शामली। हरियाणवी गायक अंकित बालियान हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, साजिश की परतें खुलती जा रही हैं। पुलिस की जांच में सामने आए घटनाक्रमों को जोड़ने पर संकेत मिल रहे हैं कि अंकित को निशाना बनाने की योजना अचानक नहीं बनी थी, बल्कि करीब दो साल पहले शुरू हुए विवाद के बाद धीरे-धीरे इसे अंजाम देने की तैयारी की गई।

पुलिस जांच के अनुसार, एक गाने को लेकर विवाद के बाद अंकित को विदेश से जान से मारने की धमकी मिली थी। इसके बाद दिसंबर 2025 में कथित तौर पर शूटरों ने सोनीपत पहुंचकर उसकी रेकी की। अंकित की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उसकी कार में GPS लगाने की कोशिश भी किए जाने का दावा है। हालांकि उस समय STF ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
इसके बावजूद कथित साजिश पूरी तरह खत्म नहीं हुई। पुलिस अब पुराने विवाद, धमकी भरे कॉल, शूटरों की गतिविधियों, GPS, मोबाइल फोन, सोशल मीडिया संपर्क और CCTV फुटेज को जोड़कर यह पता लगाने में जुटी है कि अंकित की हत्या की पूरी योजना किसने तैयार की और विदेश में बैठे संदिग्धों ने स्थानीय नेटवर्क तक निर्देश कैसे पहुंचाए।
गाने से शुरू हुआ विवाद, विदेश से मिली जान से मारने की धमकी
पुलिस जांच के मुताबिक अंकित के एक गाने को लेकर विवाद शुरू हुआ था। आरोप है कि इस गाने में टिल्लू ताजपुरिया गिरोह से जुड़े लोगों का जिक्र था। इसी विवाद के बाद गोगी गिरोह से जुड़े राहुल उर्फ भोलू शाहपुरिया के भतीजे चिराग का नाम सामने आया।
पुलिस के अनुसार उस समय चिराग कनाडा में था। उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए अंकित से कथित तौर पर संपर्क किया और गाना बनाकर टिल्लू भाई की बेइज्जती करने का आरोप लगाते हुए उसे जान से मारने की धमकी दी।
धमकी मिलने के बाद अंकित ने सोनीपत पुलिस से शिकायत भी की थी। यही शिकायत अब हत्याकांड की पुरानी कड़ी के तौर पर जांच में शामिल की जा रही है।
दिसंबर 2025 में सोनीपत पहुंचे तीन शूटर
धमकी के कुछ समय बाद दिसंबर 2025 में अंकित की हत्या की कथित योजना को जमीन पर उतारने की कोशिश की गई। पुलिस के मुताबिक तीन शूटर सोनीपत के सेक्टर-14 इलाके में पहुंचे थे। उनका कथित उद्देश्य अंकित की गतिविधियों की रेकी करना और हत्या के लिए सही मौका तलाशना था।
STF को इस गतिविधि की भनक लग गई और कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में अंकित को निशाना बनाने की कथित योजना से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने का दावा किया गया।
उस समय अंकित की जान को खतरा स्पष्ट हो गया था। हालांकि शूटरों की गिरफ्तारी के बाद भी कथित तौर पर अंकित को निशाना बनाने की कोशिश पूरी तरह बंद नहीं हुई।
कार में GPS लगाने की कोशिश ने खोली निगरानी की नई कड़ी
पुलिस के अनुसार 20 दिसंबर को कथित शार्प शूटर मोहित और सुमित अंकित के जिम के बाहर पहुंचे थे। आरोप है कि दोनों ने अंकित की कार में GPS लगाने की कोशिश की, ताकि उसकी लोकेशन और रोजाना की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।
पुलिस का दावा है कि GPS सक्रिय नहीं हो सका और उसे कार में ही छोड़ दिया गया। बाद में पुलिस ने इस GPS को कब्जे में लिया।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि GPS कहां से खरीदा गया था, इसे किसने उपलब्ध कराया, इसे लगाने के निर्देश किसने दिए और अंकित की लोकेशन हासिल करने की योजना के पीछे कौन लोग थे।
STF की गिरफ्तारी के बाद भी नहीं रुकी कथित निगरानी
