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मुजफ्फरनगर में JRC परियोजना व ग्रामीण समाज विकास केंद्र की पहल, शिक्षकों और बच्चों को बाल विवाह रोकने के लिए किया जागरूक

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मुजफ्फरनगर में शिक्षक दिवस पर बाल अधिकार व बाल संरक्षण कार्यक्रम आयोजित, बाल विवाह के खिलाफ ली गई शपथ
बाल विवाह के खिलाफ जंग में ऐतिहासिक कदम, 27 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय दिवस की स्थापना

मुजफ्फरनगर। शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर 2026 को ग्रामीण समाज विकास केंद्र एवं Just Rights for Children (JRC) परियोजना के अंतर्गत विशेष बाल अधिकार एवं बाल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, बाल अधिकारों के संरक्षण और सुरक्षित भविष्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। इस दौरान बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया गया और शिक्षकों के साथ बैठक कर बच्चों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम में ग्रामीण समाज विकास केंद्र एवं Just Rights for Children (JRC) परियोजना की ओर से बाल अधिकार एवं बाल संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी शिक्षकों और बच्चों को दी गई। वक्ताओं ने कहा कि बच्चों को शिक्षा से जोड़ना, उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और उनके अधिकारों का संरक्षण करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस दिशा में शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि विद्यालय बच्चों से सीधे जुड़ा हुआ प्रमुख संस्थान है।

शिक्षकों के साथ बैठक कर बाल संरक्षण पर हुई चर्चा

कार्यक्रम के दौरान CSW रविता ने शिक्षकों के साथ बैठक की। बैठक में बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, बाल अधिकारों और बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। शिक्षकों से कहा गया कि वे बच्चों के व्यवहार, उनकी परिस्थितियों और विद्यालय में उनकी उपस्थिति पर नजर रखें तथा किसी भी प्रकार की परेशानी या अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति सामने आने पर उसे गंभीरता से लें।

बैठक में विशेष रूप से बाल विवाह की रोकथाम को लेकर शिक्षकों की भूमिका पर चर्चा हुई। बताया गया कि विद्यालय स्तर पर लगातार जागरूकता के माध्यम से बच्चों और उनके अभिभावकों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी जा सकती है। शिक्षकों को बच्चों को लगातार शिक्षा से जोड़े रखने और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया।

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बाल विवाह के खिलाफ प्रधानाचार्या ने दिया जागरूकता संदेश

कार्यक्रम में स्वामी कल्याण देव इंटर कॉलेज मोरना मुजफ्फरनगर की प्रधानाचार्या नीरू शर्मा ने शिक्षक दिवस के अवसर पर बाल विवाह जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दे पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस केवल गुरुओं के सम्मान का अवसर नहीं है, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ी से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार करने का भी अवसर है।

उन्होंने कहा कि जिस उम्र में एक बच्ची के हाथ में किताब और कलम होनी चाहिए, अगर उसी उम्र में उसके हाथों में घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियां सौंप दी जाएं तो उसके सपनों और भविष्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। बाल विवाह केवल कम उम्र में शादी होने का मामला नहीं है, बल्कि इससे बच्चे की शिक्षा, स्वास्थ्य, बचपन और अपने भविष्य से जुड़े फैसले लेने के अधिकार पर भी असर पड़ता है।

स्वामी कल्याण देव इंटर कॉलेज मोरना मुजफ्फरनगर की प्रधानाचार्या नीरू शर्मा ने बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए परिवार, विद्यालय और समाज के स्तर पर लगातार जागरूकता फैलाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

CSW रविता ने दिलाई बाल विवाह के खिलाफ शपथ

कार्यक्रम के दौरान CSW रविता ने उपस्थित शिक्षकों, अतिथियों और प्रतिभागियों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई। सभी ने बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को रोकने, बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए मिलकर प्रयास करने का संकल्प लिया।

शपथ के दौरान बाल विवाह को बढ़ावा नहीं देने, अपने आसपास बाल विवाह की जानकारी मिलने पर संबंधित स्तर पर सूचना देने तथा बच्चों को शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया गया।

