नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। शुभ कार्य, पूजा-पाठ, यात्रा, निवेश, गृह प्रवेश, विवाह या किसी नए काम की शुरुआत से पहले पंचांग में तिथि, नक्षत्र, योग और शुभ-अशुभ समय का विचार किया जाता है। पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर हिंदू काल गणना की जानकारी देता है। बुधवार, 23 सितंबर 2026 को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि रात तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि का आरंभ होगा। इस दिन वामन जयंती भी मनाई जाएगी। इसके साथ ही दिन में सुकर्मा योग का प्रभाव रहेगा, जिसे शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
वामन जयंती के साथ सुकर्मा योग का शुभ संयोग
23 सितंबर को भगवान विष्णु के पांचवें अवतार भगवान वामन की जयंती मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान वामन की पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। श्रद्धालु इस अवसर पर भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा करते हैं और व्रत तथा धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
बुधवार को शाम 4 बजकर 27 मिनट तक सुकर्मा योग रहेगा। पंचांग में सुकर्मा योग को 27 नित्य योगों में सातवां योग माना गया है। इसे शुभ और कल्याणकारी योग की श्रेणी में रखा जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस योग में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, वाहन या संपत्ति की खरीद, नए व्यापार की शुरुआत तथा नए कार्य या परियोजना का आरंभ करना शुभ माना जाता है।
द्वादशी के बाद शुरू होगी त्रयोदशी तिथि
23 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि रात 10 बजकर 50 मिनट तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू हो जाएगी। बुधवार को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 19 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 18 मिनट पर होगा।
चंद्रमा का उदय शाम 4 बजकर 20 मिनट पर और चंद्रास्त अगले दिन तड़के 3 बजकर 51 मिनट पर होगा। दिन की धार्मिक गतिविधियों और पूजा-पाठ के लिए तिथि और मुहूर्त का विशेष महत्व रहेगा।
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा सूर्य
पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में स्थित रहेगा। उत्तराफाल्गुनी आकाश मंडल का बारहवां नक्षत्र माना जाता है। यह सिंह राशि के 26 डिग्री 40 मिनट से लेकर कन्या राशि के 10 डिग्री तक फैला हुआ बताया जाता है।
इस नक्षत्र के स्वामी सूर्य देव हैं, जबकि इसके देवता अर्यमा माने जाते हैं। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातकों में तेजस्विता, महत्वाकांक्षा, परोपकार और नेतृत्व क्षमता जैसे गुण पाए जाते हैं।
अभिजीत मुहूर्त में किए जा सकते हैं शुभ कार्य
23 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। पंचांग परंपरा में अभिजीत मुहूर्त को दिन के प्रमुख शुभ समयों में शामिल किया जाता है।
मान्यता है कि इस अवधि में शुरू किए गए कार्यों पर शुभ प्रभाव रहता है। सामान्य तौर पर अभिजीत मुहूर्त लगभग 48 मिनट का होता है और इसकी गणना दिनमान के आधार पर की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह वह समय है जब सूर्य मध्य आकाश के निकट होता है और इस अवधि को शुभ कार्यों के लिए विशेष माना जाता है।
रात में रहेगा अमृतकाल
बुधवार को अमृतकाल रात 11 बजकर 34 मिनट से अगले दिन रात 1 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष और पंचांग परंपरा में अमृतकाल को अत्यंत शुभ समय माना जाता है। इसे सकारात्मक ऊर्जा और अनुकूल परिणाम देने वाला काल बताया जाता है।
मान्यता के अनुसार, इस अवधि में पूजा-पाठ, महत्वपूर्ण कार्य, व्यापार से जुड़े निर्णय और अन्य शुभ गतिविधियां की जा सकती हैं। हालांकि किसी भी कार्य के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय का मिलान करना उचित माना जाता है।
राहुकाल में नए काम की शुरुआत से बचें
23 सितंबर को राहुकाल दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से 1 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। हिंदू ज्योतिष में राहुकाल को नए शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है।
राहुकाल की गणना सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को आठ बराबर हिस्सों में बांटकर की जाती है। यही वजह है कि अलग-अलग स्थानों पर राहुकाल के समय में अंतर हो सकता है। इस अवधि में नए काम की शुरुआत से बचने की मान्यता है, जबकि पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं।
गुलिक काल और यमगंड का समय भी जानें
बुधवार को गुलिक काल सुबह 10 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में गुलिक काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए प्रतिकूल समय माना जाता है। हालांकि पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखने में सामान्यतः कोई रोक नहीं मानी जाती।
वहीं यमगंड काल सुबह 7 बजकर 49 मिनट से 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। इसे भी नए काम की शुरुआत के लिए अशुभ समय माना जाता है। मान्यता के अनुसार, इस दौरान नई यात्रा, नए व्यापार या महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।
सूर्य कन्या और चंद्रमा मकर राशि में रहेंगे
23 सितंबर को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, सूर्य के कन्या राशि में रहने के दौरान व्यावहारिक सोच, योजनाबद्ध तरीके से काम करने और कार्यों में व्यवस्थित दृष्टिकोण को महत्व दिया जाता है।
इस दिन चंद्रमा मकर राशि में रहेगा। मकर राशि के स्वामी शनि माने जाते हैं। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, मकर राशि में चंद्रमा की स्थिति व्यक्ति के व्यवहार में अनुशासन, व्यावहारिकता और गंभीरता का प्रभाव ला सकती है।
उत्तर दिशा में रहेगा दिशाशूल
बुधवार को दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेगा। हिंदू ज्योतिष और वास्तु परंपरा में दिशाशूल का संबंध उस दिशा से माना जाता है, जिसमें किसी विशेष दिन यात्रा करना अनुकूल नहीं माना जाता।
इस दिन उत्तर दिशा की यात्रा करने से पहले शुभ मुहूर्त और अन्य पंचांग गणनाओं का विचार करने की धार्मिक मान्यता है। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में अंतर संभव है, इसलिए यात्रा या किसी बड़े शुभ कार्य के लिए स्थानीय सूर्योदय के आधार पर मुहूर्त देखना उचित माना जाता है।
23 सितंबर 2026 का प्रमुख पंचांग
तिथि: भाद्रपद शुक्ल द्वादशी रात 10 बजकर 50 मिनट तक, इसके बाद त्रयोदशी
सूर्योदय: सुबह 6 बजकर 19 मिनट
सूर्यास्त: शाम 6 बजकर 18 मिनट
चंद्रोदय: शाम 4 बजकर 20 मिनट
चंद्रास्त: तड़के 3 बजकर 51 मिनट
नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी
योग: सुकर्मा, शाम 4 बजकर 27 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 38 मिनट तक
अमृतकाल: रात 11 बजकर 34 मिनट से अगले दिन रात 1 बजकर 15 मिनट तक
राहुकाल: दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से 1 बजकर 49 मिनट तक
गुलिक काल: सुबह 10 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 19 मिनट तक
यमगंड: सुबह 7 बजकर 49 मिनट से 9 बजकर 19 मिनट तक
दिशाशूल: उत्तर दिशा
सूर्य राशि: कन्या
चंद्र राशि: मकर
इस प्रकार 23 सितंबर का दिन वामन जयंती, द्वादशी तिथि और सुकर्मा योग के कारण धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहेगा। शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल को उपयोगी माना गया है, जबकि राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड के दौरान नए कार्य शुरू करने से बचने की परंपरा है।

