वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे कम होने लगा है। जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आने और चेतावनी बिंदु से भी नीचे पहुंचने के बाद प्रशासन और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, गंगा का मौजूदा जलस्तर 70.26 मीटर दर्ज किया गया है।
पिछले कई दिनों से गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने वाराणसी के घाटों के आसपास रहने वाले लोगों के साथ-साथ नदी से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी आजीविका करने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी थी। हालांकि अब पानी घटने लगा है, लेकिन घाटों पर हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।
84 घाट अब भी पानी में डूबे
गंगा का जलस्तर कम होने के बावजूद वाराणसी के सभी 84 घाट अभी भी जलमग्न हैं। घाटों की निचली सीढ़ियां पानी में डूबी हुई हैं और निचले इलाकों में स्थित कई छोटे मंदिर भी अब तक पानी के भीतर हैं।
प्रशासन का कहना है कि जलस्तर में गिरावट राहत की बात है, लेकिन घाटों को पूरी तरह सामान्य स्थिति में आने में अभी कुछ समय लग सकता है। पानी घटने के बाद भी घाटों पर कीचड़ और फिसलन जैसी समस्याएं बनी रह सकती हैं, इसलिए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
नौका संचालन पर रोक जारी
जलस्तर घटने के बावजूद वाराणसी में नौका संचालन पर रोक अभी जारी है। गंगा में पानी की स्थिति और घाटों के आसपास सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता।
नाविकों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि गंगा में नाव संचालन उनकी आय का प्रमुख साधन है। लंबे समय तक नौका संचालन प्रभावित होने से उनकी रोजमर्रा की कमाई पर सीधा असर पड़ा है।
चार-पांच सीढ़ियां नीचे आया पानी
गंगा घाट पर पूजा-पाठ कराने वाले पुजारी संजीव कुमार दुबे ने बताया कि जलस्तर अब लगातार घट रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले दिन की तुलना में पानी करीब चार-पांच सीढ़ियां नीचे आया है और धीरे-धीरे जलस्तर में कमी देखी जा रही है।
पुजारी के मुताबिक फिलहाल जलस्तर के दोबारा बढ़ने की संभावना नजर नहीं आ रही है और पानी घटने के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं। इससे घाट से जुड़े लोगों में भी राहत का माहौल है।
नाविकों से लेकर फूल-माला विक्रेताओं तक प्रभावित हुई आजीविका
गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण वाराणसी के उन लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा, जिनकी रोजी-रोटी घाटों और गंगा से जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर है।
नाविकों के अलावा पुजारी, फूल-माला बेचने वाले, प्रसाद विक्रेता और पर्यटन से जुड़े लोगों की आय भी प्रभावित हुई। घाटों के जलमग्न होने के कारण श्रद्धालुओं की सामान्य गतिविधियां भी बाधित हुईं और कई स्थानों पर पूजा-पाठ तथा धार्मिक अनुष्ठान प्रभावित रहे।
अब पानी धीरे-धीरे कम होने के साथ इन लोगों को उम्मीद है कि घाटों पर गतिविधियां फिर से शुरू होंगी और उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पटरी पर लौट सकेगी।
घाटों पर पूजा-पाठ और आरती भी हुई प्रभावित
गंगा के बढ़े हुए जलस्तर का असर वाराणसी की धार्मिक गतिविधियों पर भी पड़ा। घाटों की सीढ़ियां पानी में डूबने के कारण पूजा-पाठ और आरती के पारंपरिक स्थान प्रभावित हुए।
वाराणसी के घाट धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र हैं। ऐसे में गंगा का जलस्तर बढ़ने पर स्थानीय लोगों के साथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा।
हालांकि पानी कम होने लगा है, लेकिन घाटों के निचले हिस्सों में अभी भी पानी मौजूद है। ऐसे में सामान्य धार्मिक गतिविधियों को पूरी तरह बहाल करने में कुछ और समय लग सकता है।
खतरे के निशान के पार पहुंचा था जलस्तर
पिछले कुछ दिनों में गंगा का जलस्तर बढ़ते-बढ़ते खतरे के निशान को पार कर गया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी किया था। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई थी।
बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन और राहत-बचाव एजेंसियों ने निगरानी बढ़ा दी थी। एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार स्थिति पर नजर रख रही थीं।
घटते जलस्तर से टला बाढ़ का खतरा
अब गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आने के बाद वाराणसी में बाढ़ का तत्काल खतरा काफी हद तक टल गया है। जलस्तर में लगातार गिरावट प्रशासन के साथ स्थानीय लोगों के लिए भी राहत की खबर है।
फिर भी प्रशासन की निगरानी जारी है, क्योंकि घाटों और निचले इलाकों में पानी पूरी तरह उतरने में समय लग सकता है। फिलहाल लोगों की नजर गंगा के जलस्तर पर बनी हुई है और सभी को स्थिति सामान्य होने का इंतजार है।

