मुज़फ़्फ़रनगर। आमतौर पर पति की मौत के बाद एक महिला की जिंदगी कई मुश्किलों से घिर जाती है। लेकिन खतौली की मीनाक्षी की कहानी कुछ अलग है। जिस घर में वह करीब 10 साल पहले बहू बनकर आई थी, उसी घर ने पति की मौत के बाद उसका साथ नहीं छोड़ा। सास सुनीता ने बहू को बेटी माना और उसकी जिंदगी दोबारा संवारने का फैसला किया। उन्होंने अपनी विधवा बहू के लिए नया जीवनसाथी तलाशा और परिवार की सहमति से उसकी दूसरी शादी करा दी।
हरिद्वार निवासी मीनाक्षी की शादी करीब 10 साल पहले खतौली निवासी रोहित से हुई थी। रोहित की मौत के बाद मीनाक्षी पर अपनी दो बेटियों रितु और अविका की जिम्मेदारी आ गई। इसी दौरान उसके ससुर ओमपाल की भी कैंसर के चलते मौत हो गई। परिवार पर एक के बाद एक दुख आने के बावजूद सास सुनीता ने बहू का साथ नहीं छोड़ा।
सुनीता ने मीनाक्षी से बहू के रूप में नहीं, बल्कि बेटी के रूप में रिश्ता निभाया। उन्होंने उसके भविष्य के बारे में सोचा और उसके लिए नया जीवनसाथी तलाशना शुरू किया। परिवार ने राजस्थान के नारायणपुर निवासी योगेश को मीनाक्षी के लिए चुना। योगेश चाय की दुकान चलाते हैं। दोनों परिवारों की सहमति के बाद बुधवार सुबह आर्य समाज मंदिर में मीनाक्षी और योगेश का विवाह कराया गया।
इस शादी में सबसे भावुक पल तब आया, जब मीनाक्षी के देवर मोहित ने भाई का फर्ज निभाते हुए भाभी का कन्यादान किया। जिस महिला को वह वर्षों से भाभी कहकर बुलाता था, उसकी जिंदगी की नई शुरुआत में वह भाई बनकर साथ खड़ा था।
शादी के बाद विदाई का दृश्य भी भावुक कर देने वाला रहा। जिस घर में मीनाक्षी करीब एक दशक पहले बहू बनकर आई थी, उसी घर से उसकी सास ने उसे बेटी की तरह विदा किया। यह सिर्फ एक महिला की विदाई नहीं थी, बल्कि एक परिवार की ओर से उसे नई जिंदगी सौंपने जैसा पल था।
मीनाक्षी की दोनों बेटियों रितु और अविका के भविष्य को लेकर भी परिवार ने व्यवस्था की है। परिवार के अनुसार एक बेटी अपनी दादी के साथ रहेगी, जबकि दूसरी अपनी मां के साथ जाएगी।
इस शादी ने रिश्तों की उस परिभाषा को सामने रखा, जिसमें खून का रिश्ता न होने के बावजूद एक सास ने मां की तरह और देवर ने भाई की तरह अपनी जिम्मेदारी निभाई।
