मुजफ्फरनगर में फैक्ट्रियों की चिमनियों से लगातार निकलने वाला काला और जहरीला धुआं लोगों की सेहत पर बड़ा बुरा प्रभाव डाल रहा है। पूरे जिले का यही हाल है, लेकिन जिम्मेदार और सिस्टम के कानों पर जूं नहीं रेंग रही।
केवल भोपा रोड, जौली रोड और जानसठ रोड पर स्थित फैक्ट्रियां ही काला धुआं नहीं उगल रही, बल्कि हाईवे का इससे भी बुरा हाल है।
रविवार को दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे 58 पर मंसूरपुर थाना इलाके की कई फैक्ट्रियों की चिमनियां कैमरे में कैद हुईं, जो बेहद काला और जहरीला धुआं उगल रही थीं।
गुप्ता रिसॉर्ट के बराबर और नरा गांव में फैक्ट्रियां
एक फैक्ट्री गुप्ता रिसॉर्ट के बिल्कुल बराबर में स्थित है, जबकि दो फैक्ट्रियां हाईवे पर नरा गांव में हाईवे से सटी हुई हैं। तीनों फैक्ट्रियों से बेहद घना और काला धुआं निकलता पाया गया। यह धुआं न सिर्फ हवा को दूषित कर रहा है, बल्कि सांस की बीमारियां, आंखों में जलन, बच्चों में अस्थमा और लंबे समय में कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा रहा है।
इलाके के लोग लगातार आवाज उठा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की खामोशी
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड केवल कागजी खानापूर्ति में जुटा हुआ है। फैक्ट्रियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो रही। लोग पूछ रहे हैं कि क्या चिमनियों से निकलता यह काला धुआं किसी को दिखाई नहीं देता है? या फिर बोर्ड की आंखें बंद हैं?
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह धुआं उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को जहर बना रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग चुप्पी साधे हुए है।

हाईवे पर काला धुआं, यात्री भी प्रभावित
दिल्ली-देहरादून हाईवे पर सफर करने वाले यात्रियों को भी यह जहरीला धुआं परेशान कर रहा है। कई बार धुआं इतना घना होता है कि दूर तक दिखाई नहीं देता।
लोग कह रहे हैं कि “यह धुआं सांस लेने लायक नहीं छोड़ रहा, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं।”



