लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बहुजन समाज पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी अध्यक्ष मायावती ने बुधवार को कहा कि बसपा को सर्वसमाज में मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर लगातार काम किया जा रहा है। इसी के साथ उम्मीदवारों के चयन और उनके नामों की घोषणा की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।
इसी क्रम में पार्टी ने राष्ट्रीय महासचिव और वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश चंद्र मिश्र को कानूनी और मीडिया से जुड़े कार्यों के अलावा चुनाव आयोग से संबंधित महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी सौंपी है। विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग से जुड़े मामलों में उनकी भूमिका अहम रहने की संभावना है।
चुनाव आयोग से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी सतीश चंद्र मिश्र को
मायावती ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि सतीश चंद्र मिश्र को पार्टी की ओर से लीगल और मीडिया संबंधी जिम्मेदारियों के साथ अब चुनाव आयोग से जुड़े कार्यों की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।
सतीश चंद्र मिश्र लंबे समय से बसपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं और पार्टी के प्रमुख कानूनी रणनीतिकारों में शामिल रहे हैं। वह बसपा शासनकाल में उत्तर प्रदेश के महाधिवक्ता और कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। इसके अलावा वह कई बार बसपा के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के अध्यक्ष रह चुके हैं।
2027 के लिए उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया तेज
मायावती के मुताबिक आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। विधानसभा स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यकर्ता सम्मेलनों में उम्मीदवारों के नामों की घोषणा किए जाने की प्रक्रिया भी चल रही है।
बसपा प्रमुख ने दावा किया कि पार्टी की बढ़ती सक्रियता को लेकर विरोधी दलों में बेचैनी दिखाई दे रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं और बहुजन समाज के लोगों से विरोधी दलों के कथित हथकंडों को लेकर सतर्क रहने की अपील की।
सर्वसमाज के साथ ब्राह्मण समाज को साधने की रणनीति
बसपा की रणनीति में सर्वसमाज को जोड़ने के साथ ब्राह्मण समाज पर भी विशेष फोकस दिखाई दे रहा है। मायावती ने कहा कि पार्टी ब्राह्मण समाज के लोगों को भी संगठन से जोड़ने और उन्हें उम्मीदवार बनाए जाने की दिशा में काम कर रही है।
मायावती ने 2007 की तरह पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने की रणनीति का संकेत दिया। 2007 में बसपा ने उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी और मायावती मुख्यमंत्री बनी थीं।
‘विरोधी पार्टियों में चर्चा और चिंता दोनों’
मायावती ने कहा कि जब से बसपा ने सर्वसमाज में विशेष रूप से ब्राह्मण समाज को पार्टी से जोड़ने और उन्हें उम्मीदवार बनाने की प्रक्रिया शुरू की है, तब से विरोधी दलों में इसे लेकर चर्चा और चिंता दोनों दिखाई दे रही हैं।
उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि बहुजन समाज के लोगों को विरोधी दलों की गतिविधियों और कथित राजनीतिक हथकंडों को लेकर लगातार सजग और सतर्क रहने की जरूरत है।
चुनावी मैदान में बसपा की सक्रियता बढ़ाने पर जोर
आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बसपा संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर जोर दे रही है। पार्टी की कोशिश अपने पारंपरिक जनाधार के साथ अन्य सामाजिक वर्गों तक पहुंच बढ़ाने की है।
मायावती के ताजा बयान से साफ संकेत मिल रहा है कि बसपा 2027 के चुनाव को लेकर संगठनात्मक गतिविधियों और उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया को समय रहते आगे बढ़ाना चाहती है।
सतीश चंद्र मिश्र की भूमिका होगी महत्वपूर्ण
चुनाव आयोग से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी सतीश चंद्र मिश्र को दिए जाने को बसपा की चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता होने के कारण चुनावी प्रक्रिया, कानूनी मामलों और आयोग से जुड़े मुद्दों में उनका अनुभव पार्टी के लिए उपयोगी हो सकता है।
मायावती ने भी संकेत दिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान सतीश चंद्र मिश्र की भूमिका कई मायनों में अहम रहने वाली है। ऐसे में चुनाव नजदीक आने के साथ बसपा की ओर से संगठन और कानूनी मोर्चे पर गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।