दिसंबर में शूटरों की गिरफ्तारी के बावजूद अंकित की सुरक्षा को लेकर सवाल बने रहे। मौजूदा जांच में पुलिस को आशंका है कि पहली कोशिश विफल होने के बाद कथित साजिश को नए सिरे से आगे बढ़ाया गया।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि STF की कार्रवाई के बाद विदेश में बैठे संदिग्धों और स्थानीय आरोपियों के बीच संपर्क किस तरह बना रहा। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि नए लोगों को किस माध्यम से निर्देश दिए गए और हत्या के लिए स्थानीय स्तर पर नेटवर्क कैसे तैयार किया गया।
हत्या वाले दिन भी फोन पर धमकी मिलने का दावा
जांच में एक और महत्वपूर्ण कड़ी सामने आई है। पुलिस के अनुसार अंकित की हत्या वाले दिन भी उसे फोन पर धमकी मिली थी। यह कॉल अब हत्याकांड की जांच में अहम साक्ष्य मानी जा रही है।
पुलिस कॉल डिटेल रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से कॉल करने वाले की पहचान करने की कोशिश कर रही है। जांच का फोकस इस बात पर भी है कि धमकी देने वाला व्यक्ति हत्या की साजिश से सीधे जुड़ा था या नहीं।
मोहित और सुमित के मोबाइल से खुलेंगे कई राज
अंकित हत्याकांड में मोहित और सुमित की भूमिका भी जांच के केंद्र में है। पुलिस के अनुसार दोनों कथित तौर पर अंकित की रेकी में शामिल थे और बाद में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए।
अब जांच एजेंसियां दोनों के मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड और संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं। इसके जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि दोनों किन लोगों के संपर्क में थे और उन्हें अंकित की गतिविधियों की जानकारी कौन उपलब्ध करा रहा था।
डिजिटल साक्ष्यों से यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हत्या से पहले और बाद में किन नंबरों तथा सोशल मीडिया अकाउंट्स के बीच संपर्क हुआ।
विदेश में बैठे लोगों पर नेटवर्क संचालित करने का आरोप
अंकित हत्याकांड की जांच में गैंग के कथित विदेश कनेक्शन ने भी पुलिस का ध्यान खींचा है। पुलिस के अनुसार गैंग से जुड़े कुछ लोग अमेरिका और कनाडा में बैठकर सोशल मीडिया के माध्यम से भारत में सक्रिय लोगों के संपर्क में रहते हैं।
पुलिस के मुताबिक सोनीपत के गैंगस्टर जितेंद्र उर्फ गोगी का भतीजा मोंटी मान कनाडा के टोरंटो में रहकर गिरोह से जुड़े लोगों के संपर्क में है। वहीं अंकित हत्याकांड की जिम्मेदारी लेने वाले राहुल उर्फ भोलू शाहपुरिया का भतीजा चिराग भी विदेश में रहकर सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं से संपर्क करता है।
हालांकि इन दावों की वास्तविक भूमिका और हत्याकांड से सीधा संबंध तकनीकी साक्ष्यों तथा आगे की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जोड़ने की जांच
पुलिस के अनुसार विदेश में बैठे गैंग से जुड़े लोग सोशल मीडिया पर कथित तौर पर फर्जी नाम और पहचान का इस्तेमाल कर युवाओं से संपर्क करते हैं। शुरुआत सामान्य बातचीत से होने के बाद उन्हें धीरे-धीरे अपराध की दुनिया में शामिल करने का आरोप है।
जांच एजेंसियों को ऐसे नेटवर्क के बारे में भी जानकारी मिली है, जिसमें युवाओं को हत्या, रंगदारी और लूट जैसी आपराधिक वारदातों के बदले पैसे देने का लालच दिए जाने की बात सामने आई है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क के संपर्क में कौन-कौन से स्थानीय युवक आए और उनमें से किन लोगों ने वास्तव में आपराधिक गतिविधियों में भूमिका निभाई।
इंस्टाग्राम, सिग्नल और स्नैपचैट पर भी नजर
