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जेपीएनआईसी को निजी हाथों में सौंपने पर अखिलेश का योगी सरकार पर हमला, बोले सरकार है या दुकानदार?

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लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र को निजी हाथों में सौंपने के योगी सरकार के फैसले पर तीखा हमला बोला है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है। उन्होंने सरकार पर निजीकरण और कमीशन के जरिए भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया।

अखिलेश यादव ने एक वीडियो जारी कर योगी सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब प्रदेश सरकार ने लखनऊ के जेपीएनआईसी को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय कैबिनेट में ले लिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार को अब ठेके पर देना या बेचना ही बाकी रह गया है।

अखिलेश का तंज, भाजपा सरकार है या दुकानदार?

अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा, “भाजपा सरकार है या दुकानदार? अब प्रदेश सरकार ने लखनऊ के जेपीएनआईसी को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय कैबिनेट में ले लिया है। अब तो बस सरकार को ही ठेके पर देना या बेचना बचा है।”

सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण के रास्ते पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने निजीकरण की प्रक्रिया को लेकर सरकार की नीयत और पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए।

30 साल की लीज पर निजी कंपनियों को सौंपा जाएगा जेपीएनआईसी

योगी सरकार ने जेपीएनआईसी के संचालन को निजी क्षेत्र को सौंपने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में जेपीएनआईसी को वृंदावन बाटलर्स प्राइवेट लिमिटेड और राकवुड होटल्स एंड रिजार्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को 30 वर्ष की लीज पर देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

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सरकार का कहना है कि लंबे समय से बंद पड़े इस महत्वाकांक्षी केंद्र को निजी संचालन के जरिए उपयोग में लाया जाएगा। निजी संचालक के पास केंद्र के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी होगी।

हर साल छह करोड़ रुपये लीज रेंट, पांच फीसदी बढ़ोतरी का प्रावधान

कैबिनेट के फैसले के मुताबिक चयनित कंपनी लखनऊ विकास प्राधिकरण को हर वर्ष छह करोड़ रुपये लीज रेंट देगी। इसमें प्रत्येक वर्ष पांच प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान रखा गया है।

जेपीएनआईसी के संचालन के लिए चयनित कंपनी से 10.11 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि और 25 करोड़ रुपये की परफॉर्मेंस गारंटी भी ली जाएगी। परियोजना पर अब तक 821.74 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

सरकार को ब्याज सहित 857 करोड़ रुपये वापस करेगा एलडीए

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के अनुसार, लखनऊ विकास प्राधिकरण 30 वर्षों में ब्याज सहित 857 करोड़ रुपये प्रदेश सरकार को वापस करेगा। लीज से प्राप्त धनराशि को ब्याज सहित संकलित कर एलडीए के माध्यम से प्रदेश सरकार को लौटाया जाएगा।

सरकार की ओर से यह भी बताया गया है कि जेपीएनआईसी को सरकारी आयोजनों के लिए वर्ष में 50 दिन नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। यानी निजी संचालन के बावजूद सरकारी कार्यक्रमों के लिए केंद्र का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

35 साल के प्रस्ताव से बदलकर 30 साल की लीज

जेपीएनआईसी के संचालन के लिए पहले 35 वर्ष का अनुबंध प्रस्तावित किया गया था। अब सहमति के आधार पर पहली बार 30 वर्ष और दूसरी बार 25 वर्ष तक अनुबंध बढ़ाने का प्रावधान रखा गया है।

इस व्यवस्था के तहत परियोजना के दीर्घकालिक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी निजी संचालक के पास रहेगी। सरकार की योजना लंबे समय से बंद पड़े केंद्र को दोबारा संचालित करने की है।

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सपा सरकार के कार्यकाल में तैयार हुआ था जेपीएनआईसी

गोमतीनगर में स्थित जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र का निर्माण समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में कराया गया था। परियोजना पर अब तक 821.74 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।

लंबे समय से जेपीएनआईसी के संचालन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। अब सरकार ने इसे निजी क्षेत्र के माध्यम से संचालित करने का रास्ता साफ कर दिया है।

त्रिस्तरीय सोसाइटी भंग, एलडीए को हस्तांतरित हुआ केंद्र

सरकार पहले ही जेपीएनआईसी के संचालन के लिए गठित त्रिस्तरीय सोसाइटी को भंग कर चुकी है। इसके बाद परियोजना को लखनऊ विकास प्राधिकरण को हस्तांतरित किया गया। अब एलडीए के माध्यम से जेपीएनआईसी का निजी संचालन किया जाएगा।

सरकार का तर्क है कि निजी संचालन से लंबे समय से बंद पड़े केंद्र का बेहतर उपयोग और रखरखाव संभव होगा।

निजीकरण को लेकर सियासी टकराव तेज

जेपीएनआईसी को निजी हाथों में सौंपने के फैसले के साथ ही उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर भाजपा और समाजवादी पार्टी आमने सामने हैं। सरकार जहां इसे बंद पड़ी संपत्ति को उपयोग में लाने और उसके बेहतर संचालन की व्यवस्था के तौर पर देख रही है, वहीं अखिलेश यादव ने इसे सार्वजनिक संपत्ति के निजीकरण से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा है।

अखिलेश यादव के बयान के बाद जेपीएनआईसी को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। एक तरफ सरकार निजी संचालन के जरिए परियोजना को सक्रिय करने की बात कह रही है, वहीं सपा इसे भाजपा सरकार की निजीकरण नीति का हिस्सा बता रही है।

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