Home » उत्तर प्रदेश » बागपत में शिक्षक दिवस पर शिक्षकों का सम्मान, बाल विवाह उन्मूलन की वैश्विक मुहिम से कराया परिचित

बागपत में शिक्षक दिवस पर शिक्षकों का सम्मान, बाल विवाह उन्मूलन की वैश्विक मुहिम से कराया परिचित

Facebook
Twitter
WhatsApp

बागपत। पूर्व राष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के अवसर पर शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में शिक्षक दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर ग्रामीण समाज विकास केंद्र एवं Just Rights for Children (JRC) परियोजना की ओर से शिक्षकों को बाल विवाह की रोकथाम, बाल अधिकारों और बाल संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गोरखपुर में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक दिवस कार्यक्रम का सजीव प्रसारण भी कलेक्ट्रेट सभागार में किया गया।

कार्यक्रम में जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने जनपद के शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। शिक्षक विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान देने का काम नहीं करते, बल्कि उनके व्यक्तित्व, संस्कार और भविष्य को दिशा देने का भी कार्य करते हैं।

जिलाधिकारी ने कहा कि शिक्षा बेहतर कल की नींव है। शिक्षा के माध्यम से ही अच्छे समाज और मजबूत राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है। इसलिए शिक्षा के प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश का भविष्य शिक्षकों के हाथ में है। शिक्षक विद्यार्थियों को जिस प्रकार का ज्ञान, संस्कार और दिशा देंगे, उसी के अनुरूप आने वाली पीढ़ी समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएगी।

बाल विवाह के खिलाफ शिक्षकों की भूमिका अहम

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण समाज विकास केंद्र एवं Just Rights for Children (JRC) परियोजना के माध्यम से शिक्षकों को बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की जानकारी दी गई। शिक्षकों को बताया गया कि बाल विवाह की रोकथाम में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे बच्चों के साथ लगातार संपर्क में रहते हैं और उनके परिवार एवं सामाजिक परिवेश से भी जुड़े होते हैं।

ALSO READ THIS :  कानपुर में गंगा किनारे मिला 5 फीट लंबा मृत मगरमच्छ: सिर पर गहरे जख्म देख भड़के लोग, अवैध शिकारियों पर हत्या की आशंका

शिक्षकों को बताया गया कि 27 नवंबर को “International Day for the Elimination of Child, Early and Forced Marriage” के रूप में स्थापित किया गया है। इसे बाल विवाह, कम उम्र में विवाह और जबरन विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एक ऐतिहासिक पहल बताया गया।

कार्यक्रम में मेहर चंद ने कहा कि 27 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय बाल विवाह उन्मूलन दिवस घोषित होना भारत के लिए गौरव की बात है। भारत ने बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ दुनिया को एक नई राह दिखाई है। उन्होंने कहा कि इस वैश्विक उपलब्धि के पीछे भारत से उठी सामूहिक आवाज और Just Rights for Children अभियान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उन्होंने कहा कि 27 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में स्थापित किया जाना केवल कैलेंडर में एक नया दिवस जुड़ना नहीं है, बल्कि बाल विवाह मुक्त दुनिया के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके माध्यम से दुनिया भर में बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों को मजबूती मिलेगी।

बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा पर दिया जोर

वक्ताओं ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के शिक्षा के अधिकार, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के अधिकार को प्रभावित करता है। इसे समाप्त करने के लिए कानून के साथ-साथ समाज में जागरूकता और सामूहिक भागीदारी जरूरी है। शिक्षकों से अपील की गई कि वे विद्यालयों के साथ-साथ अपने आसपास के समुदाय में भी बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाएं।

शिक्षकों को यह भी बताया गया कि यदि उनके संज्ञान में बाल विवाह की कोई संभावित घटना आती है तो वे संबंधित तंत्र को इसकी सूचना देकर समय रहते बच्चे का विवाह रोकने में मदद कर सकते हैं। बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें शिक्षा से जोड़कर रखना भी बाल विवाह की रोकथाम का महत्वपूर्ण माध्यम है।

ALSO READ THIS :  उत्तराखंड में भारी बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए प्रशासन का फैसला, स्कूलों में छुट्टी, ऑनलाइन होगी पढ़ाई

कार्यक्रम में कहा गया कि शिक्षक केवल शिक्षा देने वाले व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव के वाहक भी हैं। यदि शिक्षक बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता अभियान को आगे बढ़ाते हैं तो इसके दूरगामी परिणाम सामने आ सकते हैं।

शिक्षा से संस्कार और राष्ट्र निर्माण तक का संदेश

शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों को उनके दायित्वों का भी स्मरण कराया गया। जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार देना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि ज्ञान, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी से ही एक बेहतर नागरिक का निर्माण होता है और ऐसे नागरिक ही आगे चलकर मजबूत राष्ट्र की नींव रखते हैं।

कार्यक्रम में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को याद किया गया। उपस्थित शिक्षकों ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने, विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए कार्य करने और बाल अधिकारों की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गोरखपुर में आयोजित शिक्षक दिवस कार्यक्रम के सजीव प्रसारण के बाद जनपद के शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में अधिकारियों, शिक्षकों एवं संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान शिक्षक दिवस के सम्मान और बाल विवाह उन्मूलन के संदेश को एक-दूसरे से जोड़ते हुए बच्चों के सुरक्षित, शिक्षित और बेहतर भविष्य के निर्माण पर जोर दिया गया।

[wonderplugin_slider id=1]

टॉप स्टोरी

ज़रूर पढ़ें