27 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित होने की जानकारी दी

कार्यक्रम के दौरान CSW रविता ने शिक्षकों और बच्चों को बाल विवाह के खिलाफ वैश्विक स्तर पर चलाए जा रहे प्रयासों और हाल की महत्वपूर्ण उपलब्धि के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाल, कम उम्र और जबरन विवाह के उन्मूलन के लिए 27 नवंबर को International Day for the Elimination of Child, Early and Forced Marriage के रूप में स्थापित किया गया है।

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उन्होंने बताया कि इस पहल में भारत से उठी आवाज और सामूहिक प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बच्चों और शिक्षकों को यह संदेश दिया गया कि बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई केवल किसी एक संस्था की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

CSW रविता ने बताया कि Just Rights for Children के सहयोगी संगठनों ने देशभर में बाल विवाह को रोकने और बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए लगातार काम किया है। इस सामूहिक प्रयास के माध्यम से देश में पांच लाख पचास हजार से अधिक बाल विवाहों को रोकने और टालने में योगदान दिया गया है।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उन सभी लोगों और संस्थाओं की सामूहिक सफलता है, जिन्होंने बाल विवाह के खिलाफ अपने-अपने स्तर पर आवाज उठाई और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम किया।

Just Rights for Children के कार्यों की दी जानकारी

CSW रविता ने बच्चों और शिक्षकों को Just Rights for Children के बारे में भी विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि संस्था और उसके सहयोगी संगठन बाल विवाह की रोकथाम, बाल संरक्षण, बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं।

उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे अपने विद्यालय और आसपास के क्षेत्र में बच्चों के अधिकारों से संबंधित किसी भी मामले को गंभीरता से लें। बाल विवाह की आशंका होने पर समय रहते जानकारी सामने लाने और संबंधित अधिकारियों तक सूचना पहुंचाने में शिक्षक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए देशभर में विभिन्न स्तरों पर अभियान चलाए जा रहे हैं और इसमें शिक्षकों, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासन, पुलिस तथा समाज के अन्य जिम्मेदार लोगों की भागीदारी जरूरी है।

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1098 चाइल्ड हेल्पलाइन की दी जानकारी

कार्यक्रम में बच्चों की सुरक्षा और सहायता के लिए संचालित चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 के बारे में भी जानकारी दी गई। उपस्थित लोगों को बताया गया कि किसी बच्चे के साथ बाल विवाह, बाल श्रम, शोषण, हिंसा अथवा किसी अन्य प्रकार की परेशानी की स्थिति में सहायता और संरक्षण के लिए 1098 पर संपर्क किया जा सकता है।

शिक्षकों से कहा गया कि यदि उन्हें किसी बच्चे के अधिकारों के उल्लंघन या बाल विवाह से संबंधित जानकारी मिलती है तो मामले को नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में उचित स्तर पर सूचना देकर बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित कराने में सहयोग करें।

बच्चों की शिक्षा और सुरक्षित भविष्य पर जोर

बैठक और कार्यक्रम के दौरान बच्चों को शिक्षा से जोड़ने तथा उनके सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता मिले तो वे बेहतर भविष्य की ओर आगे बढ़ सकते हैं।

शिक्षकों से अपील की गई कि वे बच्चों को केवल पाठ्यक्रम की शिक्षा तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें उनके अधिकारों, सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक करें। बाल विवाह जैसी कुरीतियों को रोकने के लिए बच्चों की आवाज को सुनना और उन्हें अपनी बात रखने का सुरक्षित अवसर देना भी जरूरी बताया गया।

बाल अधिकारों की रक्षा के लिए मिलकर काम करने का संकल्प

कार्यक्रम में कहा गया कि बाल अधिकारों का संरक्षण केवल किसी एक संस्था या विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, विद्यालय, समाज और संबंधित संस्थाओं को मिलकर बच्चों के सुरक्षित और बेहतर भविष्य के लिए काम करना होगा।

CSW रविता ने शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्य करें और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के खि…

 


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