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नोएडा के डूब क्षेत्र में 13 हजार बिजली कनेक्शन कटे, मचा हड़कंप; अब किसानों की महापंचायत से बढ़ेगा दबाव

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नोएडा। नोएडा के डूब क्षेत्र में विकसित की गई अवैध कॉलोनियों में बिजली कनेक्शन काटे जाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार की सख्ती के बाद विद्युत विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इन इलाकों में 13 हजार से अधिक बिजली कनेक्शन काट दिए हैं। बिजली आपूर्ति बंद होने के बाद हजारों परिवारों के सामने रोजमर्रा की परेशानियां खड़ी हो गई हैं। वहीं, कार्रवाई के विरोध में स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की आवाज भी तेज होने लगी है।

मामले में अब किसानों की भी एंट्री होने जा रही है। बिजली कनेक्शन काटे जाने और डूब क्षेत्र में रहने वाले लोगों की समस्याओं को लेकर रविवार को महापंचायत आयोजित की जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन का रूप ले सकता है।

13 हजार से ज्यादा कनेक्शन कटने से बढ़ी परेशानी

नोएडा के डूब क्षेत्र में लंबे समय से बड़ी संख्या में अनधिकृत कॉलोनियां विकसित होती रही हैं। इन कॉलोनियों में हजारों परिवार वर्षों से रह रहे हैं। सरकार और प्राधिकरण की ओर से अवैध निर्माण तथा अनधिकृत कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई के बीच अब विद्युत कनेक्शनों पर भी सख्ती की गई है।

बड़ी संख्या में बिजली कनेक्शन काटे जाने के बाद स्थानीय निवासियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लोगों का कहना है कि अचानक बिजली आपूर्ति बंद होने से उनके सामने रोजमर्रा के जरूरी काम प्रभावित होने लगे हैं।

बच्चों की पढ़ाई से लेकर कारोबार तक पर असर

बिजली कटौती का असर केवल रोशनी तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोगों के मुताबिक घरों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। पेयजल के लिए बिजली से चलने वाले उपकरणों पर निर्भर परिवारों की परेशानी भी बढ़ गई है।

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घरेलू कामकाज के अलावा छोटे स्तर पर कारोबार करने वाले लोगों को भी बिजली आपूर्ति बंद होने से नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में प्रभावित परिवार सरकार और विद्युत विभाग से राहत की मांग कर रहे हैं।

जनप्रतिनिधियों ने भी उठाई आवाज

बिजली कनेक्शन काटे जाने के विरोध में कई जनप्रतिनिधियों ने भी सरकार और संबंधित विभाग के सामने विद्युत व्यवस्था बहाल करने की मांग उठाई है।

जनप्रतिनिधियों का तर्क है कि डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण का मुद्दा अपनी जगह है, लेकिन वर्षों से वहां रह रहे परिवारों को मूलभूत सुविधाओं से पूरी तरह वंचित करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। उनका कहना है कि प्रशासन को अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के साथ प्रभावित परिवारों की व्यावहारिक समस्याओं पर भी विचार करना चाहिए।

अब किसानों की महापंचायत, गरमाएगा मामला

बिजली कनेक्शन काटे जाने के मुद्दे पर अब किसानों का समर्थन भी मिलने की संभावना है। इसी को लेकर रविवार को महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है। इसमें डूब क्षेत्र की कॉलोनियों में रहने वाले लोगों की समस्याओं और बिजली कनेक्शन काटे जाने की कार्रवाई पर चर्चा होगी।

महापंचायत में किसानों और स्थानीय निवासियों की ओर से आगे की रणनीति तैयार किए जाने की संभावना है। प्रशासन और सरकार पर दबाव बनाने के लिए धरना प्रदर्शन का रास्ता अपनाए जाने की भी चर्चा है।

महापंचायत के बाद आंदोलन की तैयारी संभव

रविवार को होने वाली महापंचायत को इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि इसमें बिजली आपूर्ति बहाल करने और प्रभावित लोगों को राहत देने की मांग को लेकर कोई बड़ा फैसला लिया जाता है तो आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन तेज हो सकते हैं।

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स्थानीय लोगों और किसानों की ओर से संयुक्त रूप से सरकार और प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाए जाने की स्थिति में यह मामला नोएडा में बड़ा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

सरकार की नजर अवैध कॉलोनियों पर

दूसरी ओर सरकार और प्रशासन डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण के खिलाफ लगातार सख्त रुख अपना रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि यमुना के डूब क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण और अवैध कॉलोनियों का विस्तार भविष्य में गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।

प्रशासन के मुताबिक बाढ़ या जलभराव की स्थिति में इन इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है। डूब क्षेत्र में निर्माण को लेकर पर्यावरणीय और आपदा संबंधी जोखिम भी लगातार चिंता का विषय रहे हैं।

बिजली कनेक्शन काटने पर आमने-सामने सरकार और स्थानीय लोग

एक ओर प्रशासन डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण और अनधिकृत कॉलोनियों के विस्तार पर रोक लगाने के लिए सख्ती कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से इन कॉलोनियों में रह रहे परिवार मूलभूत सुविधाओं से वंचित किए जाने का विरोध कर रहे हैं।

13 हजार से अधिक बिजली कनेक्शन काटे जाने के बाद दोनों पक्षों के बीच टकराव की स्थिति और बढ़ती दिखाई दे रही है। अब रविवार की महापंचायत पर सबकी नजरें टिकी हैं। महापंचायत में लिए जाने वाले फैसले से यह तय होगा कि मामला बातचीत से आगे बढ़ता है या फिर आंदोलन और धरना प्रदर्शन का रास्ता अपनाया जाता है।

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