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न्यूमैक्स सिटी पर ज़मीन कब्जाने का आरोप, कंपनी बोली- “ये ब्लैकमेलिंग की साजिश”

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मेरठ निवासी युवक ने फसल नष्ट करने और धमकाने का लगाया आरोप, न्यूमैक्स प्रबंधन ने दावों को बताया झूठा

मुज़फ़्फ़रनगर में दिल्ली-देहरादून हाईवे पर स्थित चर्चित न्यूमैक्स सिटी एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस बार मामला जमीन कब्जाने के आरोपों को लेकर सामने आया है, जहां मेरठ निवासी एक युवक ने न्यूमैक्स सिटी के डायरेक्टर और कर्मचारियों पर उसकी कृषि भूमि पर कब्जा करने, फसल नष्ट करने और धमकाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं कंपनी प्रबंधन ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा और साजिश करार देते हुए पलटवार किया है।


पूरा मामला जड़ौदा गांव का बताया जा रहा है। मेरठ के कंकरखेड़ा निवासी लक्ष्मीकांत का दावा है कि गांव में उसकी करीब तीन बीघा कृषि भूमि है, जो दिल्ली-दून हाईवे पर स्थित न्यूमैक्स सिटी की जमीन से सटी हुई है। पीड़ित का आरोप है कि न्यूमैक्स सिटी प्रबंधन उसकी जमीन को अपने प्रोजेक्ट में शामिल करना चाहता है और इसी दबाव में लगातार परेशान किया जा रहा है।


लक्ष्मीकांत के मुताबिक, दो दिन पहले न्यूमैक्स सिटी के कुछ कर्मचारियों ने उनकी जमीन पर खड़ी गन्ने की फसल को जबरन नष्ट कर दिया। विरोध करने पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। इतना ही नहीं, आरोप है कि उनकी जमीन पर न्यूमैक्स सिटी के बोर्ड तक लगा दिए गए, ताकि जमीन को कंपनी की संपत्ति दिखाया जा सके और उन्हें बेचने के लिए मजबूर किया जा सके।


वहीं दूसरी ओर, न्यूमैक्स सिटी प्रबंधन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी के डायरेक्टर संजय अग्रवाल और लीगल हेड चिराग मित्तल ने मीडिया के सामने कहा कि लक्ष्मीकांत खुद कंपनी का कर्मचारी है और अब गलत तरीके से लाभ लेने की कोशिश कर रहा है। कंपनी का दावा है कि जिस जमीन को लेकर विवाद किया जा रहा है, वह पहले ही ‘ट्रांजबिल्ड कंपनी’ से खरीदी जा चुकी है।

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न्यूमैक्स सिटी के लीगल हेड चिराग मित्तल ने कहा कि यदि जमीन वास्तव में लक्ष्मीकांत की है तो वह उसके कानूनी दस्तावेज सार्वजनिक करें। अन्यथा कंपनी की छवि खराब करने और ब्लैकमेल करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


फिलहाल दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। एक तरफ पीड़ित न्याय और कार्रवाई की मांग कर रहा है, तो दूसरी तरफ कंपनी पूरे मामले को ब्लैकमेलिंग और ठगी का प्रयास बता रही है। अब पुलिस जांच और जमीन के असली दस्तावेजों के आधार पर ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।

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