उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर के चर्चित शेखर हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने एक महिला और उसके तीन बेटों को हत्या का दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने इस मामले को “दुर्लभ से दुर्लभतम” श्रेणी में रखते हुए कड़ी टिप्पणी भी की। हालांकि, यह सजा अंतिम नहीं मानी जाएगी और इसे इलाहाबाद हाई कोर्ट की पुष्टि मिलना आवश्यक है। फैसले के बाद इलाके में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

क्या है पूरा मामला
यह मामला 17 सितंबर 2019 का है, जब मुज़फ़्फ़रनगर के भौंराकलां थाना क्षेत्र के गांव खेड़ी सुदीयान में शेखर नामक युवक की हत्या कर दी गई थी।
सरकारी पक्ष के अनुसार, शेखर अपने 70 हजार रुपये उधार वापस लेने के लिए आरोपियों के घर गया था। इसी दौरान कहासुनी हुई, जो हिंसक झड़प में बदल गई।
ईंट-डंडों से हमला, मौके पर मौत
अभियोजन के मुताबिक, विवाद के बाद आरोपी महिला मुकेश और उनके बेटे प्रदीप, संदीप और सोनू ने शेखर पर ईंटों और डंडों से हमला कर दिया।
हमले में गंभीर चोट लगने से शेखर की मौके पर ही मौत हो गई।
‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ केस :अदालत
मामले की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने चारों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी करार दिया।
अदालत ने इस मामले को “दुर्लभ से दुर्लभतम” श्रेणी में रखते हुए चारों को मृत्युदंड की सजा सुनाई।

जुर्माना और मुआवजा
न्यायालय ने चारों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अदालत ने निर्देश दिया कि यह राशि मृतक की मां और शिकायतकर्ता राजबाला को दी जाए।
पुलिस जांच और साक्ष्य
घटना के बाद मृतक की मां की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
जांच के दौरान पुलिस ने साक्ष्य जुटाकर आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया, जिसके आधार पर न्यायालय ने आरोपियों को दोषी ठहराया।
‘हाई कोर्ट की पुष्टि जरूरी’
कानूनी प्रक्रिया के तहत, मृत्युदंड की सजा को लागू करने से पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट की पुष्टि आवश्यक होती है।
इसलिए अंतिम फैसला हाई कोर्ट की स्वीकृति के बाद ही प्रभावी होगा।
परिवार ने जताया संतोष
अदालत के फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने संतोष जताया है। वहीं, इस फैसले को लेकर क्षेत्र में न्यायिक प्रक्रिया और सजा पर चर्चा भी तेज हो गई है।



