मुजफ्फरनगर। जनपद में अपनी विभिन्न लंबित और ज्वलंत समस्याओं को लेकर किसान और मजदूर एक बार फिर से लामबंद हो गए हैं। किसान मजदूर संगठन के बैनर तले मंगलवार को मूसलाधार बारिश की परवाह न करते हुए सैकड़ों की संख्या में किसान और मजदूर जिला मुख्यालय (कलेक्ट्रेट) पहुंचे और प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक 14 सूत्रीय मांग पत्र (ज्ञापन) जिलाधिकारी को सौंपा। इस दौरान जिला पंचायत सभागार में किसानों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के बीच एक उच्च स्तरीय समीक्षा वार्ता भी आयोजित हुई, जिसमें स्थानीय स्तर की कुछ तात्कालिक समस्याओं के त्वरित निस्तारण पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी।
नकली खाद्य पदार्थ और खोदी गई सड़कों पर फूटा गुस्सा
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संगठन के जिलाध्यक्ष ठाकुर लोकेश राणा ने कलेक्ट्रेट परिसर में मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नकली, मिलावटी और सिंथेटिक खाद्य पदार्थों, विशेषकर दूध, मावा, पनीर और रासायनिक दवाओं का काला कारोबार तेजी से पांव पसार रहा है, जो आम जनता और बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। संबंधित विभाग केवल त्योहारों के समय औचक निरीक्षण की औपचारिकता निभाता है। इसके अलावा, उन्होंने जल निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ा रोष जताते हुए कहा कि पेयजल पाइपलाइन बिछाने के नाम पर पूरे शहर और ग्रामीण अंचलों की पक्की सड़कें खोदकर छोड़ दी गई हैं, जिससे आए दिन लोग दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।
गन्ने का रेट 550 रुपये करने और पूर्ण कर्ज माफी की मांग
प्रशासन को सौंपे गए 14 सूत्रीय ज्ञापन में संगठन ने मुख्य रूप से किसानों और कृषि क्षेत्र को संकट से उबारने के लिए कई बड़ी मांगें राज्य सरकार के सामने रखी हैं। संगठन की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
गन्ना मूल्य: गन्ने का राज्य समर्थित मूल्य (SAP) तत्काल बढ़ाकर 550 रुपये प्रति कुंतल घोषित किया जाए।
बकाया भुगतान: गन्ने का शत-प्रतिशत भुगतान 14 दिनों के भीतर सुनिश्चित हो, देरी करने वाली चीनी मिलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और विलंब की अवधि का ब्याज भी किसानों को दिया जाए।
कर्ज माफी व पेंशन: प्रदेश के सभी लघु और सीमांत किसानों का पूरा कृषि ऋण माफ किया जाए तथा 50 वर्ष की आयु पार कर चुके किसानों को 5,000 रुपये मासिक पेंशन दी जाए।
जैविक खेती को प्रोत्साहन: पर्यावरण और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जैविक (ऑर्गेनिक) खेती अपनाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 50,000 रुपये का विशेष अनुदान दिया जाए।
सख्त कानून: नकली दूध, मिलावटी पनीर, जीवन रक्षक दवाओं और नकली कृषि रसायनों का निर्माण व बिक्री करने वालों के खिलाफ ‘आजीवन कारावास’ का कड़ा कानून बनाया जाए।
नदियों को प्रदूषण मुक्त करने और निशुल्क शिक्षा-चिकित्सा की आवाज उठाई
किसानों ने अपने मांग पत्र में पर्यावरण और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों को भी प्रमुखता से शामिल किया। उन्होंने जनपद से गुजरने वाली हिण्डन, काली, कृष्णा और ढमोला जैसी पवित्र नदियों में फैक्ट्रियों द्वारा बहाए जा रहे जहरीले और रासायनिक कचरे पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में डीएपी और यूरिया खाद की कृत्रिम किल्लत को समाप्त करने, आवारा व बेसहारा पशुओं से फसलों को बचाने के लिए हर ब्लॉक में स्थायी गोशालाओं का निर्माण करने, किसानों-मजदूरों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा व चिकित्सा पूरी तरह मुफ्त करने तथा प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षकों की नियुक्ति उनके गृह मंडल में ही करने की मांग उठाई गई। जिलाध्यक्ष लोकेश राणा ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इन न्यायसंगत मांगों पर शासन द्वारा जल्द ही कोई ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो संगठन पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक व्यापक और अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने को बाध्य होगा।



