायों के नेताओं से आपसी संपर्क बनाए रखने और बातचीत के माध्यम से एक-दूसरे को समझने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

चरखी दादरी हादसे में 349 लोगों की हुई थी मौत

गौरतलब है कि 1996 में हरियाणा के चरखी दादरी में हवा में सऊदी अरब एयरलाइंस और कजाकिस्तान एयरलाइंस के विमानों के बीच टक्कर हुई थी। यह विमान हादसा विमानन इतिहास की सबसे घातक हवाई टक्करों में शामिल है। हादसे में दोनों विमानों में सवार सभी 349 लोगों की मौत हो गई थी।

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मोहन भागवत ने इसी हादसे के दौरान स्वयंसेवकों की ओर से किए गए राहत और सहायता कार्यों का उदाहरण देते हुए सेवा के प्रति संगठन की सोच को सामने रखा।

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2025 में आरएसएस ने पूरे किए 100 साल

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में नागपुर में के.बी. हेडगेवार ने की थी। वर्ष 2025 में संगठन ने अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे किए। आरएसएस का देशभर में स्वयंसेवकों का व्यापक नेटवर्क है।

संगठन से जुड़े विभिन्न समूह शिक्षा, सामाजिक सेवा, मजदूर कल्याण, आदिवासी कल्याण और अन्य क्षेत्रों में काम करते हैं। भागवत ने अपने संबोधन में सेवा को संगठन की कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए इसे समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने पर जोर दिया।

 


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