नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने नीट परीक्षा और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी द्वारा किए गए खुलासों से सरकार की बौखलाहट साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार परीक्षा प्रणाली को संभालने में पूरी तरह विफल रही है और शिक्षा व्यवस्था लगातार संकट में है।
जयराम रमेश ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि जेपी नड्डा की प्रेस कॉन्फ्रेंस राहुल गांधी के सवालों का जवाब देने की कोशिश थी। उन्होंने लिखा कि सरकार को विपक्ष पर उंगली उठाने के बजाय अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उनके मुताबिक, केंद्रीय मंत्री को पहले शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रबंधन में हुई कथित विफलताओं पर जवाब देना चाहिए।
एनटीए की कार्यप्रणाली पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की स्थापना केंद्र सरकार ने देशभर की प्रमुख परीक्षाओं के संचालन के लिए की थी। उनका आरोप है कि सरकार ने जानबूझकर परीक्षा प्रणाली का केंद्रीकरण किया और विश्वविद्यालयों तथा राज्यों पर एनटीए की व्यवस्था अपनाने का दबाव बनाया।
जयराम रमेश ने दावा किया कि एनटीए अपने गठन के बाद से लगातार विवादों में रही है और कई अवसरों पर परीक्षा संचालन में गंभीर कमियां सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 के बाद सरकार ने सुधारों का वादा किया था और इसके लिए के. राधाकृष्णन समिति का गठन किया गया था, जिसने 101 सुधार संबंधी सिफारिशें दी थीं। लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि इन सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एनटीए में महानिदेशक का महत्वपूर्ण पद लंबे समय तक नियमित नियुक्ति के बजाय अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चलता रहा, जिससे एजेंसी की कार्यप्रणाली प्रभावित हुई।
पेपर लीक और छात्रों के आंदोलन का मुद्दा उठाया
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि एनटीए के कार्यकाल में कई बार पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि नीट-यूजी 2026, यूजीसी-नेट समाजशास्त्र और यूजीसी-नेट अंग्रेजी परीक्षा को लेकर भी अनियमितताओं की खबरें सामने आईं।
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि जब छात्र कथित पेपर लीक और शिक्षा नीतियों के विरोध में सड़कों पर उतरे तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज, वॉटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने सरकार से छात्रों की चिंताओं का समाधान करने की मांग की।
सरकार पर व्यापक शिक्षा नीति को लेकर निशाना
जयराम रमेश ने कहा कि नीट-यूजी 2026 का कथित पेपर लीक केवल एक घटना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में गहराई तक मौजूद समस्याओं का संकेत है। उनके अनुसार छात्रों का आक्रोश केवल परीक्षा संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों और प्रशासनिक कार्यशैली के खिलाफ भी है।
हालांकि, केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की ओर से इन आरोपों पर अलग-अलग समय पर अपना पक्ष रखा गया है। मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जांच और सरकारी कार्रवाई जारी है।



