नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा पाठ, यात्रा, निवेश अथवा धार्मिक अनुष्ठान से पहले पंचांग देखकर तिथि, नक्षत्र, योग और शुभ मुहूर्त का विचार किया जाता है। पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर हिंदू काल गणना की जानकारी प्रदान करता है।
19 सितंबर 2026, शनिवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष रहने वाला है। इस दिन भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि दोपहर तक रहेगी और इसके बाद नवमी तिथि का आरंभ होगा। उदयातिथि के अनुसार इस दिन राधा अष्टमी और महालक्ष्मी व्रत का शुभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्री राधा रानी और माता महालक्ष्मी की पूजा अर्चना करना विशेष फलदायी माना जाता है।
राधा रानी के प्राकट्य दिवस पर होगी विशेष पूजा
राधा अष्टमी को श्री राधा रानी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु व्रत रखते हैं और राधा कृष्ण की विधि विधान से पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि राधा अष्टमी के दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ राधा रानी की आराधना करने से जीवन में प्रेम, सुख और शांति की प्राप्ति होती है।
राधा अष्टमी के अवसर पर मंदिरों और घरों में विशेष पूजा, भजन कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। श्रद्धालु राधा रानी को श्रृंगार सामग्री, पुष्प और विभिन्न प्रकार के भोग अर्पित कर सुख समृद्धि की कामना करते हैं।
महालक्ष्मी व्रत का भी होगा शुभारंभ
19 सितंबर से 16 दिवसीय महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत होगी। यह व्रत 3 अक्टूबर 2026 को संपन्न होगा। माता लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु विधि विधान से माता महालक्ष्मी की पूजा करते हैं।
मान्यता के अनुसार, महालक्ष्मी व्रत के आरंभ में कलश स्थापना कर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु इस व्रत के माध्यम से परिवार की सुख समृद्धि, धन धान्य और खुशहाली की कामना करते हैं।
शनिवार को अष्टमी तिथि दोपहर तक
पंचांग के अनुसार 19 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि दोपहर 3 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि का आरंभ हो जाएगा। उदयातिथि के कारण राधा अष्टमी का पर्व इसी दिन मनाया जाएगा।
इस दिन धार्मिक अनुष्ठानों के लिए तिथि, नक्षत्र और शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व रहेगा। श्रद्धालु अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय निर्धारित कर सकते हैं।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय का समय
19 सितंबर को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 18 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 23 मिनट पर होगा। चंद्रोदय दोपहर 1 बजकर 33 मिनट पर और चंद्रास्त रात 12 बजकर 11 मिनट पर होगा।
पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में स्थित रहेगा। ग्रह नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार दिन में विभिन्न धार्मिक कार्यों के लिए अलग अलग मुहूर्त निर्धारित रहेंगे।
आयुष्मान योग के बाद बनेगा सौभाग्य योग
शनिवार को दोपहर लगभग 2 बजकर 29 मिनट तक आयुष्मान योग रहेगा। इसके बाद सौभाग्य योग का आरंभ होगा। धार्मिक दृष्टि से दोनों योगों को शुभ माना जाता है और इस दौरान पूजा पाठ तथा धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं।
दिन का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। इसे दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्तों में माना जाता है।
इसके अलावा अमृत काल शाम 6 बजकर 23 मिनट से रात 8 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।
राहुकाल और अन्य अशुभ काल का समय
शनिवार को राहुकाल के समय को लेकर दिए गए पंचांग विवरण में समय की त्रुटि दिखाई देती है, क्योंकि राहुकाल के लिए सुबह 10 बजकर 50 मिनट से 10 बजकर 50 मिनट तक का समय दिया गया है। इसलिए राहुकाल का सटीक समय स्थानीय पंचांग से मिलान करके ही निर्धारित करना उचित रहेगा।
गुलिक काल सुबह 6 बजकर 18 मिनट से 7 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। वहीं यमगंड काल दोपहर 1 बजकर 51 मिनट से 3 बजकर 21 मिनट तक बताया गया है। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन कालखंडों में नए और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।
कन्या राशि में सूर्य और धनु राशि में चंद्रमा
19 सितंबर को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा धनु राशि में रहेगा। पंचांग में ग्रहों की स्थिति को दिन के धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व के आकलन में महत्वपूर्ण माना जाता है।
शनिवार को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि किसी आवश्यक कारण से पूर्व दिशा की यात्रा करनी पड़े तो मान्यतानुसार संबंधित ज्योतिषीय उपाय करके यात्रा शुरू की जा सकती है।
राधा अष्टमी और महालक्ष्मी व्रत से सजेगा शनिवार
19 सितंबर का दिन धार्मिक दृष्टि से इसलिए खास है क्योंकि एक ही दिन राधा अष्टमी और महालक्ष्मी व्रत का शुभारंभ हो रहा है। श्रद्धालुओं के लिए यह दिन श्री राधा रानी की भक्ति के साथ माता महालक्ष्मी की आराधना का अवसर लेकर आएगा। घरों और मंदिरों में पूजा पाठ, व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से श्रद्धालु सुख, शांति और समृद्धि की कामना करेंगे।
पंचांग से जुड़े मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय और क्षेत्र के अनुसार कुछ मिनट आगे पीछे हो सकते हैं। इसलिए किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग या विद्वान से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

