नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना गया है। शुभ कार्य, धार्मिक अनुष्ठान, यात्रा, निवेश और पूजा पाठ से पहले पंचांग देखकर तिथि, नक्षत्र, योग और शुभ अशुभ समय का विचार किया जाता है। पंचांग हिंदू काल गणना की महत्वपूर्ण पद्धति है, जिसमें सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर दिन की धार्मिक एवं ज्योतिषीय गणनाएं की जाती हैं।
एक सितंबर दो हजार छब्बीस, मंगलवार को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि सुबह सात बजकर बयालीस मिनट तक रहेगी। इसके बाद पंचमी तिथि का आरंभ हो जाएगा। चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश की विधि विधान से पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। मंगलवार होने के कारण इस दिन भगवान हनुमान की उपासना का भी विशेष महत्व रहेगा।
सुबह गणेश आराधना, मंगलवार को हनुमान भक्ति का संयोग
चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक और लाल फूल अर्पित कर सकते हैं। गणेश मंत्रों का जाप और गणेश चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है। मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित होने के कारण हनुमान मंदिर में दर्शन, हनुमान चालीसा का पाठ और सुंदरकांड का पाठ करने की भी धार्मिक मान्यता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
एक सितंबर को सूर्योदय सुबह छह बजकर बारह मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम छह बजकर चालीस मिनट पर होगा। चंद्रमा का उदय रात नौ बजकर चौदह मिनट पर होगा और अगले दिन सुबह दस बजकर पचास मिनट पर चंद्रास्त होगा।
पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में स्थित रहेगा। वहीं चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। सूर्य सिंह राशि में और चंद्रमा मेष राशि में स्थित रहेगा।
वृद्धि योग के बाद बनेगा ध्रुव योग
एक सितंबर को हर्षण योग नहीं रहेगा। इस दिन रात ग्यारह बजकर सैंतीस मिनट तक वृद्धि योग रहेगा। इसके बाद ध्रुव योग शुरू हो जाएगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में वृद्धि योग को उन्नति और विकास से जुड़ा हुआ माना जाता है। वहीं ध्रुव योग को स्थिरता से संबंधित शुभ योग माना जाता है।
अभिजित मुहूर्त में शुभ कार्य करना रहेगा बेहतर
दिन का अभिजित मुहूर्त दोपहर बारह बजकर दो मिनट से बारह बजकर इक्यावन मिनट तक रहेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार अभिजित मुहूर्त को दिन के सबसे शुभ समयों में से एक माना जाता है। इस अवधि में शुभ कार्यों की शुरुआत करना अच्छा माना जाता है।
अमृत काल रात सात बजकर बयालीस मिनट से रात नौ बजकर सोलह मिनट तक रहेगा। इस अवधि को भी शुभ कार्यों और धार्मिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
राहुकाल और अन्य अशुभ समय का रखें ध्यान
पंचांग के अनुसार मंगलवार को राहुकाल दोपहर तीन बजकर तैंतीस मिनट से शाम पांच बजकर सात मिनट तक रहेगा। गुलिक काल दोपहर बारह बजकर छब्बीस मिनट से दोपहर दो बजे तक रहेगा। वहीं यमगंड काल सुबह नौ बजकर उन्नीस मिनट से दस बजकर तिरपन मिनट तक रहेगा।
पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड काल में नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए। हालांकि नियमित धार्मिक कार्य और दैनिक गतिविधियां अपनी परिस्थितियों के अनुसार की जा सकती हैं।
उत्तर दिशा में रहेगा दिशाशूल
एक सितंबर को उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल के दौरान संबंधित दिशा में यात्रा करना शुभ नहीं माना जाता। मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा आवश्यक हो तो पारंपरिक ज्योतिषीय उपायों का सहारा लेने की मान्यता है।
एक नजर में एक सितंबर का पंचांग
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि सुबह सात बजकर बयालीस मिनट तक रहेगी। इसके बाद पंचमी तिथि शुरू होगी। सूर्योदय सुबह छह बजकर बारह मिनट पर और सूर्यास्त शाम छह बजकर चालीस मिनट पर होगा। चंद्रोदय रात नौ बजकर चौदह मिनट पर और अगले दिन चंद्रास्त सुबह दस बजकर पचास मिनट पर होगा।
अभिजित मुहूर्त दोपहर बारह बजकर दो मिनट से बारह बजकर इक्यावन मिनट तक रहेगा। अमृत काल रात सात बजकर बयालीस मिनट से नौ बजकर सोलह मिनट तक रहेगा। राहुकाल दोपहर तीन बजकर तैंतीस मिनट से शाम पांच बजकर सात मिनट तक रहेगा। गुलिक काल दोपहर बारह बजकर छब्बीस मिनट से दोपहर दो बजे तक और यमगंड काल सुबह नौ बजकर उन्नीस मिनट से दस बजकर तिरपन मिनट तक रहेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चतुर्थी और मंगलवार का यह संयोग भगवान गणेश तथा भगवान हनुमान की आराधना के लिए विशेष माना जा सकता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार पूजा पाठ कर दिन की शुरुआत कर सकते हैं।



