नई दिल्ली। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘दिल्ली (राइट ऑफ सिटिजन टू टाइम बाउंड एंड ईज़ ऑफ डिलीवरी ऑफ सर्विसेज) बिल, 2026’ को मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि इस नए कानून का उद्देश्य सरकारी सेवाओं की डिलीवरी को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाना है।
यह विधेयक लागू होने के बाद नागरिकों को तय समय के भीतर सरकारी सेवाएं प्राप्त करना कानूनी अधिकार होगा। यह नया कानून वर्ष 2011 के ‘राइट टू सर्विस’ कानून का स्थान लेगा।
समयबद्ध सरकारी सेवाएं होंगी कानूनी अधिकार
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए कहा कि यह कानून नागरिकों को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। इसके तहत सरकारी सेवाएं तय समय-सीमा के भीतर उपलब्ध कराना प्रशासन की कानूनी जिम्मेदारी होगी।
सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से आम लोगों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और सेवाएं अधिक तेज़ी से उपलब्ध होंगी।
पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल
नए कानून के तहत सरकारी सेवाओं की पूरी प्रक्रिया एंड-टू-एंड डिजिटल होगी। आवेदन से लेकर सेवा उपलब्ध कराने तक की पूरी व्यवस्था ऑनलाइन संचालित की जाएगी।
यदि किसी सेवा में निर्धारित समय से अधिक देरी होती है तो मामला स्वतः (ऑटोमैटिक एस्केलेशन) संबंधित उच्च अधिकारी के पास पहुंच जाएगा, जिससे लंबित मामलों का समय पर निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।
शिकायत निवारण और आयोग का होगा गठन
विधेयक में नागरिकों की शिकायतों के समाधान के लिए एक स्वतंत्र शिकायत निवारण तंत्र बनाने का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा दिल्ली राइट टू सर्विस कमीशन का गठन किया जाएगा, जो कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करेगा। अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है।
पारदर्शी और नागरिक केंद्रित शासन पर जोर
दिल्ली सरकार का कहना है कि यह कानून पूरी तरह पारदर्शी, तकनीक आधारित और नागरिक केंद्रित प्रशासनिक व्यवस्था को बढ़ावा देगा। सरकार के अनुसार यह पहल ‘सेवा ही संकल्प’ की भावना से प्रेरित है और ‘विकसित दिल्ली’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सरकार का उद्देश्य है कि आम नागरिकों के साथ-साथ व्यापार और उद्योग से जुड़े लोगों को भी सभी सरकारी सेवाएं तय समय-सीमा के भीतर कानूनी रूप से उपलब्ध कराई जाएं।



