लखनऊ। पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राजधानी लखनऊ स्थित लोकभवन में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन राष्ट्रहित, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनसेवा के लिए समर्पित रहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के ऐसे अजातशत्रु व्यक्तित्व थे, जिन्होंने करीब छह दशक के सार्वजनिक जीवन में राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने राजनीति में शुचिता, लोकतांत्रिक मर्यादा और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता की ऐसी मिसाल कायम की, जिसे देश लंबे समय तक याद रखेगा।
अटल जी की राजनीति में विरोध था, विद्वेष नहीं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी का सार्वजनिक जीवन निर्विवाद और निष्कलंक रहा। उनका जीवन केवल सत्ता और राजनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि राष्ट्र प्रथम की भावना उनके हर निर्णय और जिम्मेदारी में दिखाई देती थी।
उन्होंने कहा कि अटल जी की राजनीति में विरोध जरूर था, लेकिन विद्वेष नहीं था। उनके भाषणों में ओज और प्रभाव था, लेकिन उनकी भाषा में हमेशा मर्यादा बनी रही। यही वजह थी कि उन्हें भारतीय राजनीति का अजातशत्रु कहा गया।
योगी ने कहा कि अटल जी ने लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के साथ राजनीतिक असहमति का सम्मान करने की परंपरा को भी आगे बढ़ाया। उनके व्यक्तित्व में विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता के साथ लोकतांत्रिक सहिष्णुता का अद्भुत समन्वय दिखाई देता था।
दल से ऊपर देश को रखा
मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने हमेशा दल से ऊपर देश को महत्व दिया। सांसद, विदेश मंत्री, भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष तथा प्रधानमंत्री जैसे विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए उन्होंने राष्ट्रसेवा को अपना सर्वोच्च ध्येय बनाए रखा।
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि अटल जी ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में जम्मू कश्मीर में धारा 370 के विरोध में चलाए गए सत्याग्रह से की थी। इसके बाद उन्होंने भारतीय राजनीति में राष्ट्रवादी नेता के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल जी के लिए विचारधारा महत्वपूर्ण थी, लेकिन राष्ट्रहित हमेशा सर्वोपरि रहा। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में इसी भावना को प्राथमिकता दी।
आपातकाल में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आपातकाल के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। लोकतांत्रिक संस्थाओं और मूल्यों की मजबूती के लिए उनका संघर्ष उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय रहा।
उन्होंने कहा कि 1962, 1965 और 1971 के युद्ध के दौरान भी अटल जी ने एक जिम्मेदार सांसद के रूप में सरकार के साथ खड़े होकर राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर देश की एकजुटता को मजबूत किया। राजनीतिक मतभेदों को उन्होंने कभी राष्ट्रहित से ऊपर नहीं आने दिया।
प्रधानमंत्री के रूप में देश को दी नई दिशा
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत की सामरिक और आर्थिक शक्ति को नई दिशा देने का काम किया। पोखरण परमाणु परीक्षण के माध्यम से भारत ने दुनिया के सामने अपनी सामरिक क्षमता का प्रदर्शन किया।
उन्होंने कहा कि अटल सरकार के कार्यकाल में स्वर्णिम चतुर्भुज जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं ने देश के बुनियादी ढांचे को नई गति दी। अटल जी की दूरदृष्टि ने भारत के विकास के लिए मजबूत आधार तैयार किया।
राष्ट्रसेवा और जनकल्याण ही राजनीति का अंतिम उद्देश्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व, कृतित्व और राष्ट्र के प्रति समर्पण आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि राजनीति का अंतिम उद्देश्य सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा और जनकल्याण होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अटल जी के आदर्शों से प्रेरणा लेकर भारत को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
अटल जी की स्मृतियों को किया नमन
पुण्यतिथि के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकभवन में अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस दौरान उनके राष्ट्र के प्रति योगदान और सार्वजनिक जीवन में स्थापित आदर्शों को याद किया गया।
अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन भारतीय लोकतंत्र में राजनीतिक शुचिता, संवाद, राष्ट्रहित और जनसेवा की एक ऐसी विरासत छोड़ गया है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी बनी रहेगी।



