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दुष्कर्म की कोशिश के मामले अदालत का बड़ा फैसला: आरोपी के साथ–साथ सहयोगी महिला को भी 10 साल की सजा, दोनों पर जुर्माना भी लगा, करीब 7 साल पुराना मामला

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मुज़फ़्फ़रनगर। मुज़फ़्फ़रनगर में नाबालिग से दुष्कर्म की कोशिश के मामले में कोर्ट ने आरोपी युवक और उसकी सहयोगी महिला को अदालत ने दोषी करार देते हुए 10-10 साल की सजा सुनाई है। शुक्रवार, 9 अक्टूबर को ADJ/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कोर्ट नंबर-1 की न्यायाधीश मंजुला भालोटिया ने फैसला सुनाते हुए दोषी विकास पर 35 हजार और उसकी सहयोगी महिला ललिता पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।

मामला फुगाना थाना क्षेत्र के हबीबपुर सीकरी गांव का है। पुलिस के मुताबिक, 29 मई 2019 को पीड़िता के भाई ने थाने में शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि ललिता बहाने से उसकी नाबालिग बहन को अपने घर ले गई और एक कमरे में बंद कर दिया। वहां पहले से मौजूद विकास ने उसके साथ दुष्कर्म की कोशिश की।

शिकायत के आधार पर फुगाना पुलिस ने विकास और ललिता के खिलाफ दुष्कर्म के प्रयास, आपराधिक धमकी, साजिश और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। विवेचना पूरी करने के बाद 4 अगस्त 2019 को आरोप पत्र दाखिल किया गया।

मामले में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य पेश किए और गवाहों को अदालत में पेश कराया। पुलिस के अनुसार, प्रभावी पैरवी और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने विकास को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 376/511 और 120बी तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 7/8 के तहत 10 साल के कारावास और 35 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, ललिता को भी 10 साल की कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया गया।

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यह मामला वर्ष 2019 में दर्ज हुआ था। मुज़फ़्फ़रनगर पुलिस ने इसे ऑपरेशन कन्विक्शन और मिशन शक्ति अभियान के तहत प्रभावी पैरवी से सजा दिलाने वाला मामला बताया है।

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