सहारनपुर। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद प्रशासन की ध्वस्तीकरण कार्रवाई के साथ और गहरा गया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने छह बुलडोजरों की मदद से कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर स्थित मस्जिद को गिरा दिया। प्रशासन के मुताबिक यह निर्माण सरकारी जमीन पर अवैध रूप से किया गया था और अदालत से बेदखली संबंधी आदेश को चुनौती देने वाली अपील खारिज होने के बाद कार्रवाई की गई।
ध्वस्तीकरण के दौरान इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के साथ अतिरिक्त पीएसी और आरएएफ की तैनाती की थी।
अदालत के आदेश के बाद हुई कार्रवाई
डीआईजी अभिषेक सिंह ने बताया कि कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर सरकारी जमीन पर एक अवैध निर्माण पाया गया था। इस मामले में सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत की ओर से आदेश जारी किया गया था।
डीआईजी के मुताबिक इस आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने पहली अपील दाखिल की थी, लेकिन अपील खारिज कर दी गई। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा गया। इसी आदेश के तहत अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई की गई।
प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है और संबंधित स्तर पर उपलब्ध कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है।
भारी पुलिस बल और छह बुलडोजर रहे तैनात
मस्जिद के ध्वस्तीकरण के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। छह बुलडोजरों को मौके पर लगाया गया और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में निर्माण को गिराया गया।
डीआईजी अभिषेक सिंह ने कहा कि त्योहारों और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए जिले में अतिरिक्त पीएसी और आरएएफ भी उपलब्ध कराई गई है। प्रशासन की कोशिश है कि कार्रवाई के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो और जिले में शांति व्यवस्था बनी रहे।
सहारनपुर जाने से पहले इकरा हसन नजरबंद
मस्जिद के मुद्दे को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज रही। कैराना की सांसद इकरा हसन को पुलिस ने नजरबंद कर दिया। बताया गया कि वह कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के मुद्दे पर सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं।
इकरा हसन की नजरबंदी को लेकर भी राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है। उनकी मां और पूर्व सांसद तबस्सुम हसन ने प्रशासन की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि उनका परिवार जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है।
इमरान मसूद ने संविधान और कानून का मुद्दा उठाया
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने मस्जिद गिराए जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे केवल धार्मिक स्थल का मामला मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि मामला देश के कानून और संविधान से जुड़ा है।
इमरान मसूद ने दावा किया कि प्रशासन जिस खसरा रिकॉर्ड के आधार पर जमीन को सरकारी कलेक्ट्रेट की जमीन बता रहा है, उसमें जमीन अभी भी वहीद खान और याकूब खान के नाम दर्ज है। उन्होंने कहा कि यह जमीन उनकी जमींदारी के भीतर दर्ज रही है और इसी जमीन पर मस्जिद बनाए जाने की बात सामने आती है।
वक्फ बोर्ड को पक्षकार नहीं बनाने पर सवाल
कांग्रेस सांसद ने यह भी दावा किया कि संबंधित मस्जिद वक्फ बोर्ड के साथ पंजीकृत है। उन्होंने सवाल उठाया कि कार्रवाई से संबंधित कानूनी प्रक्रिया में वक्फ बोर्ड को पक्षकार क्यों नहीं बनाया गया।
इमरान मसूद ने ‘वक्फ बाय यूजर’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लगातार नमाज अदा किए जाने और धार्मिक गतिविधियां संचालित होने के आधार पर मस्जिद के स्वरूप को स्थापित करने का प्रावधान मौजूद है।
उन्होंने कहा कि वह वक्फ से संबंधित संयुक्त संसदीय समिति के सदस्य रहे हैं और इस मामले में कानूनी पहलुओं पर भी सवाल उठाए जाने चाहिए।
प्रशासन और विपक्ष के दावों में अलग-अलग तस्वीर
सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद मामले में प्रशासन और विपक्ष की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। प्रशासन जहां अदालत के आदेश और अवैध निर्माण के आधार पर कार्रवाई की बात कह रहा है, वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने जमीन के रिकॉर्ड, वक्फ पंजीकरण और कानूनी प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
वहीं, इकरा हसन की नजरबंदी ने भी मामले को राजनीतिक रंग दे दिया है। अब इस कार्रवाई के बाद आने वाली राजनीतिक और कानूनी प्रतिक्रियाओं पर सभी की नजरें टिकी हैं।
त्योहारों के बीच प्रशासन अलर्ट
सहारनपुर में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब त्योहारों को देखते हुए प्रशासन पहले से ही कानून व्यवस्था को लेकर सतर्क है। डीआईजी के अनुसार अतिरिक्त पीएसी और आरएएफ की उपलब्धता इसी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और पूरी कार्रवाई कानूनी आदेशों के तहत की जा रही है। दूसरी ओर विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई के कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद का मामला आने वाले दिनों में भी सियासी और कानूनी चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।

