मुज़फ़्फ़रनगर। समाजवादी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष (शिक्षक सभा) डॉ. सत्येंद्र पाल को पिछले पांच दिनों से पुलिस द्वारा नजरबंद किए जाने के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। नजरबंदी की जानकारी मिलने के बाद सपा जिलाध्यक्ष जिया चौधरी पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ गुरुवार को उनके शाहपुर स्थित आवास पर पहुंचे। नेताओं ने डॉ. सत्येंद्र पाल से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी ली और पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताई। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की।
डॉ. सत्येंद्र पाल ने अपनी कथित नजरबंदी को बुढ़ाना में प्रस्तावित ‘दलित बोधिसत्व धम्म यात्रा’ की तैयारियों से जोड़ते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि यात्रा की तैयारियों को लेकर सरकार घबराई हुई है और इसी वजह से उन्हें गैर-लोकतांत्रिक तरीके से नजरबंद किया गया है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सामाजिक न्याय और समानता की आवाज को दबाने के लिए इस तरह की कार्रवाई उचित नहीं है।
डॉ. सत्येंद्र पाल ने कहा कि दबाव और कार्रवाई के बावजूद सामाजिक न्याय, समानता और सम्मान की आवाज को रोका नहीं जा सकता। उन्होंने कार्यकर्ताओं से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात उठाते रहने की अपील की। उनका कहना है कि किसी भी दबाव के आगे समाज के अधिकारों की लड़ाई को झुकाया नहीं जाएगा।
डॉ. सत्येंद्र पाल के आवास पर पहुंचे सपा जिलाध्यक्ष जिया चौधरी ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं की आवाज दबाने के लिए तानाशाही का रास्ता अपना रही है। जिया चौधरी ने कहा कि यदि प्रशासन को किसी कार्यक्रम या गतिविधि को लेकर आशंका थी तो संबंधित लोगों से बातचीत कर स्थिति स्पष्ट की जा सकती थी, न कि पुलिस कार्रवाई के जरिए नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोकने का प्रयास किया जाना चाहिए था।
इस दौरान मौजूद सपा कार्यकर्ताओं ने सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर अपना विरोध दर्ज कराया। पार्टी नेताओं ने कहा कि सामाजिक न्याय, समानता और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर समाजवादी पार्टी अपनी आवाज उठाती रहेगी।
सपा नेताओं का कहना है कि डॉ. सत्येंद्र पाल को पांच दिनों से नजरबंद रखे जाने की कार्रवाई को लेकर पार्टी आने वाले दिनों में उच्च अधिकारियों के समक्ष भी अपनी बात रखेगी। हालांकि, इस मामले में पुलिस और प्रशासन की ओर से नजरबंदी के कारणों को लेकर कोई पक्ष सामने नहीं आया है।

