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मुज़फ़्फ़रनगर में ‘यूरिया सिंडिकेट’ में खलबली: कार्रवाई शुरू होते ही गायब होने लगे DEF टैंक, काली पॉलीथीन में छिपे कई राज!

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क्या मुज़फ़्फ़रनगर में किसानों के हिस्से के यूरिया से जुड़े किसी बड़े खेल की परतें खुलने लगी हैं? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पुलिस और कृषि विभाग की लगातार कार्रवाई के बाद जिले में DEF (डीजल एग्जॉस्ट फ्लूइड) कारोबार से जुड़े कई केंद्रों पर अचानक सन्नाटा छा गया है। कहीं टैंक काली पॉलीथीन से ढक दिए गए हैं, कहीं नोजल गायब हैं, तो कहीं पूरे प्वाइंट ही बंद कर दिए गए हैं। जिन स्थानों पर कल तक खुलेआम कारोबार होता दिखाई देता था, वहां आज गतिविधियां ठप पड़ती नजर आ रही हैं। अधिकारियों की मानें तो किसानों के यूरिया की कालाबाज़ारी और उसके कथित अवैध उपयोग के खिलाफ अभियान अभी जारी है।

कार्रवाई शुरू… और बदल गया पूरा थियेटर!

पुलिस के “ऑपरेशन किसान प्रहरी” और कृषि विभाग के “ऑपरेशन फार्मर फ्रेंड्स” के सक्रिय होने के बाद जिले में एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिला है।
दिल्ली-देहरादून हाईवे-58 पर नई मंडी क्षेत्र से लेकर आसपास के इलाकों तक कई डीईएफ प्वाइंट अचानक सुस्त पड़ गए हैं। कुछ स्थानों पर टैंकों को काली पॉलीथीन से ढका गया है, जबकि कई जगह नोजल हटाए जाने या टैंक खाली तक कर दिए गए हैं।
स्थानीय स्तर पर सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि कारोबार का यह चेहरा अचानक बदल गया?

जांच के दायरे में पुराने नाम?

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि काली पॉलीथीन से ढके उक्त डीईएफ प्वाइंट का संबंध सोनित कश्यप से है। वहीं बागोवाली चौकी से हरिद्वार की ओर स्थित एक अन्य डीईएफ प्वाइंट को लेकर स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि उसका संबंध पारस कश्यप से है।

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उल्लेखनीय है कि पारस कश्यप का नाम 7 नवंबर 2024 को खांजापुर क्षेत्र में पकड़ी गई कथित नकली डीईएफ निर्माण इकाई के मामले में सामने आया था, जिसमें पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया था।

2024 की कार्रवाई के बाद फिर सक्रिय हुई जांच

7 नवंबर 2024 को शहर कोतवाली पुलिस ने खांजापुर गांव के जंगल में संचालित एक कथित नकली डीईएफ निर्माण इकाई का भंडाफोड़ किया था। पुलिस के अनुसार उस समय बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद की गई थी और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
अब पुलिस और कृषि विभाग की हालिया कार्रवाई के बाद जांच का फोकस केवल यूरिया की कालाबाज़ारी तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि उससे जुड़े सप्लाई नेटवर्क और वितरण श्रृंखला की भी पड़ताल की जा रही है।

किसानों के यूरिया पर नजर

जांच एजेंसियों का मानना है कि किसानों के लिए उपलब्ध यूरिया का खेती के अलावा किसी अन्य उपयोग में जाना गंभीर विषय है। इसी वजह से जिले में यूरिया की खरीद, भंडारण और उपयोग से जुड़े बिंदुओं पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

एसपी देहात का स्पष्ट संदेश

एसपी देहात महादिक अक्षय संजय ने कहा है कि किसानों के हिस्से के यूरिया की कालाबाज़ारी अथवा उसका खेती के अतिरिक्त किसी भी अवैध उपयोग को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने संकेत दिया कि जांच आगे बढ़ रही है और आने वाले समय में महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

अगले खुलासे पर अब सबकी नजर

हाईवे किनारे ढके हुए टैंक, हटे हुए नोजल और अचानक बंद पड़े डीईएफ प्वाइंट कई सवाल खड़े कर रहे हैं। क्या यह महज़ संयोग है या फिर चल रही कार्रवाई का सीधा असर? इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल इतना जरूर है कि पुलिस और कृषि विभाग की संयुक्त कार्रवाई ने जिले में यूरिया और डीईएफ कारोबार से जुड़े लोगों की बेचैनी बढ़ा दी है।

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