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ओम प्रकाश राजभर का बड़ा दावा- चार हिस्सों में बंटेगा यूपी, पूर्वांचल बना तो राजभर समाज का बेटा होगा पहला CM

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अंबेडकर नगर। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य की सियासत में एक बार फिर प्रदेश के विभाजन का मुद्दा चर्चा में आ गया है। उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश का भविष्य में चार हिस्सों में बंटना तय है। उन्होंने कहा कि अगर पूर्वांचल को अलग राज्य का दर्जा मिलता है तो वहां पहला मुख्यमंत्री राजभर समाज से होगा।

अंबेडकर नगर में  राजभर ने प्रदेश के संभावित विभाजन को लेकर अपना राजनीतिक दावा सामने रखा। उनके मुताबिक उत्तर प्रदेश की विशाल आबादी और भौगोलिक विस्तार को देखते हुए राज्य का विभाजन भविष्य में होना तय है। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल में आबादी के आधार पर राजनीतिक नेतृत्व का सवाल महत्वपूर्ण होगा और किसी भी गठबंधन में राजभर समाज के नेतृत्व की भूमिका अहम रहेगी। इसी तरह का दावा राजभर ने रविवार को देवरिया में आयोजित अपनी पार्टी की सामाजिक समरसता रैली में भी किया था।

चार हिस्सों में बंटवारे का दावा

ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और इसकी विशाल आबादी को देखते हुए आज नहीं तो कल इसका विभाजन होना निश्चित है। उन्होंने कहा कि जिस दिन उत्तर प्रदेश चार भागों में बंटेगा, उस समय पूर्वांचल की आबादी और राजनीतिक समीकरणों के आधार पर नेतृत्व का सवाल सामने आएगा।

राजभर का यह बयान उत्तर प्रदेश को अलग-अलग राज्यों में बांटने की पुरानी राजनीतिक बहस को फिर चर्चा में लाता है। हालांकि, वर्तमान में उत्तर प्रदेश के चार राज्यों में विभाजन को लेकर केंद्र या राज्य सरकार की ओर से ऐसा कोई प्रशासनिक निर्णय घोषित नहीं किया गया है।

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पूर्वांचल के मुख्यमंत्री को लेकर राजभर ने जताई दावेदारी

राजभर ने कहा कि अगर पूर्वांचल अलग राज्य बनता है तो उनका गठबंधन जिस भी राजनीतिक दल के साथ होगा, उसमें पहला मुख्यमंत्री राजभर समाज का बेटा होना चाहिए। उन्होंने इसे पूर्वांचल की आबादी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जोड़कर पेश किया।

राजभर के इस बयान को उनकी पार्टी की क्षेत्रीय राजनीतिक भूमिका और पूर्वांचल में राजभर समुदाय के प्रतिनिधित्व की मांग से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, अलग पूर्वांचल राज्य का गठन अभी राजनीतिक मांग और बहस का विषय है, कोई स्थापित प्रशासनिक वास्तविकता नहीं।

2011 में भी विधानसभा में उठ चुका है यूपी के बंटवारे का प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश के विभाजन का मुद्दा नया नहीं है। वर्ष 2011 में तत्कालीन मायावती सरकार ने उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव विधानसभा में रखा था। उस प्रस्ताव में पूर्वांचल, बुंदेलखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अवध क्षेत्र को अलग-अलग राज्य बनाने की बात कही गई थी। हालांकि, इसके बाद राज्य के पुनर्गठन को लेकर कोई अंतिम प्रशासनिक फैसला नहीं हुआ।

ऐसे में राजभर का ताजा बयान आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इस पुराने मुद्दे को फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ले आया है।

राहुल गांधी पर महिलाओं के अधिकारों को लेकर हमला

राजभर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस आरोप का समर्थन किया, जिसमें राहुल गांधी पर महिलाओं के सम्मान से जुड़े सवाल उठाए गए थे।

राजभर ने महिला आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अगर राहुल गांधी महिलाओं का सम्मान करते हैं तो उन्हें संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण से जुड़े प्रावधानों का समर्थन करना चाहिए था। उन्होंने इसी आधार पर राहुल गांधी और अखिलेश यादव सहित विपक्षी नेताओं की आलोचना की।

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यह राजभर का राजनीतिक आरोप है। महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों और विभिन्न दलों के रुख को अलग-अलग राजनीतिक संदर्भों में देखा गया है।

अखिलेश-ओवैसी गठबंधन की अटकलों पर राजभर का बयान

उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के संभावित गठबंधन को लेकर भी चर्चा चल रही है। ओवैसी ने हाल ही में कहा है कि AIMIM 2 अक्टूबर तक यह स्पष्ट करेगी कि वह उत्तर प्रदेश में किसके साथ गठबंधन करेगी। उन्होंने समान विचारधारा वाले दलों के साथ काम करने की संभावना जताई है।

इसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव और ओवैसी के बीच संभावित गठबंधन की संभावना को खारिज करने का दावा किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर मतभेद हैं।

राजभर ने यह भी कहा कि ओवैसी मुस्लिम समुदाय के भीतर से मुख्यमंत्री बनाए जाने की बात करते हैं, जबकि उनके अनुसार अखिलेश यादव और राहुल गांधी की राजनीतिक सोच इससे अलग है। यह राजभर की राजनीतिक व्याख्या है; अखिलेश यादव या राहुल गांधी की ओर से इस संदर्भ में ऐसी कोई समान घोषणा इस खबर में उद्धृत नहीं है।

सपा पर अपराध और माफियाराज को लेकर हमला

ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने सपा के शासनकाल को लेकर अपराध और माफियाराज के आरोप लगाए और कहा कि पार्टी की सरकारों के दौरान अपराधियों को संरक्षण मिला।

राजभर ने मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि सपा ने ऐसे लोगों को बढ़ावा दिया। उन्होंने सपा के शासनकाल में कानून व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठाए।

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ये राजभर के राजनीतिक आरोप हैं। समाजवादी पार्टी इन आरोपों को स्वीकार करती है या नहीं, यह अलग राजनीतिक पक्ष है और इस खबर में उसका जवाब उपलब्ध नहीं है।

आरक्षण के मुद्दे पर भी राजभर लगातार उठा रहे आवाज

राजभर हाल के दिनों में पिछड़े वर्गों के आरक्षण में उपवर्गीकरण का मुद्दा भी उठा रहे हैं। उनका कहना है कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का लाभ सभी पिछड़ी जातियों को उनकी आबादी के अनुपात में मिलना चाहिए।

हालिया रैली में भी उन्होंने जातीय जनगणना और ओबीसी आरक्षण के भीतर अधिक समान वितरण की मांग दोहराई थी। इस मुद्दे को वह पिछड़े वर्गों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जोड़ते रहे हैं।

2027 से पहले पूर्वांचल की राजनीति पर नजर

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजभर का यह बयान पूर्वांचल की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है। एक ओर AIMIM गठबंधन को लेकर अपनी रणनीति स्पष्ट करने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर राजभर पूर्वांचल, पिछड़ा वर्ग और अपने समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दे रहे हैं।

फिलहाल उत्तर प्रदेश के विभाजन, पूर्वांचल के अलग राज्य और उसके मुख्यमंत्री को लेकर राजभर की ओर से किया गया दावा राजनीतिक बयान के रूप में सामने आया है। राज्य के पुनर्गठन को लेकर अंतिम निर्णय संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया के तहत ही संभव होगा।

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