Home » उत्तर प्रदेश » एक लाख सरकारी नौकरियों के ऐलान पर मायावती का सवाल, बोलीं चुनावी कदम न बन जाए, पेपरलीक और भ्रष्टाचार से मुक्त हों भर्तियां

एक लाख सरकारी नौकरियों के ऐलान पर मायावती का सवाल, बोलीं चुनावी कदम न बन जाए, पेपरलीक और भ्रष्टाचार से मुक्त हों भर्तियां

Facebook
Twitter
WhatsApp

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अगले छह महीने में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की घोषणा पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने इसे देर से उठाया गया सही कदम बताते हुए आशंका जताई कि विधानसभा चुनाव से पहले की गई यह घोषणा कहीं चुनावी कदम बनकर न रह जाए।

मायावती ने गुरुवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सरकार की ओर से अगले छह महीने में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की घोषणा हालांकि देर से उठाया गया सही कदम है, लेकिन यह चुनावी कदम अधिक लगता है।

उन्होंने कहा कि भर्तियां समय से पूरी होनी चाहिए और पूरी नियुक्ति प्रक्रिया पेपरलीक तथा भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से मुक्त होनी चाहिए, ताकि यह घोषणा चुनावी छलावा साबित न हो।

आरक्षित पदों के बैकलॉग पर भी सरकार से मांगा जवाब

बसपा सुप्रीमो ने एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के आरक्षित पदों के बैकलॉग पर भी सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन वर्गों के लंबित आरक्षित पदों पर भर्ती को लेकर भी प्रदेश के लोगों को सरकारी घोषणा का इंतजार है।

मायावती ने कहा कि सरकारी नौकरियों में भर्ती केवल संख्या तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरी की जानी चाहिए।

69000 शिक्षक भर्ती के 6800 अभ्यर्थियों का उठाया मुद्दा

मायावती ने आंदोलनरत अभ्यर्थियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण के नियमों को लेकर आंदोलन कर रहे 6800 अभ्यर्थियों का जिक्र करते हुए कहा कि ये अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर लगातार आंदोलनरत हैं।

ALSO READ THIS :  2 सितंबर को होगी राम मंदिर ट्रस्ट की अहम बैठक,महंत दिनेंद्र दास बोले, रामकोट परिक्रमा की वर्षगांठ पर 21 अगस्त को भव्य आयोजन

उन्होंने सरकार से इन अभ्यर्थियों के प्रति सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की अपील की। मायावती ने कहा कि इन अभ्यर्थियों को वास्तविक राहत सरकार ही दे सकती है।

सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

बसपा सुप्रीमो ने उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में स्कूली शिक्षा की व्यवस्था को बेहतर बनाने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि बसपा लगातार सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने की मांग करती रही है।

मायावती ने कहा कि ‘जेन जी’ और ‘जेन अल्फा’ के दबाव में सरकारी स्तर पर कुछ हलचल दिखाई दे रही है। उनके मुताबिक यह हलचल यदि स्कूली शिक्षा में सुधार की सही नीयत से हो तो उचित कदम होगा।

उन्होंने उत्तर प्रदेश में करीब 30 हजार सरकारी स्कूल बंद किए जाने का भी दावा किया और सरकार से उन्हें दोबारा बेहतर तरीके से सक्रिय करने की व्यवस्था करने की मांग की।

मुफ्त बस यात्रा से ज्यादा जरूरी महिलाओं की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता

उत्तर प्रदेश में बुजुर्ग महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की व्यवस्था पर भी मायावती ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग महिलाओं को बसों में निशुल्क यात्रा जैसी सुविधाओं से कहीं अधिक जरूरी महिलाओं को शोषण, अत्याचार और उत्पीड़न से बचाना है।

उन्होंने कहा कि सरकारों को महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता के लिए सही नीयत और प्रभावी नीति के साथ काम करना चाहिए।

चुनाव से पहले रोजगार और महिला कल्याण पर सियासी घमासान

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले रोजगार, भर्ती प्रक्रिया, आरक्षण, शिक्षा और महिला कल्याण से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी तेज होती जा रही है। एक ओर सरकार युवाओं को रोजगार देने और महिलाओं के लिए सुविधाओं का विस्तार करने के अपने कदमों को सामने रख रही है, वहीं मायावती ने इन घोषणाओं के क्रियान्वयन और समयबद्धता पर सवाल उठाए हैं।

ALSO READ THIS :  जयंत चौधरी पर अखिलेश की टिप्पणी से भड़कीं मायावती, बोलीं सपा गिरगिट की तरह रंग बदलती है

बसपा सुप्रीमो ने साफ किया कि केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं। उनका जोर इस बात पर है कि भर्तियां पारदर्शी तरीके से हों, आरक्षित वर्गों के लंबित पदों पर कार्रवाई हो, आंदोलनरत अभ्यर्थियों को राहत मिले और सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए।

[wonderplugin_slider id=1]

टॉप स्टोरी

ज़रूर पढ़ें