नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की साइबर थाना, उत्तर-पूर्व जिला टीम ने ब्लू डार्ट कूरियर डिलीवरी के नाम पर 2.47 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी साइबर ठगी की रकम निकालने के लिए ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ का इस्तेमाल करते थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद अरबाज दानियाल उर्फ लब्बू, जिमी बथला, अब्दुल वदूद और अनिकेत वर्मा के रूप में हुई है।
डिप्टी जनरल मैनेजर को बनाया गया था शिकार
पुलिस के मुताबिक, बाबरपुर निवासी और दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड में डिप्टी जनरल मैनेजर सतेंद्र ने 16 जून को साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में बताया गया कि उन्हें एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को ब्लू डार्ट कूरियर का कर्मचारी बताया। आरोपी ने पार्सल डिलीवरी का झांसा देकर उन्हें एक नंबर डायल करने और मोबाइल में कॉल व एसएमएस फॉरवर्डिंग सक्रिय करने के लिए कहा।
जैसे ही कॉल और मैसेज फॉरवर्डिंग चालू हुई, बैंकिंग ओटीपी सहित सभी इनकमिंग कॉल और एसएमएस धोखेबाजों के नियंत्रण वाले नंबर पर पहुंचने लगे। इसके बाद आरोपियों ने पीड़ित के बैंक खाते से 2.47 लाख रुपये निकाल लिए।
मनी ट्रेल से खुला पूरा नेटवर्क
साइबर पुलिस ने वित्तीय विश्लेषण, तकनीकी निगरानी और फील्ड इंटेलिजेंस के जरिए जांच शुरू की। मनी ट्रेल की जांच में पता चला कि ठगी की रकम में से 80 हजार रुपये मोहम्मद अरबाज दानियाल के नैनीताल बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे।
जांच में सामने आया कि यह बैंक खाता साइबर अपराध से प्राप्त रकम को प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।
उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में छापेमारी
तकनीकी विश्लेषण और बैंक रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस ने उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर और उत्तर प्रदेश के लखनऊ, मिर्जापुर तथा सुल्तानपुर में एक साथ छापेमारी की।
साइबर थाना, उत्तर-पूर्व जिला के इंस्पेक्टर राहुल कुमार की निगरानी में हुई कार्रवाई में चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
टेलीग्राम के जरिए बेची जाती थी बैंक खातों की जानकारी
पुलिस जांच में पता चला कि 11 जुलाई को मोहम्मद अरबाज दानियाल और जिमी बथला को काशीपुर से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में अरबाज ने बताया कि उसने 50 हजार रुपये के बदले बैंक खाता खुलवाया था। बाद में जिमी बथला ने यह खाता एक लाख रुपये में अब्दुल वदूद को सौंप दिया।
आगे की जांच में मिर्जापुर से अब्दुल वदूद और सुल्तानपुर से अनिकेत वर्मा को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, अब्दुल वदूद ने बैंक खाते की जानकारी अनिकेत वर्मा को दी, जिसने बाद में टेलीग्राम के माध्यम से सक्रिय साइबर ठगों को यह जानकारी बेच दी।
नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश जारी
पुलिस का कहना है कि पूरे साइबर फ्रॉड सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की पहचान की जा रही है। साथ ही अपराध से अर्जित धन और उससे जुड़े अन्य बैंक खातों की भी जांच जारी है।



