नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व इस वर्ष 11 अक्टूबर, रविवार से शुरू होगा। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। भक्त व्रत रखते हैं, माता की आराधना करते हैं और परिवार की सुख-शांति, समृद्धि एवं मंगल की कामना करते हैं। नवरात्रि का प्रत्येक दिन मां के एक विशेष स्वरूप को समर्पित होता है और धार्मिक मान्यताओं में हर स्वरूप का अलग महत्व बताया गया है।
पहला दिन: मां शैलपुत्री
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। उन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां शैलपुत्री की आराधना से भक्तों को शक्ति, स्थिरता और आत्मविश्वास का आशीर्वाद प्राप्त होता है। नवरात्रि की शुरुआत इसी स्वरूप की पूजा से की जाती है।
दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी
दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। उनका स्वरूप तप, त्याग और संयम का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की आराधना से धैर्य और आत्मबल की प्राप्ति होती है तथा कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।
तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की उपासना की जाती है। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित होने के कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। धार्मिक मान्यता में उनका स्वरूप साहस और शक्ति का प्रतीक माना गया है। भक्त मां की आराधना कर भय और परेशानियों से मुक्ति की कामना करते हैं।
चौथा दिन: मां कूष्मांडा
चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। उन्हें ऊर्जा और सृजन शक्ति का स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि मां कूष्मांडा की आराधना से घर-परिवार में सुख-समृद्धि, खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
पांचवां दिन: मां स्कंदमाता
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है। उन्हें भगवान कार्तिकेय की माता माना जाता है। भक्त उनसे बुद्धि, शांति और संतान सुख की कामना करते हैं। मां स्कंदमाता का स्वरूप ममता और वात्सल्य का प्रतीक भी माना जाता है।
छठा दिन: मां कात्यायनी
छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना की जाती है। उन्हें शक्ति और साहस का स्वरूप माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां कात्यायनी की पूजा से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
सातवां दिन: मां कालरात्रि
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है। उनका स्वरूप उग्र माना जाता है, लेकिन भक्तों के लिए वे कल्याणकारी मानी जाती हैं। मान्यता है कि मां कालरात्रि की आराधना से भय दूर होता है और साहस की प्राप्ति होती है।
अष्टमी: मां महागौरी
अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। उन्हें शांति, पवित्रता और सौम्यता का स्वरूप माना जाता है। इस दिन कई परिवारों में कन्या पूजन भी किया जाता है। भक्त मां महागौरी से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
नवमी: मां सिद्धिदात्री
नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। उन्हें सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी माना गया है। नवमी के दिन कई परिवारों में कन्या पूजन और हवन किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां सिद्धिदात्री की उपासना से आध्यात्मिक शक्ति और कार्यों में सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इस तरह शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। भक्त इन नौ दिनों में शक्ति, धैर्य, साहस, सुख-समृद्धि और शांति की कामना के साथ माता की उपासना करते हैं।

