नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश के बैंकिंग सेक्टर की भूमिका को और व्यापक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाने का फैसला किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि जल्द ही एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया जाएगा, जो यह तय करेगी कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में देश का बैंकिंग सेक्टर किस तरह प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों के दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद उसकी सिफारिशों पर तेजी से अमल किया जाएगा। सरकार का जोर ऐसी वित्तीय व्यवस्था तैयार करने पर है, जो देश की दीर्घकालिक आर्थिक जरूरतों और विकसित भारत के विजन के अनुरूप हो।
2047 दूर नहीं, बैंकिंग सेक्टर को अभी से तैयार करने पर जोर
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य अब बहुत दूर नहीं है। उन्होंने कहा कि अभी वर्ष 2026 चल रहा है और देश के पास इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दो दशक से भी कम समय बचा है।
उन्होंने कहा कि इसी को ध्यान में रखते हुए बैंकिंग सेक्टर की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करने की जरूरत है। उच्च स्तरीय कमेटी इस बात पर विचार करेगी कि भारत की आर्थिक विकास यात्रा में बैंक किस तरह अधिक प्रभावी योगदान दे सकते हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद सरकार उसकी सिफारिशों पर तेजी से काम करेगी, ताकि बैंकिंग सेक्टर को देश के विकास के अगले चरण के लिए तैयार किया जा सके।
मजबूत बैंकिंग व्यवस्था को विकास की रफ्तार बढ़ाने में लगाने की तैयारी
वित्त मंत्री ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बेहतर होती वित्तीय स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि बैंकिंग सेक्टर में एसेट क्वालिटी में मजबूत सुधार देखने को मिला है। यह स्थिति अब बैंकिंग सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए अनुकूल अवसर प्रदान करती है।
उन्होंने सरकारी बैंकों से अपनी मजबूत बैलेंस शीट का इस्तेमाल आर्थिक विकास के अगले चरण को गति देने के लिए करने को कहा। साथ ही बैंकों को भविष्य की वित्तीय जरूरतों के अनुरूप अपनी रणनीति तैयार करने की जरूरत बताई।
सरकार का उद्देश्य ऐसी वित्तीय प्रणाली विकसित करना है, जो आर्थिक विकास को मजबूती देने के साथ विकसित भारत 2047 के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप काम कर सके।
रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा एनपीए
वित्त मंत्री ने बैंकिंग सेक्टर में गैर निष्पादित परिसंपत्तियों यानी एनपीए में आई बड़ी गिरावट को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि एनपीए के मौजूदा स्तर पर होने के कारण बैंकिंग सेक्टर के पास सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत आधार मौजूद है।
वित्तीय सेवा विभाग के संजय लोहिया ने भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की एसेट क्वालिटी में हुए सुधार के आंकड़े साझा किए। उनके मुताबिक सकल एनपीए मार्च 2018 में 14.6 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर था, जो घटकर मार्च 2026 में 1.93 प्रतिशत के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है।
इसी अवधि में शुद्ध एनपीए भी आठ प्रतिशत से घटकर 2.39 प्रतिशत रह गया है। सरकार के अनुसार बैंकिंग सेक्टर की बेहतर एसेट क्वालिटी वित्तीय व्यवस्था को अधिक मजबूत आधार प्रदान कर रही है।
बैंकिंग नेतृत्व के सुझाव कमेटी के लिए होंगे अहम
निर्मला सीतारमण ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर के शीर्ष नेतृत्व से मिलने वाले सुझाव प्रस्तावित उच्च स्तरीय कमेटी के लिए महत्वपूर्ण इनपुट साबित हो सकते हैं।
उन्होंने बैंक प्रमुखों और वित्तीय संस्थानों के शीर्ष अधिकारियों से भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक और लागू किए जा सकने वाले सुझाव देने को कहा। सरकार का मानना है कि बैंकिंग सेक्टर के अनुभव और सुझावों के आधार पर ऐसी नीतियां तैयार की जा सकती हैं, जो आर्थिक विकास को और गति दें।
वित्त मंत्री ने संकेत दिया कि कमेटी की सिफारिशों के बाद बैंकिंग सेक्टर को भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने की बड़ी जिम्मेदारी के लिए तैयार रहना होगा।
युवाओं के लिए वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर
वित्त मंत्री ने देश की युवा आबादी को बैंकिंग सेक्टर की प्राथमिकताओं में शामिल करने पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत की करीब 29 प्रतिशत आबादी 15 से 29 वर्ष के आयु वर्ग में आती है।
उन्होंने बैंकों से युवाओं की जरूरतों के अनुरूप वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की अपील की। इनमें शिक्षा ऋण, उद्यमिता के लिए वित्तीय सहायता और निवेश से जुड़े उत्पाद प्रमुख रूप से शामिल हैं।
वित्त मंत्री के मुताबिक युवाओं को वित्तीय संसाधनों तक बेहतर पहुंच मिलने से शिक्षा, रोजगार, स्टार्टअप और उद्यमिता के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है।
एजुकेशन लोन से उद्यमिता तक बढ़े वित्तीय अवसर
सीतारमण ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर को युवाओं के लिए केवल पारंपरिक बैंकिंग सेवाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बदलती आर्थिक जरूरतों के अनुरूप वित्तीय उत्पाद और सेवाएं विकसित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने बैंकों से ऐसे नए और व्यावहारिक विचार सामने लाने को कहा, जिनके जरिए देश में वित्त पोषण की नई जरूरतों को पूरा किया जा सके। खासतौर पर शिक्षा और उद्यमिता के क्षेत्र में युवाओं को आसान वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के सामने बड़ी जिम्मेदारी
सरकार के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक देश की आर्थिक विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनकी मजबूत होती वित्तीय स्थिति का इस्तेमाल बुनियादी ढांचे, उद्योग, रोजगार, उद्यमिता और आम लोगों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में किया जा सकता है।
वित्त मंत्री ने बैंकों को अपनी मजबूत स्थिति का लाभ उठाते हुए भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने को कहा। साथ ही बैंकिंग सुधारों को आगे बढ़ाने और वित्तीय प्रणाली को अधिक सक्षम बनाने पर जोर दिया।
विकसित भारत के लक्ष्य में वित्तीय क्षेत्र बनेगा मजबूत आधार
सरकार की योजना विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित रखने की नहीं है, बल्कि इसके लिए मजबूत वित्तीय व्यवस्था को भी जरूरी आधार माना जा रहा है। बैंकिंग सेक्टर इस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उच्च स्तरीय कमेटी के गठन के बाद बैंकिंग सेक्टर की भूमिका, सुधारों की दिशा, वित्तीय जरूरतों और भविष्य की रणनीति को लेकर व्यापक विचार विमर्श होने की उम्मीद है। कमेटी की सिफारिशें आने के बाद सरकार की ओर से इस दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।
मजबूत बैलेंस शीट, घटते एनपीए और बढ़ती वित्तीय क्षमता के बीच अब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से देश की विकास यात्रा में पहले से बड़ी भूमिका निभाने की उम्मीद की जा रही है। आने वाले वर्षों में बैंकिंग सेक्टर किस तरह युवाओं, उद्योगों और आम नागरिकों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करता है, यह विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में अहम साबित हो सकता है।



