नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत, धार्मिक अनुष्ठान, यात्रा, निवेश अथवा पूजा-पाठ से पहले पंचांग देखकर तिथि, नक्षत्र, योग और शुभ-अशुभ समय का विचार किया जाता है। हिंदू पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य खगोलीय गणनाओं पर आधारित काल-गणना की पारंपरिक व्यवस्था है।
25 अगस्त 2026, मंगलवार को सावन महीने के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि सुबह 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि का आरंभ होगा। इस दिन सावन मास के अंतिम भौम प्रदोष व्रत और मंगला गौरी व्रत का विशेष संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष कहा जाता है। वहीं सावन के मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है।
शिव और मां पार्वती की आराधना का विशेष दिन
25 अगस्त को भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व रहेगा। भौम प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है, जबकि मंगला गौरी व्रत माता पार्वती की आराधना के लिए किया जाता है। ऐसे में इस दिन शिव और शक्ति दोनों की उपासना का अवसर मिलेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है। कर्ज और आर्थिक परेशानियों से मुक्ति, सुख-समृद्धि तथा लंबी आयु की कामना के लिए भी इस दिन पूजा और व्रत का विशेष महत्व बताया गया है।
कब होगी द्वादशी और त्रयोदशी तिथि
पंचांग के अनुसार 25 अगस्त को श्रावण शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि सुबह 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगी। इसके बाद शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि शुरू हो जाएगी।
त्रयोदशी तिथि के कारण इस दिन प्रदोष व्रत का भी विशेष महत्व रहेगा। शाम के समय भगवान शिव की पूजा और प्रदोष काल में आराधना को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
25 अगस्त को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 10 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 47 मिनट पर होगा।
चंद्रमा के उदय का समय शाम 5 बजकर 9 मिनट बताया गया है। वहीं अगले दिन 26 अगस्त को तड़के 4 बजकर 12 मिनट पर चंद्रास्त होगा।
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
पंचांग के अनुसार 25 अगस्त को सूर्य मघा नक्षत्र में स्थित रहेगा। वहीं चंद्रमा देर रात तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में रहेगा।
राशियों की बात करें तो सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा मकर राशि में रहेगा। ग्रहों और नक्षत्रों की यह स्थिति ज्योतिषीय गणना में विशेष महत्व रखती है।
आयुष्मान के बाद बनेगा सौभाग्य योग
25 अगस्त को सुबह करीब 7 बजकर 39 मिनट से 7 बजकर 41 मिनट तक आयुष्मान योग का प्रभाव रहेगा। इसके बाद सौभाग्य योग शुरू होगा।
ज्योतिषीय मान्यताओं में सौभाग्य योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। इस दौरान धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ और शुभ संकल्प किए जा सकते हैं।
अभिजित मुहूर्त में किए जा सकते हैं शुभ कार्य
25 अगस्त को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 3 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। पंचांग में अभिजित मुहूर्त को दिन के प्रमुख शुभ समयों में गिना जाता है।
किसी विशेष कार्य के लिए शुभ मुहूर्त की आवश्यकता हो तो स्थानीय पंचांग और कार्य की प्रकृति के अनुसार समय का विचार करना उचित माना जाता है।
अमृत काल भी रहेगा प्रभावी
इस दिन अमृत काल दोपहर 3 बजकर 48 मिनट से शाम 5 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमृत काल को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय माना जाता है।
हालांकि इस अवधि में राहुकाल के समय का भी ध्यान रखना जरूरी है। किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए समय चुनते समय स्थानीय पंचांग की गणना के अनुसार शुभ-अशुभ समय का मिलान किया जाता है।
राहुकाल में शुभ कार्यों से बचने की मान्यता
मंगलवार को राहुकाल दोपहर 3 बजकर 38 मिनट से शाम 5 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।
इसके अलावा गुलिक काल दोपहर 12 बजकर 28 मिनट से 2 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। यमगंड काल सुबह 9 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 54 मिनट तक रहेगा।
इन अवधियों को भी परंपरागत रूप से महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है।
उत्तर दिशा में रहेगा दिशाशूल
25 अगस्त, मंगलवार को उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिषीय और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।
यदि किसी आवश्यक कारण से उत्तर दिशा की यात्रा करनी पड़े तो प्रस्थान से पहले परंपरागत ज्योतिषीय उपाय किए जाने की मान्यता है। हालांकि यात्रा संबंधी निर्णय लेते समय व्यावहारिक परिस्थितियों को प्राथमिकता देना भी जरूरी है।
कर्ज और आर्थिक परेशानी से मुक्ति के लिए करें शिव-पार्वती की पूजा
भौम प्रदोष और मंगला गौरी व्रत के संयोग को देखते हुए 25 अगस्त का दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए विशेष माना जा रहा है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर शिवलिंग का जलाभिषेक कर सकते हैं और भगवान शिव तथा माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिव आराधना से मानसिक शांति और जीवन में स्थिरता की कामना की जाती है, जबकि माता पार्वती की पूजा सुख-समृद्धि और पारिवारिक मंगल के लिए की जाती है।
सावन के अंतिम भौम प्रदोष पर बन रहा खास संयोग
सावन के अंतिम भौम प्रदोष व्रत और मंगला गौरी व्रत का एक साथ पड़ना इस दिन को धार्मिक रूप से खास बना रहा है। सावन पहले से ही भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। ऐसे में त्रयोदशी तिथि, मंगलवार और मंगला गौरी व्रत का संयोग श्रद्धालुओं के लिए पूजा-पाठ का विशेष अवसर लेकर आया है।
मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से भक्त भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।



