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ईरान पर ट्रम्प का बड़ा एक्शन: 8 दिनों से लगातार बमबारी,उड़ाए कई सैन्य ठिकाने,अब तक 50 की मौत

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तेहरान/वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आदेश पर अमेरिकी सेना ने शनिवार को लगातार आठवीं रात ईरान के विभिन्न सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। यह कार्रवाई जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए हमले के जवाब में की गई, जिसमें दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी। अमेरिका का कहना है कि उसका उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना और क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में बताया कि राष्ट्रपति के निर्देश पर शाम छह बजे नए सैन्य अभियान की शुरुआत की गई। अमेरिकी सेना ने लड़ाकू विमानों और अत्याधुनिक मिसाइलों के जरिए दक्षिणी ईरान के सिरीक, हाजीआबाद, बंदर अब्बास और केश्म द्वीप स्थित सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) द्वारा सैन्य गतिविधियों और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा था।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका का बड़ा दावा

अमेरिका ने कहा है कि ईरान लगातार होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों के संचालन में बाधा डालने की कोशिश कर रहा है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल इस जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकता है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि हालिया सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य इस मार्ग को सुरक्षित रखना और आईआरजीसी की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है।

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इससे पहले भी अमेरिकी सेना ईरान के भीतर कई रणनीतिक ठिकानों पर हमले कर चुकी है। इन अभियानों में पुल, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, बिजली ग्रिड और एक जल शोधन संयंत्र सहित कई महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का आरोप है कि इन संसाधनों का इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों के समर्थन में किया जा रहा था।

ईरान का पलटवार, खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकाने बने निशाना

अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। ईरानी सेना ने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों तथा अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के कमांड सेंटर को ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने का दावा किया है। इसके अलावा इराक के इरबिल स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास में संभावित हवाई हमले की आशंका के चलते एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए हैं।

क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण खाड़ी देशों में सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बढ़ा दी गई है। कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई का सिलसिला जारी रहा तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता पर पड़ सकता है।

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 27 जून से 18 जुलाई के बीच अमेरिकी हवाई हमलों में कम से कम पचास लोगों की मौत हुई है, जबकि पांच सौ से अधिक लोग घायल हुए हैं। हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की है। यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।

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