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27 अक्टूबर का पंचांग: सुबह 10:52 बजे तक सिद्धि योग, जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और दिशाशूल

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नई दिल्ली। मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि रहेगी। पंचांग के अनुसार, सुबह 10:52 बजे तक सिद्धि योग रहेगा, जिसके बाद व्यतिपात योग शुरू हो जाएगा। इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। वहीं, राहुकाल दोपहर 2:59 बजे से शाम 4:23 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा, इसलिए उत्तर दिशा की यात्रा टालने की सलाह दी जाती है।

तिथि, सूर्योदय और सूर्यास्त

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि सोमवार सुबह 9:41 बजे शुरू हुई थी और मंगलवार सुबह 7:01 बजे तक रहेगी। इसके बाद कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि शुरू होकर 28 अक्टूबर की सुबह 4:07 बजे तक रहेगी।

मंगलवार को सूर्योदय सुबह 6:33 बजे और सूर्यास्त शाम 5:48 बजे होगा। चंद्रोदय शाम 6:36 बजे तथा अगले दिन चंद्रास्त सुबह 8:39 बजे होगा।

सिद्धि योग और व्यतिपात योग का समय

पंचांग के अनुसार, मंगलवार सुबह 10:52 बजे तक सिद्धि योग रहेगा। इसके बाद व्यतिपात योग आरंभ होगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में सिद्धि योग को शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल माना जाता है। इस योग के अधिष्ठाता भगवान गणेश माने जाते हैं, जिन्हें विघ्नहर्ता और कार्यों में सफलता प्रदान करने वाला देवता माना जाता है।

हालांकि, किसी कार्य के लिए शुभ समय का निर्धारण करते समय तिथि, नक्षत्र और अन्य पंचांग संबंधी स्थितियों को भी देखा जाता है।

अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल

मंगलवार को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इसे दिन के शुभ समयों में गिना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ और अन्य शुभ कार्य करना अनुकूल माना जाता है।

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अमृतकाल सुबह 11:15 बजे से दोपहर 12:43 बजे तक रहेगा। पारंपरिक पंचांग में अमृतकाल को शुभ समय माना जाता है। लोग इस अवधि में पूजा-पाठ, महत्वपूर्ण कार्यों और अन्य मांगलिक गतिविधियों के लिए समय निर्धारित करते हैं।

राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल

मंगलवार को राहुकाल दोपहर 2:59 बजे से शाम 4:23 बजे तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में नए शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है। पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं।

यमगंड काल सुबह 9:22 बजे से 10:46 बजे तक रहेगा। वहीं, गुलिक काल दोपहर 12:10 बजे से 1:35 बजे तक रहेगा। इन अवधियों को भी परंपरागत रूप से नए कार्य शुरू करने के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है।

सूर्य तुला राशि में, स्वाति नक्षत्र का प्रभाव

पंचांग के अनुसार, मंगलवार को सूर्य तुला राशि में रहेंगे और स्वाति नक्षत्र में स्थित होंगे। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मविश्वास, नेतृत्व और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। तुला राशि में सूर्य की स्थिति को नीचस्थ माना जाता है।

स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव और स्वामी राहु माने जाते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस नक्षत्र का संबंध स्वतंत्रता, बदलाव और अपने निर्णय स्वयं लेने की प्रवृत्ति से जोड़ा जाता है।

चंद्रमा रात 9:06 बजे वृषभ राशि में करेंगे प्रवेश

मंगलवार को चंद्रमा मुख्य रूप से मेष राशि में रहेंगे। रात 9:06 बजे चंद्रमा वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं में मेष राशि को ऊर्जा, साहस और तेजी से निर्णय लेने की प्रवृत्ति से जोड़ा जाता है। वहीं, वृषभ राशि को स्थिरता, धैर्य और व्यावहारिक सोच का प्रतीक माना जाता है।

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उत्तर दिशा में रहेगा दिशाशूल

मंगलवार को उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि यात्रा जरूरी हो, तो लोग अपनी पारिवारिक परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार उपाय अपनाते हैं।

27 अक्टूबर के प्रमुख पंचांग समय

विवरण समय
सूर्योदय सुबह 6:33 बजे
द्वितीया तिथि प्रारंभ सुबह 7:01 बजे
सिद्धि योग समाप्त सुबह 10:52 बजे
यमगंड काल सुबह 9:22 से 10:46 बजे
अमृतकाल सुबह 11:15 से दोपहर 12:43 बजे
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 से दोपहर 12:33 बजे
गुलिक काल दोपहर 12:10 से 1:35 बजे
राहुकाल दोपहर 2:59 से शाम 4:23 बजे
सूर्यास्त शाम 5:48 बजे
चंद्रमा का वृषभ राशि में प्रवेश रात 9:06 बजे
दिशाशूल उत्तर दिशा

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