जांच एजेंसियां सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म की गतिविधियों को भी खंगाल रही हैं। पुलिस के अनुसार इंस्टाग्राम, सिग्नल और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क किए जाने के सुराग मिले हैं।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि विदेश में बैठे संदिग्धों और भारत में मौजूद आरोपियों के बीच संपर्क किन माध्यमों से हुआ। इसके साथ ही वारदात से पहले दिए गए निर्देशों और कथित तौर पर साझा की गई जानकारियों की भी पड़ताल की जा रही है।
हत्या के बाद सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ा शक
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि वारदात के बाद गैंग के नाम से सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर जिम्मेदारी लेने की कोशिश की गई। अंकित हत्याकांड के बाद राहुल उर्फ भोलू शाहपुरिया के नाम से सामने आई पोस्ट भी जांच का हिस्सा है।
पुलिस इस पोस्ट की सत्यता, इसे अपलोड करने वाले व्यक्ति और पोस्ट के पीछे मौजूद लोगों की भूमिका की तकनीकी जांच कर रही है। अधिकारियों का फोकस इस बात पर भी है कि पोस्ट वास्तव में किस डिवाइस और किस स्थान से अपलोड की गई थी।
अमेरिका-कनाडा से लेकर संभावित पाकिस्तान कनेक्शन तक जांच
जांच अब केवल स्थानीय आरोपियों तक सीमित नहीं है। पुलिस अमेरिका और कनाडा में बैठे संदिग्धों की सोशल मीडिया गतिविधियों और भारत में मौजूद लोगों से उनके संपर्क की जांच कर रही है।
जांच में संभावित पाकिस्तान कनेक्शन की बात भी सामने आने का दावा किया गया है। पुलिस को कुछ पाकिस्तानी लोगों से बातचीत के सुराग मिलने की जानकारी दी गई है। हालांकि इस कथित कनेक्शन की वास्तविक भूमिका और अंकित हत्याकांड से उसका संबंध अभी जांच का विषय है।
जब तक तकनीकी और अन्य साक्ष्यों से इसकी पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक इसे संभावित कनेक्शन के तौर पर ही देखा जा रहा है।
भोलू शाहपुरिया की भूमिका भी जांच के घेरे में
अंकित हत्याकांड की जांच में राहुल उर्फ भोलू शाहपुरिया का नाम लगातार सामने आ रहा है। वह सोनीपत के शाहपुर का रहने वाला बताया जाता है और उसका नाम गोगी गैंग से जुड़े बदमाशों में लिया जाता रहा है।
पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और रंगदारी जैसे गंभीर मामलों से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। अब पुलिस भोलू, उसके भतीजे चिराग, स्थानीय शूटरों और विदेश में बैठे संदिग्धों के बीच संपर्क की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है।
दो साल पुरानी धमकी से हत्या तक की कड़ियां जोड़ रही पुलिस
अंकित बालियान हत्याकांड की जांच में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या दो साल पहले शुरू हुआ विवाद ही हत्या की वजह बना और क्या विदेश से मिली धमकी के बाद लगातार उसकी निगरानी की जाती रही।
गाने को लेकर विवाद, विदेश से कथित धमकी, दिसंबर 2025 में शूटरों की गिरफ्तारी, कार में GPS लगाने की कोशिश, बाद में कथित रेकी, हत्या वाले दिन मिली धमकी और वारदात के बाद सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने की कोशिश जैसे घटनाक्रम अब जांच की प्रमुख कड़ियां बन गए हैं।
पुलिस इन सभी घटनाओं को कॉल डिटेल, मोबाइल डेटा, सोशल मीडिया गतिविधियों, GPS और CCTV फुटेज से जोड़कर कथित साजिश के मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अंकित की हत्या के पीछे वास्तव में कौन था और विदेश में बैठे लोगों की इसमें कितनी भूमिका थी।


